छत्तीसगढ़ पुलिस का क्रूर चेहरा सामने आया ,बलात्कार पीड़ित की थाने में ही पिटाई लगाई.

 

** राजन कुमार

24.07.2017

कांकेर(छत्तीसगढ़)। छत्तीसगढ़ पुलिस को सबसे बदनाम पुलिस माना जाता है। छत्तीसगढ़ पुलिस पीडितों को ही प्रताडित करने लगती है। बहुत से मामलों में पीडित को ही मुख्य अभियुक्त बना देती है, या किसी भी आम आदमी को पकड़ कर प्रताडित करने लगती है। प्रमोशन के लालच में आदिवासियों को नक्सली बताकर बार-बार इनकाउंटर करने का भी मामला सामने आ चुका है। कोर्ट से बार-बार फटकार मिलने के बावजूद भी छत्तीसगढ़ पुलिस का रवैया सुधरता नहीं। यह निश्चित ही भारत जैसे लोकतांत्रिक देश के लिए खतरनाक है। एक तरह से देश के लोकतांत्रिक व्यवस्था पर धब्बा है।

सोनी सोरी, लिंगा कोड़ोपी, हिड़मे, मीना खलखो जैसे सैकड़ों मामलों में छत्तीसगढ़ पुलिस ने निर्दोष लोगों पर खूब अत्याचार किए, फर्जी इनकाउंटर किए, बाद में कोर्ट द्वारा सभी निर्दोष करार दिए गए।

छत्तीसगढ़ पुलिस का एक ऐसा ही क्रूर मामला सामने आया है, जिसमें बलात्कार पीडिता को एक पुलिस अधिकारी लाठियों से पीटने लगा। दुष्कर्म पीड़िता के साथ भानुप्रतापपुर एसडीओपी द्वारा दुर्व्यवहार और मारपीट करने का आरोप लगाते हुए सर्वआदिवासी समाज के पदाधिकारियों ने दोषी पुलिस अधिकारी के खिलाफ एट्रोसिटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने कार्रवाई नहीं होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी भी दी है।

सर्वआदिवासी समाज के पदाधिकारी 22 जुलाई 2017 को पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे। उन्होंने पुलिस अधीक्षक के नाम आवेदन सौंपा। उन्होंने बताया कि ग्राम परसकोट निवासी दुष्कर्म पीड़िता अपने परिजनों के साथ 11 जुलाई 2017 को अपनी शिकायत लेकर भानुप्रतापपुर पुलिस थाना पहुंची थी। जहां थाने में मौजूद महिला पुलिस अधिकारी ने दुष्कर्म पीड़िता की शिकायत पर घटना की रिपोर्ट दर्ज की थी और रिपोर्ट दर्ज करने के बाद उक्त महिला पुलिस अधिकारी ने पीड़िता को एसडीओपी कवि गुप्ता के पास भेजा था। जहां गुप्ता ने पीड़िता से कहा तुम लड़को को फंसाती हो और उसके साथ गाली गलौज करती हो। पुलिस अधिकारी गुप्ता एक महिला पुलिस कर्मी के साथ मिलकर दुष्कर्म पीड़िता को डंडे से पीटा। इस घटना से दुष्कर्म पीड़िता के साथ-साथ आदिवासी समाज को भी मानसिक पीड़ा पहुंची है। दुष्कर्म पीड़िता के साथ एसडीओपी कवि गुप्ता के द्वारा मारपीट कर गाली-गलौज करना अशोभनीय कार्य किया है, इससे पूरा समाज आक्रोशित है।

सर्वआदिवासी समाज ने एसडीओपी के विरूद्ध अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज किए जाने की मांग की। साथ ही कहा कि यदि उक्त अधिकारी के विरूद्घ एफआईआर दर्ज नहीं किया जाता है तो समाज उग्र आंदोलन और चक्काजाम करने के लिए मजबूर होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। इस दौरान समाज के संरक्षक नारायण सिंह गोरा, अध्यक्ष चंद्रकांत ध्रुवा, आशाराम नेताम, तरेन्द्र भण्डारी, विनोद रावटे, रमाशंकर दर्रो, ईश्वर कावड़े, प्रकाश दीवान, बंशीलाल मरकाम, कुंवरलाल कवाची, नरसू मण्डवी, संगीता कोमरा, गीता जुर्री, प्रमिला शोरी, प्रभुराम मातलाम, अभीराम मरकाम, श्याम लाल कावड़े मौजूद थे।

(इनपुट नई दुनिया)

 

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