ग्रामसभाए संकल्पित, किसी भी कीमत पर नहीं खुलने देंगी कोयला खदाने

पत्रकार वार्ता : रायपुर

** हसदेव अरण्य के समृद्ध वन संपदा और जैव विवधता को दरकिनार कर कार्पोरेट मुनाफे के लिए दिए गए मदनपुर साउथ कोल ब्लाक का आवंटन रद्द किया जाये  l
                                                                                                                                                                                                                                                 ** हसदेव अरण्य को बचाने ग्रामसभाए संकल्पित, किसी भी कीमत पर नहीं खुलने देंगी कोयला खदाने

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हसदेव अरण्य  बचाओ संघर्ष समिति
छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन
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 हसदेव अरण्य एक सघन और जैव विविधता से परिपूर्ण वन क्षेत्र हैं जोकि कई वन्य प्राणियों  और दुर्लभ जीवों का आवास और कोरिडोर हैं l पर्यावरणीय दृष्टि से अत्यंत दुर्लभ और महत्वपूर्ण होने के साथ-साथ, यह क्षेत्र हसदेव मिनीमाता बांध का भी जलागम (कैचमेंट) है जिससे जांजगीर और कोरबा जिले की 3 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिचाई होती हैं l इन्ही विशेषताओं के कारण इस सम्पूर्ण हसदेव क्षेत्र को वर्ष 2009 में खनन से मुक्त रखते हुए केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने नो गो क्षेत्र घोषित किया था l इसमें केन्द्रीय कोयला मंत्रालय की भी मंज़ूरी थी क्यूंकि यह “नो-गो” क्षेत्र की नीति कोयला मंत्रालय तथा वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के एक साझा अध्ययन पर ही आधारित थी l

हसदेव अरण्य के समृद्ध जंगल पर ही यहाँ के आदिवासी और अन्य परम्परागत  वन निवासी समुदाय की आजीविका, संस्कृति एवं पहचान जुड़ी हुई है जिसका  हम पीढ़ियों से संरक्षण एवं संवर्धन करते आये हैं और इसकी सुरक्षा के लिए हमारा समुदाय पूर्णतया संकल्पित है l
पेसा कानून 1996 तथा वनाधिकार मान्यता कानून 2006 से प्रदत्त अधिकारों से ही हसदेव अरण्य क्षेत्र की 18 ग्राम सभाओं ने दिसम्बर 2014 में प्रस्ताव पारित कर कोयला खदानों का विरोध किया था और सभी सम्बंधित मंत्रालयों से आग्रह किया था की हमारे क्षेत्र में कोयला खदानों का आवंटन ना किया जाए l विधिवत रूप से किये गए ग्राम सभाओं के इन प्रस्तावों की प्रतिलिपि और सम्बंधित ज्ञापन प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय कोयला मंत्रालय, केन्द्रीय आदिवासी कार्य मंत्रालय और केन्द्रीय वन मंत्रालय को भी सौंपा गया था l

परन्तु उपरोक्त सभी तथ्यों को दरकिनार कर ग्रामसभाओ के विरोध के वाबजूद भी  कोयला मंत्रालय ने पिछले दिनों एक नए कोल ब्लाक मदनपुर साउथ का  आवंटन आन्ध्र प्रदेश मिनरल डेवलपमेंट कारपोरेशन को “कमर्शियल माइनिंग” के लिए किया गया है l  हम यह नहीं समझ पा रहे हैं कि पिछले 6 वर्षों में हमारे जंगल और हसदेव अरण्य के इकोसिस्टम में ऐसा क्या परिवर्तन आ गया है की इस “नो-गो” क्षेत्र को ना सिर्फ खनन के लिए खुला कर दिया गया है? यहाँ महत्वपूर्ण हैं की पर्यावरणीय दृष्टि से दुर्लभ इस वन क्षेत्र का दोहन किसी अंत-उपयोग  के लिए नहीं बल्कि मात्र बाज़ारी मुनाफ़े के लिए किया जाना निश्चित कर दिया गया है l  आंध्र प्रदेश राज्य को राजस्व पूर्ति के लिए ऐसी क्या समस्या उत्पन्न  हो गयी की उसके लिए इस महत्वपूर्ण जंगल के साथ साथ आदिवासी गाँव को विस्थापित किया जायेगा l

ज्ञात हो की ग्रामसभाओ के प्रस्ताव के वाबजूद कोयला मंत्रालय के द्वारा हसदेव में कुल 4 नई कोयला खदानों परसा, पतुरियादांड, गिदमुदी और मदनपुर साउथ के आवंटन किये हैं जिनका ग्रामसभाओं के द्वारा लगातार विरोध किया जा रहा हैं l पाँचवी अनुसूची के संवैधानिक व कानूनी प्रावधानों और नियमगिरि मामले में उच्चतम न्यायलय के फैसले के बावजूद  कोयला आवंटन से पूर्व  ग्राम सभाओं द्वारा दिसम्बर 2014 में किये गए विरोध प्रस्तावों को संज्ञान में नहीं लिया जाना साफ दर्शाता हैं की केंद्र व राज्य सरकार के लिए कार्पोरेट मुनाफा  पर्यावरण संरक्षण और आदिवासी हित के ऊपर हैं l

मदनपुर साउथ कोल ब्लाक से प्रभावित होने वाले गाँव मदनपुर, धजाक, मोरगा और केतमा ने कोयला खदान के विरोध में और इसके आवंटन को रद्द करने की मांग को लेकर ग्रामसभाओ में विशेष प्रस्ताव पारित किये हैं जिसे संवंधित मंत्रालय को पुनः प्रेषित किया जा रहा हैं l इसके साथ ही हसदेव क्षेत्र के सभी कोयला खदानों के आवंटन को रद्द करने  और वन सम्पदा के संरक्षण की मांग को लेकर आगामी दिनों में व्यापक जन आन्दोलन शुरू किया जायेगा l 20, 21 नबम्बर को एक प्रतिनिधिमंडल दिल्ली जाकर संवंधित मंत्रालयों  से मुलाकात करेगा l
                                                                                                                                                                                                                                                                                                          राज्य सरकार की मिलीभगत से कोयला खदाने कर रही हैं मनमानी  – प्रदेश में आज लगभग 127 मिलियन टन कोयले का उत्पादन हो रहा हैं जिसमे निजी कोयला खदानों से उत्पादन शामिल हैं l इनमे से अधिकतर कोयला खदानों के लिए जिन किसानो ने अपनी जमीने  गवाई हैं वे आज भी मुवावजा, पुनर्वास और रोजगार जेसी सुविधाओ से वंचित हैं और आन्दोलन करने के लिए बाध्य हैं l चाहे कोरबा में दीपिका, गेवरा के विस्थापित परिवार हो, रायगढ़ में गारे पेलमा 4/2, 4/ 3 या सरगुजा में स्थित परसा ईस्ट केते बासन कोयला खदान l  पिछले 3 दिनों के गारे पेलमा 4/2, 4/ 3 के प्रभावित ग्रामीण रायगढ़ में अनिश्चित कालीन धरने पर बेठे जिनकी मांगों पर कार्यवाही की जगह अपराधिक मामले दर्ज किये जा रहे हैं l

इस प्रेस वार्ता के माध्यम से हम समस्त भू विस्थापितों, प्रभावितों के आन्दोलन को समर्थन करते हैं और राज्य सरकार से मांग करते हैं की स्वयं के द्वारा बनाई गई आदर्श पुनर्वास निति 2007 तथा 2013 के केंद्रीय भू अधिग्रहण कानून के प्रावधानों का पालन किया जाये और कोयला खदानों से प्रभावितों की मांगो को पूरा किया जाये l इसके साथ ही पर्यावरणीय नियमो का उल्लंघन करने वाली खनन कंपनियों के खिलाफ शख्त कार्यवाही की जाये l  

भवदीय
उमेश्वर सिंह आर्मो
हसदेव अरण्य  बचाओ संघर्ष समिति

आलोक शुक्ला
छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन

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