महाराष्ट्र में सामाजिक बहिष्कार विरोधी कानून इसी माह से लागू , छत्तीसगढ़ मेंसामाजिक बहिष्कार के विरोध में सक्षम कानून बने : डॉ. दिनेश मिश्र

रायपुर 12 जुलाई 2017

अंध श्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष डॉ. दिनेश मिश्र ने कहा महाराष्ट्र में इसी माह 3जुलाई से सामाजिक बहिष्कार विरोधी कानून लागू होगया है इस प्रकार महाराष्ट्र देश का पहला प्रदेश बन गया है जहां जाति और समाज के नामपर मनमानी करनेवाले तथा बहिष्कार करने वाले लोग दण्डित हो सकेंगे । डॉ मिश्र ने इस कानून के लिए महाराष्ट्र सरकार को बधाई दी है और कहा है कि सामाजिक रीति-रिवाजों की आड़ लेकर सामाजिक बहिष्कार के मनमाने फरमान जारी करने की प्रथा अब बड़ी सामाजिक कुरीति के रूप में सामने आ गई है। उन्होंने जनजागरण अभियान के दौरान विभिन्न स्थानों का दौरा करने के दौरान पाया कि कभी-कभी ऐसे कारणों पर भी व्यक्ति समाज से बाहर कर दिया जाता है जो कि बड़े सामान्य थे ,यह कुरीति छत्तीसगढ़ में भी बड़े पैमाने पर व्याप्त है इस लिए छत्तीसगढ़ में भी सामाजिक बहिष्कार विरोधी कानून ,का बनना आवश्यक है ।

डॉ दिनेश मिश्र ने बताया कि पिछलेसप्ताह के उनके महाराष्ट्र प्रवसमें विभिन्न सामाजिक कार्यकर्ताओं से चर्चाहुयी ।महाराष्ट्र में महाराष्ट्र विधानसभा में सभी सदस्यों ने इस महत्वपूर्ण कानून को बिना किसी विरोध के , सर्वसम्मति से 11 अप्रेल को 2016 को पारित किया तथा 20 जून 2017 को माननीय राष्ट्रपति द्वारा मंजूरी मिलने के बाद 3 जुलाई 2017 से पूरे महाराष्ट्र में लागू कर दिया गया । डॉ मिश्र ने कहा समाज से बहिष्कृत व्यक्ति को समाज का कोई भी व्यक्ति मदद नहीं कर सकता क्योंकि मदद करने पर उसको भी समाज से बहिष्कृत होने का खतरा रहता है। बहिष्कृत व्यक्ति को शादी, मृत्यु, पर्व, त्यौहार, सामाजिक, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, सार्वजनिक उपयोग के स्थल जैसे बाजार, तालाब, नदी के उपयोग से वंचित कर दिया जाता है। समिति सामाजिक बहिष्कार की मनमानी सजाओं के विरोध में तथापीड़ितों को न्याय दिलाने के अभियान चला रही है। इस हेतु बैठकें, धरना, प्रदर्शन आयोजित किये जा रहे हैं तथा बहिष्कार के विरोध में सक्षम कानून बनाने के लिए प्रयास किया जा रहा है।

डॉ. दिनेश मिश्र ने कहा कि सामाजिक बहिष्कार के फरमान से बहिष्कृत व्यक्ति का जीवन कठिन हो जाता है। वह व्यक्ति व उसके परिवार का हुक्का पानी बंद कर दिया जाता है तथा किसी का समाज से बहिष्कार करने की सजा मृत्यु दण्ड से भी कठोर सजा है क्योंकि मृत्यु दण्ड में वह व्यक्ति एक बार में अपने जीवन से मुक्त हो जाता है परंतु समाज से बाहर निकाले व्यक्ति व उसके परिवार को घुट-घुट कर जीवन बिताना पड़ता है तथा यही नहीं उसके परिवार व बच्चों को भी प्रतिदिन सामाजिक उपेक्षा का सामना करना पड़ता है। सामाजिक बहिष्कार करने वाले दोषी व्यक्ति दण्डित हों।

डॉ. मिश्र ने कहा कि सामाजिक बहिष्कार के संबंध मेंप्रादेशिक स्तर पर कोई कानून नहीं बना है, इस कारण सामाजिक प्रताडऩा के ऐसे मामले लगातार सामने आ रहे हैं। यदि इस संबंध में जल्द सक्षम कानून बनाया जाता है तो हजारों निर्दोष व्यक्तियों को बहिष्कार की प्रताडऩा से बचाया जाना संभव होगा। तथा महाराष्ट्र केबाद छत्तीसगढ़ दूसरा प्रदेश होगा जहां सामाजिक न्याय के लिए सक्षम कानून होगा , राज्यपाल, मुख्यमंत्री, विधान सभा अध्यक्ष से मिल कर तथा सहित प्रदेश के सभी विधायकों, सांसदों को पत्र लिखकर इस संबंध में कानून बनाने की मांग की गई है.

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