बस्तर में भीमा कड़ती और एमुला सुकमती आम आदिवासी ही थे ,जिनकी हत्या झूटे मुठभेड़ में की :सोनी सोरी के खिलाफ झूठा आरोप

31.7.17
कल एक प्रमुख और प्रतिष्ठित समाचार पत्र ने नक्सलियों की विज्ञप्ति के आधार पर यह आरोप लगाया की किरन्दुल इलाके में हिरोली गाँव में एक मुठभेड़ में भीमा कड़ती और एमुला सुकमती नाम के नक्सलियों को मार गिराया था ,इस मुठभेड़ को फर्जी बताकर सोनी सोरी ने पुलिस कार्यवाही पर प्रश्न उठाये थे.और कहा था की यह दोनो आम आदिवासी थे इनका नक्सलियों से कोई सम्बन्ध नही था .
और अब उन्ही नक्स्लियों ने प्रेस स्टेटमेंट जारी करके उन दोंनो को अपना साथी बताया है .साथ ही अखबार ने नक्सली प्रेस स्टेटमेंट भी पोस्ट किया है .
इसके बाद सोनी पर हमले शुरू हो गये है .सोशल मीडिया पर यह भी लिखा जा रहा है कि अब किसी सबूत की क्या जरूरत है ,सोनी सोरी नक्सली समर्थक ही नहीं बहुत बड़ी नक्सल है उसने बहुत लोगो को मरवाया है,आदि आदि .
जिस नक्सली प्रेस विज्ञप्ती को आधार बनाया गया है ,उसे किसी ने गंभीरता पूर्वक पढा ही नही गया या उसका उपयोग जान बुझकर सोनी और आम आदिवासियों के खिलाफ किया जा रहा है.वे भी अच्छी तरह जानते है ,की बस्तर में पुलिस और मओवादियो के अलावा इस लड़ाई में एक तीसरा पक्ष भी है जो इस मैदान में निर्दोष लोगों पर हो रहे अत्याचार और उनके हक और अधिकार की लूट के खिलाफ सशस्त्र क्रांति पर विश्वास नही करते हुए , तमाम प्रताड़ना को झेलते हुए भी सड़क के रास्ते बड़ी लड़ाई लड़ रहे हैं । दोनों ही पक्षों से सबसे बड़ा खतरा उठाकर लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए , जिन्हें सबसे ज्यादा टारगेट कार्पोरेट के इशारे पर सरकार और उसके बनाये समानांतर असमाजिक संगठन कर रहे है।
अब आते है विकल्प की विज्ञप्ति पर वह हमारे पास भी है , अखबार को समझने में गलती हो गयी , विकल्प ने अपने पार्टी मेम्बर और जनमिलिशिया के मारे गए कामरेडों को श्रद्धांजलि देते समय उन आम जनता को भी श्रद्धांजलि दी है जो निर्दोष मारे गए है । भीमा कड़ती और एमुला सुकमती का नाम निर्दोष मारे गए जनता की सूची में शामिल है । हर साल माओवादी ऐसा ही विज्ञप्ति जारी करते है , जिसमे अपने पार्टी मेम्बर , जनमिलिशिया , सबके पद सहित नाम देते हुए निर्दोष मारी गयी जनता को भी श्रद्धांजलि देते है ,ठीक एसा ही इस बार हुआ है .

सबसे दुखद बात यह कि जिस सोनी सोढ़ी पर बिना तथ्य के आरोप लगाया गया है , पत्रकारिता के मानदंडों के तहत उनका पक्ष भी नही लिया गया है .
फर्जी मुठभेड़ को सही बताने की कोशिश करने वाले किस तरीके से इस खबर को उठाकर अब लोकतांत्रिक तरीके से लड़ रही सोनी सोरी को बदनाम करने में लग गये .
सोनी लोकतांत्रिक तरीके से बस्तर में आदिवासियों की लडाई लड रही है ,जो दोनो तरफ से युद्द में पिस रहे है.
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