एक विशाल जन आन्दोलन से निकली कांग्रस पार्टी आर एस एस की रणनीति से पस्त कैसे हो गई,-नन्द कश्यप

एक विशाल जन आन्दोलन से निकली कांग्रस पार्टी आर एस एस की रणनीति से पस्त कैसे हो गई,-नन्द कश्यप

एक विशाल जन आन्दोलन से निकली कांग्रस पार्टी आर एस एस की रणनीति से पस्त कैसे हो गई,-नन्द कश्यप

21  8.17

***

एक बात मेरे ज़ेहन में लगातार उमड़ घुमड़ रहा था कि जब आज भी आर एस एस की स्वीकार्यता भारतीय जनमानस में न्यून है, फिर एक विशाल जन आन्दोलन से निकली कांग्रस पार्टी आर एस एस की रणनीति से पस्त कैसे हो गई, आज राजीव गांधी का जन्मदिन है ,और कांग्रेस को इस देश के चुनावी इतिहास में अब तक की सबसे ज्यादा सीटें 415 दिलाने वाले राजीव गांधी खुद पांच साल सरकार नही चला पाए, और उनकी ह्त्या के बाद कांग्रेस पार्टी नीतिगत मामलों में लगभग यू टर्न लेकर दक्षिणपंथी नरम हिंदुत्व की पार्टी में कैसे तब्दील हो गई,इसका उत्तर पाने मैं तमाम सन्दर्भ ,इतिहास ,आयाराम गया राम ,देख पढ़ के इस नतीजे पर पहुंचा कि आर एस एस को जब यह समझ आ गया कि वह अपने स्वतंत्र अभियान से कभी भी सत्ता तक नही पहुच सकता तो उसने सभी पार्टियों में और ख़ास कर कांग्रेस में अपने लोग प्लांट करने शुरु किये , वो राजीव गांधी जिसे मंदिर से कोई मतलब नही था उनकी अपनी सोच बेहद प्रगतिशील आधिनिक तकनीक से देश के आधारभूत ढाँचे को विस्तार देने की थी ,अरुण नेहरू के कहने पर अयोध्या में मंदिर का ताला खुलवाकर बैठे बिठाए विवाद मोल लिया, फिर उस अति से दूसरी अति ,शाहबानो मामले में संविधान संशोधन जिसने हिन्दू कट्टरता को ही पोषित किया ,इसे किसी मुसलमान को फायदा नही हुआ, जो व्यक्ति भ्रष्टाचार को जड़ से उखाड़ फेंकने की मंशा से नौकरशाही पर हमला किया ,यह बयान देकर कि दिल्ली से चलने वाला एक रुपया नीचे पहुंचते तक 15 पैसे रह जाता है,राजनीति में सेवक नही सत्ता के दलाल काबिज हो रहे ,लगभग पूरे सत्ताधारी वर्ग से दुश्मनी मोल ले लिया था, फिर आर एस एस की पृष्टभूमी वाले भूरे लाल ,आर एस एस संस्कार वाले वीपी सिंग अरुण नेहरु ,सहित एक पूरा जमावड़ा उतर पडा राजीव गांधी के खिलाफ , बोफोर्स गढ़ लिया गया, (रक्षा सौदों में दलाली एक तरह से अन्तराष्ट्रीय प्रोटोकाल है ,सारे देशों की राजधानियों में हथियारों के सौदागरों की लाबी होती है

कम्पनियां इसके लिए बकायदे धन रखतीं हैं, और इनको कैसे खर्च किया जगाया इसका पक्का हिसाब रखतीं हैं, ,राजीव गांधी ने इस तरह की लाबी को गैर कानूनी करार करने उसने केबिनेट में प्रस्ताव भी पास करा लिया था, उधर स्वीडन में बेहद ईमानदार और सादगी से रहने वाले ओलेफ पाल्मे थे ,जो प्रधानमंत्री होते हुए भी बस से आफिस और घर जाते थे, और उनकी भी ह्त्या बस में ही हुई थी ,इनसे वहाँ की हथियार लाबी नाखुश थी ,इसलिए मैंने कहा कि बोफोर्स गढ़ लिया गया और एक संभावनाशील युवा प्रधानमंत्री की तीन चौथाई बहुमत की सरकार पांच साल नही चल सकी ,और अंततः 91 में इनकी ह्त्या करवा दिया गया.

खैर मैं कह रहा था कि सीधे आर एस एस के, आर एस एस संस्कार वाले और धुर दक्षिणपंथी रणनीतिकार कांग्रेस में ऐसे कब्जा जमाये कि जिन जिन कामों को अपने पहले भाषण में राजिव गांधी ने नही करने कहा वही काम होने लगे, और धीरे धीरे कांग्रेस मरती गई, आज वो तमाम लोग वापस भाजपा में हैं ,बाक़ी जाने की तैयारी में हैं ,और यदि कांग्रेस सहित अन्य पार्टियों में छिपे बैठे संघियों और शुद्ध कारपोरेट दलालों को समय रहते पहिचाना नही गया और एन चुनाव के समय ये फिर कांग्रेस छोड़ेंगे तो इससे भारतीय राजनीति में एक खतरनाक शून्य निर्मित हो जाएगा ,इसलिए हमें यह समझ विकसित करना चाहए कि जितने अधिक लोग फिर वो शरद पवार हो या ए राजा ,ये भाजपा या एन डी ए में जाते हैं तो उसे विकल्प की राजनीति के लिए अवसर के रूप में देखना चाहिए, और कांग्रेस से अभी और ऐसे चेहरे भाजपा में जा सकते हैं जिनके बारे में कल्पना नही किया जा सकता.

इसलिए राहुल गांधी को पप्पू कहना बंद करना चाहिए और उसे विपक्ष को एक राजनैतिक वैचारिक धुरी देने वाले साहसी नेता के तौर पर देखना चाहिए ,वैसे मोदी का कांग्रेस सफाई अभियान अब एक ऐसे मोड पर है जहां कांग्रेस सचमुच कचरा मुक्त हो जाए और यहाँ से समेटे कचरे के बोझ से मोदी सरकार खुद दब जाए.॥

**

नन्द कश्यप

CG Basket

Related Posts

Leave a Reply

Create Account



Log In Your Account