नहीं थम रहा किसानो की आत्महत्या का सिलसिला ;एक और किसान ने दी अपनी जान

नहीं थम रहा किसानो की आत्महत्या का सिलसिला ;एक और किसान ने दी अपनी जान

 

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27.07-2017

डोंडीलोहरा के गाँव कुवाकोदी के किसान 80 साल के  धना राम साहू ने कल कीटनाशक पी कर अपना जीवन ख़तम कर लिया .ऐसा बताया जाता है की साहू पर 7-8  लाख का क़र्ज़ किसी साहूकार और सहकारी सोसाईटी का बांकी  था .

यह भी कहा गया की उसने अपन एखेत में दो बार बोर करवाया लेकिन दोनों बार वह असफल हो गया इससे साहू बहार दुखी और परेशान था .

पुलिस और प्रशाशन ने फिर वही घिसी पिटी कहानी दोहराई है की धनाराम साहू नाश एक अदि था और घर में झगडा करने के बाद उसने कीटनाशक पी कर अपनी जान देदी .

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पत्रिका से

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किसान की आत्महत्या के मामले में प्रशासन के सारे दावे निकले झूठे

2017-07-27 11:33:15
किसान की आत्महत्या के मामले में प्रशासन के सारे दावे निकले झूठे <br>

सतीश यादव/पत्रिका ग्राउंड रिपोर्ट

बिलासपुर. मरवाही विधान क्षेत्र के ग्राम पंडरी में किसान की आत्महत्या के मामले में प्रशासन के सारे दावे झूठे निकले। हकीकत जानने के लिए पत्रिका की टीम मृतक किसान रामलाल कैवर्त के घर तक पहुंची। पत्रिका की पड़ताल में पता चला कि किसान कर्ज के बोझ से परेशान था। बैंक से वसूली नोटिस मिलने के बाद उसने अपनी जान दे दी। इधर प्रशासन की संजीदगी तो देखिए, कि आनन फानन में जांच भी पूरी कर ली और यह घोषित कर दिया कि किसान पर कोई कर्ज नहीं था। इतना ही नहीं प्रशासन के अधिकारियों ने किसान पर यह लांछन भी लगा दिया कि उसने शराब की लत और बीमारी की वजह से जान दे दी।

मृतक किसान के गांव पहुंचकर पत्रिकाÓ की टीम हकीकत से वाकिफ हुई। ग्रामीणों व परिजनों के बयान से न सिर्फ प्रशासन के सारे दावों की पोल खुली, बल्कि अफसरों की संवेदनहीनता और लीपापोती भी उजागर हुई।
मृतक रामलाल के बड़े भाई रीतलाल ने बताया रामलाल कर्ज से परेशान था। खेती-किसानी के लिए बैंक से लिए गए कर्ज का ब्याज दिनों दिन बढ़ता जा रहा था। बैंक से नोटिस देने के बाद तगादा भी किया जा रहा था। जबकि खेत दो साल पहले से गिरवी है। बारिश नहीं होने के कारण फसल नहीं हुआ। पटवारी के पास सूखा राहत के लिए आवेदन किया गया। लेकिन सूची में रामलाल का नाम नहीं था। मुआवजे की उम्मीद में रामलाल पटवारी और राजस्व विभाग के अफसरों के चक्कर काटता रहा, लेकिन उसे कुछ हासिल नहीं हुआ। रीतलाल ने बीमारी और शराब की लत की बात को सरासर झूठा करार दिया है।

पत्नी बोली, बैंक वाले धमकाते थे-
बेबी बाई ने बताया कर्ज को लेकर रामलाल काफी दिनों से परेशान है। बेबी ने बताया सवा दो एकड़ खेत है लेकिन सिंचाई की व्यवस्था नहीं होने के कारण पिछले चार पांच साल से धान नहीं मिल रहा है। हर महीने तीन सदस्य का 21 किलो चावल सरकारी राशन दुकान से मिलता है। इसके अलावा कोई आवक नहीं है। बैंक ने कर्ज पटाने के लिए नोटिस दिया। बैंक के कर्मचारी धमकाते थे कि कर्ज नहीं पटाएंगे तो घर व खेत को कुर्की कर दिया जाएगा। इधर रामलाल ने सूखा राहत के लिए आवेदन दिया, लेकिन उसे दो साल तक केवल आश्वासन मिलता रहा। बेबी ने बताया कि रामलाल ने दो साल पहले पथरी का इलाज सिम्स में कराया था, जिसके बाद वह पूरी तरह से स्वस्थ था। प्रतिदिन रोजी-मजदूरी पर जाता था।

कर्ज भुगतान कैसे करता, बड़ी मुश्किल से चल रहा था घर-
रामलाल के बहनोई चूड़ामणी कैवर्त ने बताया कि रामलाल पिछले कुछ दिनों से कर्ज को लेकर परेशान चल रहा था। बैंक से नोटिस मिला था। खेत गिरवी है, एक व्यक्ति से 10 हजार रुपए उधार लिया है। उसका ब्याज भी दिनों दिन बढ़ते जा रहा है। रामलाल कहता था कि बारिश नहीं होने के कारण खेत में फसल नहीं हो रहा है। घर चलाना मुश्किल हो गया है। एेसी स्थिति में बैंक का कर्ज और सूदखोर से लिए पैसे कहां से लौटाऊं। रामलाल ने बकरी पालन के लिए बैंक से लोन लेने ग्राम सुराज में आवेदन भी किया था। लेकिन योजना का अभी तक अता पता नहीं है।

सरपंच ने कहा, सूखा राहत के पैसे के लिए टरका रहे थे अफसर –
गा्रम पंडरी के सरपंच गिरेन्द्र सिंह ने बताया कि रामलाल सहित अनेक लोगों को सूखा राहत का मुआवजा नहीं मिल पाया। कई बार राजस्व अधिकारी और पटवारियों के चक्कर काटे, लेकिन आज तक सूखा राहत कोष से सरकारी मदद नहीं मिली। पिछले कुछ सालों से अवर्षा के कारण गांव के 80 प्रतिशत खेतों में धान नहीं हो रहा है। शासन की अधिकांश योजनाओं का लोगों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। खेती किसानी के लिए बैंक से कई लोगों ने कर्ज ले रखे हैं। इनमें 15 से 20 लोग पैसा नहीं पटा पा रहे हैं, जिन्हें नोटिस मिला है।

पुलिस जब्त कर ले गई बैंक नोटिस-
रामलाल की पत्नी बेबी बाई ने बताया कि पुलिस घर आई थी। पुलिस बैंक से जारी नोटिस को जब्त करके जांच के नाम पर ले गई है। उसकी फोटो कॉपी तक नहीं छोड़ी। वहीं ग्राम पंचायत सचिव जो सूदखोरी का काम करता है, उसका बयान भी नहीं लिया। जबकि प्रशासन के अफसरों को ग्रामीणों ने बताया था कि सचिव के पास रामलाल का खेत गिरवी है।

कलेक्टर पहुंचे, लेकिन घर तक नहीं गए-
कलेक्टर पी दयानंद मामले की जानकारी लेने के लिए मरवाही पहुंचे। लेकिन जनपद पंचायत के कार्यालय में सिर्फ अफसरों से जानकारी ली। ग्रामीण चूड़ामणि ने बताया कलेक्टर की आने की जानकारी उन्हें मिली थी, लेकिन वे रामलाल के घर तक नहीं आए। जबकि लोग यहां अपनी समस्याएं बताने के लिए एकजुट होकर इंतजार कर रहे थे।

पत्रिका  के पास है बैंक का नोटिस-
मामला रफा दफा करने के लिए प्रशासनिक अफसरों की शहर पर पुलिस ने जिस बैंक नोटिस को गायब कर दिया। उसकी एक कॉपी पत्रिका के पास उपलब्ध है। इसमें 7402 रुपए का तकादा है। भुगतान के लिए 15 दिन की मोहलत दी गई है।

क्यों झूठ बोल रहा प्रशासन-
सवाल ये कि प्रशासन आखिर झूठ क्यों बोल रहा है। किसान की आत्महत्या मामले को दबाने की कोशिश क्यों? इस मामले में जांच करने पहुंचे एडिशनल कलेक्टर केडी कुंजाम से पूछने पर उन्होंने कहा, कि इस मामले में मैं फोन में कुछ नहीं बता सकता।

ये अफसर पहुंचे थे लीपापोती करने-
ग्रामीणों ने बताया एडिशनल कलेक्टर केजी कुंजाम, अनुविभागीय अधिकारी पेंड्रा महेश शर्मा, तहसीलदार डीएस मिश्रा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मधुलिका सिंह व अन्य अधिकारी 25 जुलाई को गांव पहुंचे थे। वे दिनभर जांच पड़ताल करते रहे, फिर शाम 5 बजे यहां से निकली

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