अगली पीढ़ी हमारी खामोशी का कारण पूछेगी–हर्ष मंदर

 

राहुल शर्मा , बीजीवीएस

भारत ज्ञान विज्ञान समिति द्वारा आयोजित विनोद रायना स्मृति व्याख्यान के अंतर्गत 16 जुलाई को गांधी भवन भोपाल में “धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र और समकालीन चुनोंतियां” विषय पर सामाजिक कार्यकर्ता और लेखक हर्ष मंदर (पूर्व IAS) ने वर्तमान राजनैतिक और सामाजिक परिवेश व इसमें उभरीं खतरनाक चुनोतियों पर पूरी साफगोई के साथ अपनी बात रखी। उन्होंने संविधान में वर्णित लोकतंत्र के चार आधार स्तंभों क्रमशः इंसाफ, आज़ादी, समानता और बंधुत्व पर विस्तार से बोलते हुये आज के संदर्भ में बंधुता की स्थिति को विशेष तौर पर रेखांकित किया। हर्ष जी का कहना था कि बंधुता ही है जो अन्य तीन आधार स्तंभों को आपस में जोड़े रखती है और आज इसी बंधुता को सर्वाधिक क्रूर ढंग से निशाना बनाया जा रहा है। भीड़ द्वारा हत्याएं पहले न होती रहीं हों ऐसा नहीं पर आज इसका सामान्यीकरण होना और इसको जायज़ ठहराने वाली ताकतें बहुत सक्रिय हुई हैं जो देश के लोकतांत्रिक ढांचे के लिए बहुत खतरनाक है। 


एक और संकल्पना जो नए दौर में गढ़ी जा रही है वह भी बहुत खतरनाक है और वह है शोषित और शोषक के स्थापित नज़रिये में घृणित किस्म के बदलाव का पनपना। यानि कि अब अमीरों, बहुसंख्यकों,तथाकथित उच्च जातियों जो सदियों से शोषक रही हैं में ये अहसास उपजाया जा रहा है कि दरअसल वे तो शोषक नहीं बल्कि शोषित हैं । मेहनत वे करते हैं गरीब और दलित सब्सिडी पा कर मज़े लूटते हैं; अल्पसंख्यक लोग बहुसंख्यकों का हक मारते हैं; आदि इत्यादि । इस तरह साजिशन उन ऐतिहासिक अवधारणाओं को बदला जा रहा है।
अपने सारगर्भित व्याख्यान के अंत में हर्ष जी ने हम सभी को चेताया कि हमको याद रखना होगा कि आने वाली पीढ़ियों को हम क्या जबाव देंगे कि जब देश के हालात इस कदर बदहाल हो चले थे तब हम क्या कर रहे थे? इतिहास और अगली पीढी निश्चित ही हमारी खामोशी का कारण पूछेगी। अतः हमको स्वयं से ही पूछना चाहिए कि क्या हम भयभीत हैं? क्या हमने दूसरों की परवाह करना छोड़ दिया है? क्या हम सबके दिलों में भी नफरत घर कर गयी है ?
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि राजेश जोशी ने की और प्रो. अनीता रामपाल इस अवसर की विशेष अतिथि रहीं। कार्यक्रम को भारत ज्ञान विज्ञान समिति की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आशा मिश्र ने भी संबोधित किया। प्रति वर्ष होने वाले विनोद रायना स्मृति व्याख्यान के अंतर्गत यह चौथा गरिमापूर्ण आयोजन था।

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