आईजी कल्लूरी का आदेश है कि आप आकर सोनी सोरी के विरुद्ध एफआईआर कीजिये कि सोनी सोरी आपको बताए बिना नक्सलियों से मिलने चली गई है

**आईजी कल्लूरी का आदेश है कि आप आकर सोनी सोरी के विरुद्ध एफआईआर कीजिये कि सोनी सोरी आपको बताए बिना नक्सलियों से मिलने चली गई है
** लोकतन्त्र की फिक्र करने वाले लोगों , बस्तर पर नज़र बनाए रखिए ।
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हिमांशु कुमार
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सोनी सोरी के गन मैन के पास कल पुलिस थाने से फोन आया ।

गीदम थाने के थानेदार ने कल सोनी सोरी के गनमैन को फोन कर के आदेश दिया की तुम आकर सोनी सोरी के खिलाफ मेरे थाने मे एक एफआईआर दर्ज़ कराओ ।

लेकिन सोनी सोरी के गनमैन ने थाने जाने से मना कर दिया ।

थानेदार ने 6 सितंबर को सुबह नौ बजे गनमैन को धमकाते हुए फोन पर कहा कि आईजी कल्लूरी का आदेश है कि आप आकर सोनी सोरी के विरुद्ध एफआईआर कीजिये कि सोनी सोरी आपको बताए बिना नक्सलियों से मिलने चली गई है ।

सोनी सोरी के गनमैन ने कहा कि मै ऐसा नहीं करूंगा हो सकता है कि मैडम घर के भीतर ही हों ,

बाद मे गनमैन ने आकर सोनी सोरी के घर का दरवाजा खटखटाया तो सोनी सोरी अपने बीमार बेटे के पास मिली ।

असल मे पाँच तारीख को सोनी सोरी एक गाँव मे जाना चाहती थी ।

उस गाँव मे पुलिस ने तीन आदिवासी लड़कियों से बलात्कार कर के गोली से उड़ा दिया है ।

उसी गाँव से चालीस निर्दोष आदिवासियों को पुलिस पकड़ कर ले गई और , गाँव वालों को बंदूकें पकड़वा कर आईजी कल्लूरी के साथ फोटो खिंचवा कर मीडिया मे खबर फैला दी गई कि चालीस नक्सलियों ने आईजी कल्लूरी के सामने आत्मसमर्पण किया है ।

सोनी सोरी ने मामले की जांच करने के लिए जब उस गाँव मे जाने की कोशिश करी तो पुलिस ने उनकी टैक्सी को ज़ब्त कर लिया ।

सोनी सोरी ने पुलिस वालों से कहा कि मै बस्तर की बेटी हूँ , किसी भी रास्ते से गाँव तक पहुँच जाऊँगी और अपने लोगों से मिलूँगी ज़रूर ।

उसके बाद जब अपने बीमार बेटे की सेवा करने की वजह से कुछ घंटे तक सोनी सोरी घर से बाहर नहीं निकली।

तो पुलिस को लगा कि सोनी सोरी बिना बताए पीड़ित आदिवासियों से मिलने उनके गाँव चली गई है ।

इसलिए पुलिस ने सोनी सोरी को फर्जी केस मे फँसाने की चाल चली , और सोनी के गनमैन से सोनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज़ करने के लिए दबाव डाला ।

आप देख सकते हैं की छत्तीसगढ़ मे सरकार और पुलिस अपराधी गिरोह की तरह काम कर रहे हैं।

सरकार आदिवासियों की ज़मीनें छीन कर अमीर उद्योगपतियों को देना चाहती है ।

इसलिए पुलिस को,आदिवासियों को मारने, पीटने, धमकाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है ।

आदिवासियों की मदद करना अपराध माना जा रहा है ।

यानी अपराध करना देशभक्ति बन चुकी है ,

और देश के लोगों के मूल अधिकारों की रक्षा करना अब अपराध बना दिया गया है ।

लोकतन्त्र की फिक्र करने वाले लोगों , बस्तर पर नज़र बनाए रखिए ।

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