युध्द युध्द मत चिल्लाइये

युध्द युध्द मत चिल्लाइये
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प्रधानमंत्री
रक्षामंत्री
सुरक्षा सलाहकार
या
या युध्द के लिये लालायित   लंपटों का कोई निकट संम्बंधी है सेना में ,
नही न !  इसीलिए युध्द युध्द चिल्लाते रहते है.
कोई होता तो पता चलता कि जब गोली या बम चलता है तब सैनिक के परिवार पर क्या बीतती है.
ठीक वैसे ही
जैसे बस्तर के जंगलों में जब एनकाउंटर होते है तो आसपास के आम आदिवासी घरों में लोग दम साधे पडे रहते है ,कि पता नहीं आज गोली से मरने वाला कहीं हमारे घर का तो नही हैं।
और जब सवेरे पता पडता है कि मरने वाला उसका ही बेटा या बाप है ,तब क्या बीतती है उस पर.
युद्ध युध्द मत चिल्लाइये
गोली या बम से मौत निकलती है
और उससे इन उन्मादियों को कोई फर्क नही पड़ता.
इनके पास तो मुठ्ठी भर फूल ,बिगुल की  सलामी और बलिदान की फालतू कहानिंया है.
इन्हें कहिये अपने बच्चों को सैना में भेजें, तब इन्हें भी नींद नही आयेगी जब बम और गोली चलेगी.
बात करते है  !!
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कितनी वीमत्स सोच है इनकी .
हमारे दो चार शहर तुम तो पूरे बर्बाद हो जाओगे.
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भारत के सुरक्षा सलाहकार है डोभाल ,
इन्होंने पिछले महीने कहा कि
पाकिस्तान  अणुबम का स्तेमाल करेगा तो हमारे दो चार शहर ही नष्ट होंगे ,,
लेकिन हमने स्तेमाल किया तो पूरा पाकिस्तान खतम हो जायेगा .
डोभाल जैसे लोगों को हिरोशिमा नागासाकी का इतिहास पढना चाहिए .
आप भारत के किन शहरों को हिरोशिमा बनाने को तैयार है .
आप तुरंत कहेंगे कि में पाकिस्तान के जनरल की बात क्यों नहीं कर रहा हूं.
वो तो आप और सारे मीडिया कीर्तन  की तरह  बजा ही रहे है.
हमे तो अपने शहर और वाशिन्दों की परवाह है .
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