वर्तमान समय में सरकार ने यह मान लिया है कि वामपंथी और बुद्धिजीवी जो भी होगा वह हमारे खिलाफ ही होगा


 वर्तमान समय में सरकार ने यह मान लिया है कि वामपंथी और बुद्धिजीवी जो भी होगा वह हमारे खिलाफ ही होगा  आज इनके लिये देश के सारे बुद्धिजीवी विरोध में खड़े दिखाई देते है.
—  राजेश जोशी

** जनवादी लेखक संघ का स्थापना सम्मेलन भिलाई में संपन्न.
** कपूर वासनिक (बिलासपुर )बने प्रान्तीय तदर्थ समिति की अध्यक्ष .अन्य पदाधिकारी और कार्यकारणी का चयन
** जनकवि राजेश जोशी ,रामप्रकाश त्रिपाठी और मनोज कुलकर्णी ने किया संबोधित .
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भिलाई / जनवादी लेखक संघ छत्तीसगढ़ के स्थापना सम्मेलन को संबोधित करते हुये प्रमुख जनवादी कवि राजेश जोशी ने कहा कि वर्तमान समय में सरकार ने यह मान लिया है कि वामपंथी और बुद्धिजीवी जो भी होगा वह हमारे खिलाफ ही होगा  आज इनके लिये देश के सारे बुद्धिजीवी विरोध में खड़े दिखाई देते है ,इसलिए तानाशाही और फासीवादी हमले सबसे ज्यादा इस तबके पर ही हो रहा है .
बीजेपी की मुश्किल यही है कि राजनैतिक सत्ता तो इन्हें मिल गई है लेकिन बोध्दिक सत्ता अर्जित नहीं की जा सकी है ,यह अच्छी बात है कि देश की बौद्धिक सत्ता हमेशा वामपंथियों  के हाथ में रही है .कांग्रेस के समय भी यह मुश्किल थी लेकिन उन्होंने इसे अपनी नीतियों से कमोवेश प्राप्त कर  लिया था.
भाजपा की कोशिश यही है देश की बौद्धिक सत्ता को तोड दिया जायें ,इसीलिए देश में स्थापित साहित्य ,फिल्म ,संस्कृति ओर इतिहास परिषद् जैसे स्वायत्त संस्थाओं में  अयोग्य और संघ के लोगों को थोप कर उसकी प्रकृतिक को नष्टे कर दिया जावे.
आजादी के बाद पहली बार ऐसा बडा आंदोलन  हुआ कि लेखकों के अवार्ड वापसी पर पूरी केन्द्र सरकार को जबाब देना पडा और रक्षात्मक स्थित में पहुचना पडा. था,इसका राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर असर पड़ा.

** महाश्वेता देवी की कहानी द्रोपदी  (नाट्यरूपांतर) को भी नहीं बख्शा.
 जलेसं के सचिव और प्रख्यात  रंग शिल्पी मनोज कुलकर्णी  ने अभी 21 सितंबर को हरियाणा के केन्द्रीय स्कूल का जिक्र  करते  हुये बताया कि  महाश्वेता देवी की कहानी द्रोपदी का नाट्यरूपांतरण  का शो वाकायदा स्कूल की अनुमति से किया जा रहा था ,बीच शो में एबीबीपी के लोग मंच पर चढ गये और नाटक को सैनिकों  का अपमान बता कर मंच तहसनहस कर दिया , बाद में सैनिकों की विधवाओं को साथ लेके शहर में प्रदर्शन भी किये.
कहानी कुछ यों है , कि  एक महिला के साथ  सैनिक बलात्कार करते है जिसके प्रतिरोध स्वरूप  वो  महिला अपने वस्त्र पहनने से इंकार कर देती है .
एसा ही इन्दौर में इप्टा के सम्मेलन में भी किया गया था.
  मनोज कुलकर्णी ने सम्बोधित करते हुये कहा कि हमारे देश के कम्पोजिट कल्चर को खतम करने की कौशिश संकुचित विचारधारा के लोग कर रहे है,इसका हमें मिलजुलकर मुका़बला करना होगा ,
जलेसं को और उदार होने की जरूरत है ,जो भी धर्मनिरपेक्ष है ,लोकतांत्रिक है और जातिवाद विरोधी है हमें उनको साथ लेके चलना होगा ,यह सयय  सबको साथ लेकर विषमस्थिति का सामना करने का है.
सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे रामप्रकाश त्रिपाठी ने कहा दाभोलकर ,पंसारे और कलबुर्गी पर हमला हमारे विवेक पर हमला था जो अब और ज्यादा बढ गया है ॥
हमलों का यह विद्रूप भयावह तरीके से पहले कभी नहीं आया है .
छत्तीसगढ़ में आदिवासी दलितों और अल्पसंख्यक पर हमले तेजी से बढे है ,,हमें इन समूह के साथ संघर्ष में खडा होना होगा. हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान की बात करने वाले लोगैं ने हिन्दी के साथ दूसरी भाषाओं की भी दुर्गति कर दी है , आज सारी योजनायें और नारे तक अंग्रेज़ी में गढे जा रहे है ,कारपोरेट की जरूरत के हिसाब से भाषा तैयार की जा रही है.
रामप्रकाश ने कहा कि आजादी के समय डा.आम्बेडकर ने संसद में कहा था कि आज़ादी तो मिल गई लेकिन इसमें हमारी आज़ादी का क्या होगा. यह प्रश्न आज भी ज्यों का त्यों खड़ा है
सम्मेलन के अंत में बसंत त्रिपाठी ने राज्य स्तरीय तदर्थ समिति के गठन का पस्ताव किया जो आगामी राज्य सम्मेलन का आयोजन करेगा और जिला इकाइयों के गठन की कार्यवाही करेगा.
राज्य समिति में बिलासपुर के कपूर वासनिक को अध्यक्ष ,विनोद साव (रायपुर ) कार्यकारी अध्यक्ष ,के रविन्द्र, विजय राठौर ,नासिर अहमद सिकंदर को उपाध्यक्ष, भास्कर चौबे संयुक्त सचिव ,सतीश सिंह ,अजय चंद्रवंशी ,किशन लाल ,सहसचिव और राकेश को कोषाध्यक्ष चुना गया .
साथ में 17 सदस्यीय कार्यसमिति का चयन किया गया .
सम्मेलन का संचालन बसंत त्रिपाठी ने किया ,सम्मेलन में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से आये दो सो साहित्यकार शामिल हुये.
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