छत्तीसगढ़ सरकार फिर पलटी सुप्रीम कोर्ट में , कहा ,नहीं करेंगे नंदनी सुन्दर और अन्य को गिरफ्तार .

छत्तीसगढ़ सरकार  फिर पलटी सुप्रीम कोर्ट में ,
कहा ,नहीं करेंगे नंदनी सुन्दर और अन्य को गिरफ्तार .

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बीबीसी और सीजी खबर की रिपोर्ट
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नंदिनी सुंदर गिरफ्तार नहीं होगी
सीजी खबर
Tuesday, November 15, 2016

नयी दिल्ली | समाचार डेस्क: छत्तीसगढ़ सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है अभी नंदिनी सुंदर तथा अन्य की गिरफ्तारी नहीं होगी. छत्तीसगढ़ सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में यह भी आश्वासन दिया है कि उनसे अभी पूछताछ भी नहीं की जायेगी. सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार के इस आश्वासन को रिकार्ड में ले लिया है.

सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार को मंगलवार को निर्देश दिया कि वह नक्सल प्रभावित राज्य में एक आदिवासी व्यक्ति की कथित हत्या से जुड़े मामले में सामाजिक कार्यकर्ता नंदिनी सुंदर और अन्य के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने से पहले उन्हें चार हफ्तों का अग्रिम नोटिस दे.

जस्टिस एमबी लोकुर और जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की पीठ ने नंदिनी सुंदर तथा अन्य को यह छूट दी कि अगर उन्हें गिरफ्तारी या पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया जाता है तो वे अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं.

पीठ ने कहा, अतिरिक्त सालिसीटर जनरल तुषार मेहता का कहना है कि नंदिनी सुंदर, अर्चना प्रसाद, विनीत तिवारी और अन्य को गिरफ्तार नहीं किया जायेगा और न ही उनसे पूछताछ की जायेगी. राज्य सरकार को निर्देश दिया जाता है कि मामले में कार्रवाई से पहले चार हफ्तों का अग्रिम नोटिस दिया जाये. नोटिस जारी किये जाने के बाद याचिकाकर्ता को अदालत का दरवाजा खटखटाने की अनुमति है.

हालांकि, पीठ ने नंदिनी सुंदर की इस याचिका पर गौर करने से इंकार कर दिया कि मामले में उन्हें और अन्य कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार करने या पूछताछ करने के पहले राज्य को अदालत से अनुमति लेनी चाहिये.

पीठ ने कहा, नहीं, उन्हें हमेशा के लिए नहीं रोका जा सकता. अगर कोई अपराध हुआ है तो उन्हें आगे कार्रवाई करने की आवश्यकता है. यह उनका वैधानिक अधिकार है. वे पहले आपको नोटिस देंगे और उसके बाद वे आगे की कार्रवाई कर सकते हैं.

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ के बस्तर के तोंगपाल थाने में नंदिनी सुन्दर, अर्चना प्रसाद, संजय पराते, विनीत तिवारी, मंजू कवासी और मंगल राम कर्मा के खिलाफ 302, 120B, 147, 148, 149 ,452 तथा 25, 27 आर्म्स एक्ट के तहत अपराध दर्ज किया गया है.

नंदिनी सुंदर की याचिका पर ही कथित रूप से माओवादियों के ख़िलाफ़ सरकार के संरक्षण में चलने वाले हथियारबंद आंदोलन सलवा जुड़ूम को सुप्रीम कोर्ट ने बंद करने का निर्देश दिया था.

हाल ही में सीबीआई ने नंदिनी सुंदर की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में अपनी एक रिपोर्ट पेश की थी, जिससे मुताबिक साल 2011 में ताड़मेटला गांव में विशेष पुलिस अधिकारियों ने 252 आदिवासियों के घर जला दिये थे.

इस मामलें में बस्तर के आईजीपी एसआरपी कल्लूरी ने कहा था चूंकि टंगिया ग्रुप के सदस्य सामनाथ ने उक्त लोगों के खिलाफ थाने में अपराध दर्ज कराया था, जिसके चलते नक्सलियों ने उन्हें मौत के घाट उतार दिया है. हत्या की शिकायत मृतक की पत्नी ने तोंगपाल थाने में की थी, अब पुलिस मामले की जांच कर उन्हें गिरफ्तार करने की कार्यवाही करेगी. पूर्व में उक्त लोगों ने गांव में आकर ग्रामीणों को नक्सलियों का समर्थन करने दबाव डाला था, जिसके बाद हत्या हुई है. प्रथम दृष्टया हत्या एक षड़यंत्र के तहत हुई है, जिसके चलते वे भी मामले में आरोपी हैं.

हालांकि, बाद में मृतका की पत्नी ने नेशनल मीडिया से कहा था कि उसने नंदिनी सुंदर या किसी के नाम से कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई है.
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नहीं होगी डीयू, जेएनयू प्रॉफ़ेसरों की गिरफ़्तारी

आलोक प्रकाश पुतुल रायपुर से
बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

15 नवंबर 2016
छत्तीसगढ़ सरकार ने कहा है कि बस्तर में एक ग्रामीण की हत्या के मामले में दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफ़ेसर नंदिनी सुंदर और जेएनयू की प्रोफ़ेसर अर्चना प्रसाद समेत चार लोगों की न तो अभी गिरफ़्तारी होगी और ना ही उनसे पूछताछ की जाएगी.

सुप्रीम कोर्ट में नंदिनी सुंदर की याचिका पर सुनवाई के दौरान मंगलवार को छत्तीसगढ़ सरकार ने एक रिपोर्ट पेश की.

छत्तीसगढ़ सरकार ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि इस मामले में नंदिनी सुंदर समेत सभी लोगों को पूछताछ से पहले कम से कम चार हफ्ते पहले नोटिस जारी किया जाएगा.

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता नंदिनी सुंदर समेत अन्य लोगों को कहा कि अगर वे सरकार के किसी क़दम से असंतुष्ट हों तो वे सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटा सकते हैं.

इससे पहले शुक्रवार को सुनवाई के दौरान छत्तीसगढ़ सरकार ने 15 नवंबर तक इस मामले के आरोपियों की गिरफ़्तारी नहीं करने की बात कही थी.

गौरतलब है कि बस्तर के दरभा क्षेत्र के ग्राम नामा में 4 नवंबर को सामनाथ बघेल की हत्या कर दी गई थी.

पुलिस ने सामनाथ बघेल की पत्नी की कथित शिकायत पर तोंगपाल थाने में प्रोफ़ेसर नंदिनी सुंदर, प्रोफ़ेसर अर्चना प्रसाद, सीपीएम नेता संजय पराते, विनीत तिवारी, मंजू कवासी और मंगल राम कर्मा के ख़िलाफ़ 302, 120B, 147, 148, 149 ,452 तथा 25, 27 आर्म्स एक्ट के तहत अपराध दर्ज किया है.

हालांकि पुलिस के दावे के उलट मृतक सामनाथ बघेल की पत्नी ने पत्रकारों को बताया कि उन्होंने किसी के नाम से कोई रिपोर्ट दर्ज़ नहीं कराई है और ना ही पति की हत्या करने वाले किसी भी व्यक्ति को वो पहचानती हैं.

पिछले दो दशक से बस्तर में अकादमिक शोध करने वाली नंदिनी सुंदर ने बस्तर के नृविज्ञान, इतिहास, संस्कृति और सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों को लेकर कई किताबें लिखीं हैं.

नंदिनी सुंदर की याचिका पर ही कथित रूप से माओवादियों के ख़िलाफ़ सरकार के संरक्षण में चलने वाले हथियारबंद आंदोलन सलवा जुड़ूम को सुप्रीम कोर्ट ने बंद करने का निर्देश दिया था.

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की कड़ी आलोचना की थी कि उसने आदिवासियों को निजी सेना की तरह हथियार थमा दिए थे और उन्हें ग़ैरक़ानूनी तरीक़े से कथित रूप से माओवादियों के ख़िलाफ़ युद्ध के मैदान में धकेल दिया था.

नंदिनी सुंदर की याचिका पर ही पिछले महीने सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट पेश की थी, जिसके मुताबिक़ साल 2011 में ताड़मेटला गांव में विशेष पुलिस अधिकारियों ने 252 आदिवासियों के घर जला दिए थे. इसके अलावा इन गांवों में कुछ लोगों की हत्या और बलात्कार की घटनाएं सामने आई थीं.

आदिवासी सामनाथ बघेल की हत्या के मामले में अभियुक्त जेएनयू की प्रोफ़ेसर अर्चना प्रसाद आदिवासी मामलों की जानकार मानी जाती हैं.

जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय में सेंटर फॉर इंफॉर्मल सेक्टर एंड लेबर स्टडीज़ की प्रोफ़ेसर अर्चना प्रसाद की आदिवासियों की आजीविका के समकालीन इतिहास, महिला और श्रमिक, पर्यावरण और श्रमिक इतिहास जैसे विषयों में विशेषज्ञता रही है

वे भारत सरकार के आदिवासी मंत्रालय में शोध सलाहकार समिति की सदस्य रही हैं. इसके अलावा वे वन एवं पर्यावरण मंत्रालय में नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी की सदस्य भी रही हैं. अर्चना प्रसाद महिला आयोग और मानव संसाधन मंत्रालय में विषय विशेषज्ञ सदस्य भी रही हैं.

(बीबीसी हिन्दी )

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