जादू-टोने का अस्तित्व नहीं, वैज्ञानिक सोच अपनायें – डाॅ. दिनेश मिश्र

शासकीय माध्यमिक शाला, ग्राम कचना में जागरण अभियान

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27.7.17

अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति द्वारा चलाये जा रहे जनजागरण अभियान के अंतर्गत शास. माध्यमिक शाला कचना में आयोजित सभा में समिति के अध्यक्ष डाॅ. दिनेश मिश्र ने कहा – कुछ लोग अंधविश्वास के कारण  हमेंशा शुभ-अशुभ के फेर में पड़े रहते है, कुछ बिल्ली के रास्ता काटने को अशुभ मानते है तो कुछ कौंआ दिखने को, तो कुछ बाहर जाते समय पीछे से टोकने को अशुभ मानते है। लेकिन यह सब हमारे मन का भ्रम है। न ही बिल्ली के रास्ता काटना अशुभ है न ही कौंआ दिखना, न ही बाहर जाते समय टोकना।

शुभ-अशुभ सब हमारे मन के अंदर ही है। किसी भी काम को यदि सही ढंग से किया जाये, मेहनत, ईमानदारी से किया जाये तो बिल्ली, कौंआ, टोका-टाकी में कोई नुकसान नहीं पहुंचता। मनुष्य आंकड़ों के हिसाब से भले ही इक्कीसवी सदी में पहुंच गया है, विज्ञान के नवीनतम तकनीक मोबाइल, टी.वी., तेज वाहनों का उपयोग कर रहा है लेकिन समाज में अभी भी कई मामलों में अठारहवी सदी की मान्यताएं व कुरीतियां जड़े जमायी हुई है .

जिसके कारण जादू, टोना, टोनही, बलि व बाल विवाह जैसी परंपरायें व अंधविश्वास आज भी वजूद में है जिससे प्रतिवर्ष अनेक मासूम जिंदगियां तबाह हो रही है, पिछले कुछ माहों में अनेक महिलाएं टोनही के आरापे में मौत के घाट उतार दी गई जबकि तंत्र, मंत्र, झाड़-फूंक, भूत-प्रेत के वहम में दर्जनों से अधिक व्यक्तियों को प्रताड़ना सहनी पड़ी जो सभ्य समाज के लिए बहुत शर्मनाक है तथा वर्तमान में वैज्ञानिक सोच को अपनाने की आवश्यकता है।

डाॅ. दिनेश मिश्र ने कहा – समाज में महिलाओं को सम्मान देने की परंपरा रही है, जो लोग धार्मिक कार्यो में बालिकाओं की देवी स्वरूप पूजा, उपासना करते है उनमें से कुछ ही बाद में क्षणिक अंधविश्वास व उन्माद में बैगाओं के बहकावे में आकर निर्दोष महिलाओं को टोनही के आरोप में प्रताड़ित करते है। यहां तक कि जान से मारने में भी नहीं हिचकते, जबकि किसी भी महिला में ऐसी शक्ति नहीं होती जो कथित जादू-टोने से किसी का अहित कर सके। वह तो अपना बचाव भी नहीं कर पाती। किसी भी धर्म ने निर्दोष व्यक्ति की हत्या का समर्थन नहीं किया है बल्कि अहिंसा को सबसे बड़ा धर्म माना गया है। गांव में जन प्रतिनिधियों व सरपंच की यह नैतिक जिम्मेदारी है कि अंधविश्वास व कुरीतियां गांव में न पनपने दें।

डाॅ. मिश्र ने कहा प्राकृतिक आपदायें हर गांव में आती है, मौसम परिवर्तन व संक्रामक बीमारियां भी गांव को चपेट में लेती है, वायरल बुखार, मलेरिया, दस्त जैसे संुक्रमण भी सामूहिक रूप से अपने पैर पसारते है। ऐसे में ग्रामीण अंचल में लोग बैगा,गुनिया के परामर्श के अनुसार विभिन्न टोटकों, झाड़-फूंक के उपाय अपनाते है। जबकि हर बीमारी का इलाज न झाड़-फूंक हो सकता है न ताबीज से, प्राकृतिक आपदायें न ही तंत्र-मंत्र, बलि से ठीक हो सकती है और न मानवीय समस्यायें सूर्य, मंगल, शनि, गुरू को प्रसन्न करके सुलझ सकती है। प्रत्येक बीमारी व समस्या का कारण व उसका समाधान अलग अलग होता है, जिसे विचारपूर्ण तरीके से ढूंढा जा सकता है।

उन्होंने कहा आज अधिकांश गांव में लोगों के कोई न कोई वैज्ञानिक उपकरण है बिजली का बल्ब फ्यूज होने पर उसे झाड़-फूंक कर पुनः प्रकाश नहीं प्राप्त किया जा सकता न ही मोटर सायकल, ट्रांजिस्टर बिगड़ने पर उसे ताबीज पहिनाकर नहीं सुधारा जा सकता। रेडियो, मोटर सायकल, टी.वी., ट्रेक्टर की तरह हमारा शरीर भी एक मशीन है जिसमें बीमारी आने पर उसके विशेषज्ञ के पास ही जांच व उपचार होना चहिए। अंधविश्वास के चलते अभी भी अनेक स्थानों पर यह माना जाता है कि हाथ खुजलाने से पैसा मिलता है, लक्ष्मी आती है वास्तव में खुजली त्वचा की बीमारी है जो एलर्जी होने से होती है। खुजली का पैसे से कोई संबंध नहीं है। यदि हाथ खुजलाने से ही धन-दौलत आती तो खुजली के सारे मरीज अमीर होते। लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है, खुजली जैसी विभिन्न बीमारियों के मरीजों को अंधविश्वास में पड़ने की बजाय इलाज कराना चाहिए।

डाॅ. मिश्र ने षिक्षकों से विभिन्न सामाजिक कुरीतियों एवं अंधविश्वासों की चर्चा करते हुए कहा – बच्चों को भूत-प्रेत, जादू-टोने के नाम से नहीं डरायें क्योंकि इससे उनके मन में काल्पनिक डर बैठ जाता है जो उनके मन में ताउम्र बसा होता है। बल्कि उन्हें आत्मविश्वास, निडरता के किस्से कहानियां सुनानी चाहिए। जिनके मन में आत्मविश्वास व निर्भयता होती है उन्हें न ही नजर लगती है और न कथित भूत-प्रेत बाधा लगती है। यदि व्यक्ति कड़ी मेहनत, पक्का इरादा का काम करें तो कोई भी ग्रह, शनि, मंगल, गुरू उसके रास्ता में बाधा नहीं बनता।

सभा के बाद प्रश्नोत्तर कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें डाॅ. मिश्र ने  प्रश्नों के जवाब दिये। सभा को डाॅ. शैलेष जाधव, डाॅ. हरीष बंछोर, श्री मनु, श्री दिनेष वर्मा, श्रीमति दुबे, श्रीमति मिश्रा आदि ने संबोधित किया।

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अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति

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