अहिंसा ,योगा और स्वछता दिवस .


अहिंसा ,योगा और स्वछता दिवस .

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2 अक्टूबर गांधी जयंती को संयुक्त राष्ट्र संघ ने अहिंसा दिवस के रूप में घोषित किया है .
हां उसी संयुक्त राष्ट्र संघ ने जिसने योगा दिवस की घोषणा की थी.
संघ प्रेरित सरकार अहिंसा के प्रति अनुदारता इस सीमा तक है कि उसी अहिंसा दिवस को स्वछता दिवस में बदल दिया .
इतनी उदारता तो है इनमें कि उन्होंने अहिंसा दिवस को
नफरत दिवस में नहीं बदला .
यही है उनका गांधीजी के प्रति नाटकीय प्रेम .
स्वछता बहुत अच्छी पहल है लेकिन अहिंसा का विकल्प भी नहीं है .
मुझे तो शक है कि सरकार में किसी को मालूम भी होगा कि यूपीए सरकार की दूसरी पारी में मनमोहन सिंह के प्रस्ताव पर दुनियाँ के सभी देशों ने सर्वसम्मति से इसकी घोषणा की थी.
योगा दिवस मनायें यह अच्छी बात है ,लेकिन अहिंसा के प्रति भी भारत सरकार के कमिटमेंट को दोहराया ही जाना चाहिए ,भले ही संघ को यह सूट न करता हो.
यह कौन नहीं जानता कि मोदी भारत के प्रधानमन्त्री है सिर्फ संघ के स्वयंसेवक नही.
विदेशों में बुद्ध और गांधी की माला फेरने वालों को कभी कभी भारत में भी बुद्ध और गांधी को याद कर लेना चाहिए.
गांधी सिर्फ झाडू  के ही नहीं ,सत्य अहिंसा और राष्ट्रीय आंदोलन की विरासत के भी वे प्रतीक है.
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