कारपोरेट लेगें सरकारी फैसले , शासन में उनकी निर्णायक भूमिका के लिए रास्ता साफ करने की तैयारी .

17.7.17

इंडियन एक्सप्रेस की खबर का यकीन करें तो केंद्र सरकार सिविल सेवाओं में लैटरल इंट्री की व्यवस्था करने जा रही है ,इसका मतलब होगा की भारत की सबसे प्रतिष्ठित सेवा आईएएस में कारपोरेट के लोग सीधे प्रवेश ले सकेंगे बिना किसी परिक्षा के .
यह बहुत खतरनाक कदम होगा जो पूरे सिस्टम को कारपोरेट के हवाले कर देगा .इससे सरकारी अहम् फैसलों में हस्तक्षेप करने और सरकारी फाईलो में उन्हें हस्ताक्षर करने का अवसर प्रदान कर देगा .अभी एसे लोग अपना काम करवाने के लिए सैकेट्री के पास आवशयक मंजूरी के लिए ऑफिस जाते है ,इसके बाद अम्बानी ,अदानी या दूसरे उध्योगपति खुद स्वीकृति प्राप्त कर लेंगे .
सरकार चाहती है कि निजी क्षेत्र के अधिकारियों को विभिन्न विभागों में उप सचिव, निदेशक और संयुक्त सचिव रैंक के पदों पर नियुक्त किया जाए. निजी क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को उनकी योग्यता और अनुभव के आधार सीधे आईएएस बना दिया जाएगा. इसमें सामाजिक कार्यकर्ताओं का भी जिक्र है ,इसका यह भी मतलब होगा कि सरकार बजरंग दल या आर एस एस के लोगों को भी आईएएस और आईपीएस बना सकेगी .
इंडियन एक्सप्रेस की ,खबर के मुताबिक प्रधानमंत्री कार्यालय ने कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग को इसके लिए प्रस्ताव तैयार करने को कहा है.,हालांकि पिछले साल ही अगस्त में कार्मिक राज्य मंत्री जीतेंद्र सिंह ने लोकसभा में कहा था कि सरकार ऐसी कोई समिति नहीं बना रही है .
निजी क्षेत्रों से एसै लोगों का चयन कैबिनेट सेक्रेटरी की अध्यक्षता में बनी समिति करेगी.
यह आत्मघाती कदम पूरी प्रशासनिक व्यवस्था को निजी और सरकार के प्रति निष्ठां रखने वाले लोगों को सोम्पने की कोशिश है.
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