भूल नहीं पाती …ज़हीन सिंह ;अभिव्यक्ति 2

भूल नहीं पाती …ज़हीन सिंह ;अभिव्यक्ति  2

भूल नहीं पाती …ज़हीन सिंह ;अभिव्यक्ति 2

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  • भूल नहीं पाती …
    वो बचपन कि खिलखिलाहट ,
    छोटे छोटे कदमो से डरी सहमी सी मां के पास
    आना भूल नहीं पाती
    अपनी बडी बहन के कपड़ों की नकल करना
    भूल नहीं पाती .
    भाई का मेरी प्लेट से पोहा चुराना ,
    वो गर्मी के दिनों में बर्फ को गिलास में डालकर
    खाना ,बहुत याद आता है .
    वो पेडों से अमरूद चुराना ,वो भाई का दादी वाला
    खेलना .
    वो मम्मी के कढी चावल पर नाम मुहं सिकोड़ना .
    बाबा की रानी की कहानी सुनाना
    पापा को जबरदस्ती पैरेंट्स मीटिंग मे ले जाना .
    मुझे बहुत याद आती है ,
    मेरा रूठ जाना और मम्मी का मनाना
    माँ के हाथो का आलू पराठा .
    बहन का जला हुआ केक बनाना .
    भाई का पोहे में मिर्च भरना .
    पापा का सुबह पढने के लिए उठाना .
    यह जीवन के वो पल है ,जो लौट के कभी नही
    आ सकते ..
    लेकिन जब भी ख्याल आ जायें तो
    मन में तरंग आ जाती है .
    ***
    1.8.17

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