*अपडेट : ➖बीएचयू में अभी क्या हो रहा है*

*अपडेट : ➖बीएचयू में अभी क्या हो रहा है*

लड़कियां तीन बजे तक कुलपति का इंतज़ार करेंगी. उसके बाद के लिए अभी विमर्श चल रहा है कि भूख हड़ताल पर कौन-कौन बैठ सकता है?
प्रशासनिक रवैया यह है कि एक फ़ोर्स का इस्तेमाल होना अभी तक तो तय माना जा रहा है. खाली बसें मंगवा ली गयी हैं, महिला पुलिस की टुकड़ियां जुट रही हैं. मोदी-योगी के प्रोटोकॉल में जो फ़ोर्स आई थी, उसका एक हिस्सा रोक लिया गया है. एक अधिकारी मुझसे बातचीत में कहता है, “बहुत बकचो* वीसी है यार. मिल ले. कम से कम तात्कालिक आराम तो दे दे. ये सब करने की नौबत तो नहीं आएगी. लेकिन तना हुआ है गधा कहीं का.”
वीसी साहब दो तरीके से काम कर रहे हैं. कुछ लड़कियों को उन्होंने भेजा, जो भीड़ में आकर बैठ गयीं और बाकी लड़कियों को उकसाने लगीं कि चलो वीसी हाउस के बाहर चला जाए. कल रात कुछ लड़कियां इसी चक्कर में चली भी गयीं, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. एबीवीपी के लड़के “महामना के सम्मान” की आड़ में जब झगड़ा नहीं रोप पाए तो आज की रणनीति सामने आई.
दो से तीन छात्र और अध्यापक, हॉस्टल वार्डेन बाहर आए और साथ होने का दावा करते हुए बोलने लगे कि कुछ नहीं होगा, चलो वीसी हाउस चला जाए. वहीँ पर मिला जाएगा. यहां पर भीड़ टूटने की कगार पर आ गयी तो कुछ लड़कों और लड़कियों ने खेल समझकर उन सभी को चलता कर दिया.
फिलहाल सभी हॉस्टलों में ताला मार दिया गया है. लड़कियां वापिस जा नहीं सकतीं. रहना और गुजरना यहीं पर है. लड़कों ने चंदा मिलाया और तीन चार पेटी पानी की बोतलें और कुछ नमकीन-बिस्किट के पैकेट ले आए.
कुछ लड़के चार्ट पेपर और कुछ रंगों की शीशीयां लेते आए. पोस्टर बनने लगा है. कार्टून बन गया है. बहुत कुछ हो रहा है अभी यहां पर. बहुत कुछ होना भी है अभी यहां पर. मैं थोड़ी ही दूरी से यह स्टेटस अपडेट कर रहा हूं.
21 सितम्बर की शाम आठ बजे के आसपास एक लड़की की कुर्ती में तीन लड़कों ने हाथ डाल दिया था. फिर कहा, “हॉस्टल लौटेगी या रेप करवाएगी?” लड़की अभी सहमी हुई है और सामने नहीं आ रही है. लेकिन यह उसकी सहेलियां हैं जो बहुत कुछ से समझौता कर बैठी हैं.

कौन थे वो लोग जो पोस्टर और बैनर छप जाने पर बी एच यू की 100 साल की मर्यादा को तार तार बता रहे थे |
आँखों में पानी और रोशनी बची हो तो देख लो लकड़ियों को पीटा गया है | सी आर पी ऍफ़ और पुलिस बल ने होस्टल में घुस के लड़कियों को पीटा है | रबर की गोलियाँ दागी गई है उनपर |
कोई चूतिया और राजनीतिक लॉजिक देने से पहले से सोचना की अगर तुम्हारी बहन ऐसे सिसक रही होती तो क्या करते |

*मैं बनारस से बोल रहा हूं…बीएचयू. से*
यहां बीएचयू के अंदर महिला महाविद्यालय है. रात बारह के करीब पुलिस ने जिलाधिकारी की मौजूदगी में बीएचयू के मेन गेट पर बैठे छात्रों और छात्राओं पर लाठीचार्ज कर दिया.
लड़के भागे अंदर. तो पुलिस ने भी दौड़ा लिया अंदर तक. लड़कियां भागीं महिला महाविद्यालय के अंदर तो कुछ लोगों ने महिला महाविद्यालय का दरवाजा भी तोड़ दिया. अब पुलिस महिला महाविद्यालय के अंदर भी घुस गयी. लड़कियों को दौड़ाकर पीटा. भागने में जो लड़कियां गिर गयीं, पुलिस ने उनके ऊपर चढ़कर पिटाई की.
पुलिस ने लड़कियों को जहां देखा, वहां पीटा. रोचक बात ये जानिए कि महिला पुलिसकर्मी एक भी नहीं. लड़कियां मुझे फोन कर-करके रोते हुए बदहवासी में जानकारियां दे रही हैं. एक लड़की बोलती हैं, “हमें इस खबर को किसी तरह बाहर पहुंचाना है.”
अब थोड़ा और अंदर चलें तो पुलिस बिड़ला हॉस्टल के अंदर घुस गयी है. बिड़ला चौराहे पर लड़कों पर आंसू गैस के गोले और रबर की गोलियां चलायी जा रही हैं. लड़के उधर से पत्थर चलाकर आंदोलन को दूसरी दिशा में मोड़ चुके हैं.
ऐसा दो टके का कुलपति नहीं देखा, जो मिलने का वादा करके मिलता नहीं है, और सीसीटीवी लगवाने की मांग करती लड़कियों पर लाठी चलवा देता है.
लेकिन लाठी चलना अच्छा है. लाठीचार्ज प्रदर्शन का एक पक्ष है, किसी प्रदर्शनकारी के जीवन में यह जितना जल्दी आ जाए, उतना अच्छा. डर उतना जल्दी भागता है. ये मत सोचिए कि मैं लाठीचार्ज को इंडोर्स कर रहा हूं. बल्कि मैं एक पहले से ज्यादा बेख़ौफ़ हुजूम का और खुले दिल से स्वागत कर रहा हूं।
© *सिद्धान्त मोहन की वाल से साभार*✏

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