टुंपा अ लव स्टोरी (?)फिल्म के बहाने अमेरिकी दादागिरी की पड़ताल : अजय आठले का निर्देशन

8.8.17
**
रमेश शर्मा की समीक्षा

आज इला सिनेमा में अजय आठले के निर्देशन में रायगढ़ इप्टा द्वारा निर्मित 45 मिनट की लघु फिल्म टुम्पा अ लव स्टोरी (?) देखने का अवसर इप्टा की ओर से उपलब्ध करवाया गया .

रमानाथ रॉय की कहानी पर बनी यह फिल्म वैश्विक राजनीति के धरातल पर अमेरिका जैसे सुपर पॉवर की दखलंदाजी को जिस रूप में प्रदर्शित करती है वह ध्यातव्य है | यद्यपि यह कहानी एक शिष्या और उसके गुरू के बीच रिश्तों के ताने बाने को लेकर बुनी गई है जिसमें शिष्या गुरु से शादी करने की इच्छा रखती है क्योंकि उसे लगता है कि वह उनसे प्रेम करती है जबकि गुरू इस रिश्ते के प्रति इस स्तर तक उदासीन रहते हैं कि किसी भी हालत में यह शादी उन्हें मंजूर नहीं रहती |

दोनों के बीच इस रिश्ते को लेकर जब पहली बार बातचीत के लिए शिष्या गुरू के पास जाती है तो गुरू साफ़ मना कर देते हैं , बात बात में फिल्म की नायिका ( शिष्या ) नायक याने गुरू से पूछती है कि आप किससे डरते हैं जिसके कहने पर यह शादी हो सके तो गुरू बेपरवाह होकर कह उठते हैं कि अमेरिका के राष्ट्रपति से ही उन्हें डर लगता है |

दरअसल यहीं से फिल्म की शुरूवात होती है . अमेरिका के राष्ट्रपति को लड़की का मेल जाता है कि वे उसकी शादी करा दें . इस मेल का जवाब भी नायक और नायिका के पास आता है . इस मेल में नायक के लिए सख्त आदेश होता है कि वह शादी कर ले अन्यथा मुसीबतों से उसका जीवन भरने वाला है | इस मेल की छानबीन भी नायक अर्थात गुरू के पत्रकार मित्र की ओर से करवायी जाती है जो सचमुच व्हाईट हाउस की ओर से भेजी गई होती है | इससे मुक्ति का रास्ता तलाशते हुए नायक और उसके पत्रकार मित्र पहले कलेक्टर फिर एसपी फिर मंत्री तक अपनी फ़रियाद लेकर जाते हैं पर अमेरिका के राष्ट्रपति का आदेश होने के नाम पर सभी अपने हाथ खड़े कर देते हैं | मंत्री का नायक को समझाते हुए यह सलाह देना कि आप यह शादी कर लीजिए तभी आपकी भलाई है एक किस्म की राजनैतिक मजबूरी का आख्यान ही है .

पूरी दुनिया में व्हाईट हाउस का जो आंतक है फिल्म के इन सभी दृश्यों में उसकी झलक दिखाने की कोशिश हुई है . अंततः व्हाईट हाउस की ओर से भेजे गए कमान्डोस शादी के मंडप तक नायक को ले जाते हैं और जोर जबरदस्ती यह शादी संपन्न होती है .
कुछ दिन सब ठीक चलता है पर आपसी सहमति के अभाव में जोर जबरदस्ती से जुड़े रिश्तों में जब खटास आने लगती है तब उसकी खबर भी व्हाईट हाउस तक किसी माध्यम से पहुंचती है | शायद यह बात अमेरिका के राष्ट्रपति को रास नहीं आती | एक दिन दोनों (नायक और नायिका) के नाम से व्हाईट हाउस से एक एक पार्सल आता है , जब उसे दोनों खोलते हैं तो उसमें एक एक पिस्टल होता है .दोनों एक दूसरे के ऊपर उसे तानते हैं और भय से सिहर उठते हैं .

इस घटना के बहाने यह दिखाने की कोशिश हुई है कि एक दूसरे के मन में भय पैदा करके आपसी रिश्तों को भले ही सुधारा नहीं जा सके पर उसे बनाए रखा जा सकता है | यही अमेरिका के वैश्विक राजनीति की असल पालिसी है जिसे पूरी दुनिया में बहुत तानाशाही तरीकों से उसने अमल किया हुआ है | दरअसल मानवीय रिश्तों के संबंधों के बहाने अमेरिका के दादागिरी पूर्ण वैश्विक राजनीति को दिखाए जाने की कोशिश ही इस फिल्म का केन्द्रीय बिषय है जो एक बड़े केनवास पर इसे देखे जाने की मांग करता है | शायद इसलिए कुछ दर्शकों को इसे समझने के लिए थोड़ी मशक्कत उठानी पड़ सकती है जैसा कि फिल्म के अंत में बातचीत सेसन के दरमियान वहां मैंने महसूस किया |

बहरहाल रायगढ़ जैसे छोटी जगहों में इस तरह के फिल्म का बनकर प्रस्तुत होना अवश्य सुखकर घटना है | रायगढ़ इप्टा और फिल्म से जुड़े सभी साथी इसके लिए बधाई के पात्र हैं |
-***

Ramesh Sharma

Leave a Reply

You may have missed