बागबाहरा क्षेत्र में दो दिन बाद एक और किसान ने कर्ज से तंग आकर की आत्महत्या

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बागबाहरा क्षेत्र में दो दिन बाद एक और किसान ने कर्ज से तंग आकर की आत्महत्या.

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! आखिर कर्ज माफी के लिये किसने रोक रखा है मुख्यमंत्री को : छत्तीसगढ़ किसान मजदूर महासंघ

एक और किसान ने की आत्महत्या, मुख्यमंत्री जी अपनी संवेदनशीलता अब तो दिखलायें !

छत्तीसगढ़ के किसानों की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है । एक के बाद एक गत एक सप्ताह के भीतर 4 किसानों  ने कर्ज और बढ़ते आर्थिक संकट  से तंग आकर आत्महत्या कर ली । महासमुंद जिले के बागबाहरा थाना के तहत 10 किमी दूर स्थित ग्राम जामगांव के 45 वर्षीय किसान हीराधर निषाद ने आज कीटनाशक पीकर खेत में बनाई झोंपडी में जान दे दी ।
किसान आत्महत्या की सुचना मिलते ही छत्तीसगढ़ किसान मजदूर महासंघ के संयोजक मण्डल का दल रूपन चन्द्राकर, पारसनाथ साहू, श्रवण चन्द्राकर और लक्ष्मीनारायण चन्द्राकर के नेतृत्व में जामगांव, बागबाहरा रवाना हो गया ।

महासंघ को आशंका थी कि कहीं किसान आत्महत्या के मामले में शासन-प्रशासन लीपापोती ना करने लगे । बागबाहरा के ही ग्राम मोखा में महासंघ के तत्काल पहुंच जाने से तहसीलदार की लीपापोती रुकवायी गयी और कर्ज, आर्थिक संकट की वजह से आत्महत्या करने का स्व. मन्थीर सिंह ध्रुव के बेटे मोहन का वास्तविक बयान द्वारा दर्ज करवाया जा सका ।

महासंघ के सदस्य स्व. हीराधर निषाद की पत्नी और परिवार के सदस्यों से मिले और अपनी गहन संवेदना व्यक्त की । हीराधर के परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार  उसके पास लगभग 4 एकड़ जमीन थी, जिसमे से 2.5 एकड़ में वह धान की खेती करता था । शेष भूमि परती है । उसने खेत में कर्ज लेकर सिंचाई हेतु बोर करवा रखा था लेकिन बिजली कनेक्शन अस्थायी था । स्थायी कनेक्शन नहीं होने की वजह से प्रति माह रु 3000 का भारी भरकम बिल उसे पटाना पड़ रहा था । गरीबी रेखा के नीचे रहने के बावजूद उसके घर का बिजली बिल भी रु 1000 आ रहा था । उसने खेती के लिये रु 21000 का कर्ज ले रखा था । लेकिन फसल गत वर्ष बर्बाद हो जाने की वजह से उसे भारी घाटा हुआ । दूसरी ओर उसे फसल बीमा का कोई मुआवजा भी नही मिला । कर्ज ना पटा सकने के कारण बैंक की ओर से उसे नोटिस मिला हुआ था । बैंक के अधिकारी उसके घर कर्ज वसूली के लिये लगातार आ रहे थे । कर्ज पटा ना सकने की अपनी विवशता देख आज सुबह 10 बजे कीटनाशक का सेवन कर आत्महत्या कर ली ।

किसान महासंघ ने आत्महत्या करने वाले खैरागढ़ कवर्धा और मोखा के किसानों के मामले भी शासन के बिजली कम्पनी की लापरवाही, फसल बीमा योजना की असफलता और इनके परिणामस्वरूप कर्ज नहीं पटा सकने की विवशता को दोषी पाया था ।
अतः छत्तीसगढ़ किसान महासंघ के संयोजक मण्डल सदस्य रूपन चन्द्राकर, पारस नाथ साहू, डॉ संकेत ठाकुर, द्वारिका साहू, श्रवण चन्द्राकर, लक्ष्मी नारायण, उत्तम जायसवाल आदि ने मांग की है कि राज्य सरकार किसानों को बोनस का वायदा पूरा करते हुए किसानों का कर्जा माफ़ करें नहीं तो किसान आत्महत्या का दुखद सिलसिला थमने वाला नहीं है ।

किसान महासंघ ने डॉ रमन सिंह से प्रश्न किया है कि जब उत्तरप्रदेश, पंजाब, कर्नाटक, महाराष्ट्र की सरकारों ने किसानों का कर्जा माफ़ कर दिया तो फिर उन्हें कर्जमाफ़ी की घोषणा से किसने रोक रखा है ?
किसान महासंघ किसानों की मांगे पूरी नहीं होने पर भाजपा के जनप्रतिनिधियों के घेराव की तैयारी कर रहा है और इसके लिये गांव गांव में बोनस बइठका का दौर जारी है ।

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डॉ संकेत ठाकुर, रूपन चन्द्राकर, पारसनाथ साहू, द्वारिका साहू

संयोजक मण्डल सदस्य
छत्तीसगढ़ किसान मजदूर महासंघ

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