सामूहिक एफआईआर के बाद रायगढ़ पुलिस कार्पोरेट दबाब में जानबूझकर गलत दिशा में जांच  कर रही है ,

सामूहिक आईआर के बाद रायगढ़ पुलिस कार्पोरेट दबाब में जानबूझकर गलत दिशा में जांच  कर रही है ,

  • आदिवासियों के विरोध के बाबजूद पुलिस उनकी एक भी नहीं सुनरही है ,   अपनी मर्जी से बयान  लिखा जा रहा हैं.
  • अगर सही जाँच नहीं हुई तो सभी पीड़ित जनजाति आयोग और हाइकोर्ट जायेंगे .

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24.06.2017

रायगढ़ में फर्जी भूमि बिक्री के खिलाफ सामूहिक एफआईआर दर्ज करने की अभियान   के बाद सभी पीड़ित  आदिवासियों  का बयान लिया जा रहा है, घटना स्थल लोगों के  गांव में पुलिस तीन टीम बनाकर, (प्रत्येक टीम में एक टी आई रैंक सहित पांच पुलिस,)  पहुंची है और बयांन  रिकॉर्ड कर रही है, लगातार दुसरे दिन गाँव गाँव जाकर ग्रामीणों के बयान दर्ज किये जा रहे हैं .

लेकिन रायगढ़ पुलिस कार्पोरेट के दबाब में किसानो के बयान को जानबूझकर दलालों के साथ मिलकर इस तरह लिया जा रहा है ताकि उसका उपयोग जमीं के दलाल के लाभ के लिया किया जा सके .

पुलिस ने पूरी कार्यवाही इस पूर्वाग्रह के साथ किया कि यह सब मामला जमींन से सम्बंधित है इसलिए 170 ख का बनता  है। पुलिस ने अपनी जाँच मे लोगों द्वारा प्रस्तुत  विक्रय विलेख को लोगों के फर्जी बताने के बाद भी सही माना और पीड़ितों के स्पष्ट और बार बार बोलने पर भी उनके रजिस्ट्री ऑफिस नहीं जाने और घरघोड़ा और बैहमुड़ा में दलाल के घर ले जाकर दस्तखत कराने तथा जमीन के कागजात को जबर्दस्ती रख लेने की बात को बयान में नहीं लिखा । इस बात को सरपंच और  लोगों ने  विरोध भी किया लेकिन पुलिस ने हमारी एक भी नहीं सुनी और  अपनी मर्जी से बयान  लिखा ।

 

गांवों में भारी संख्या में पुलिस बल देखकर लोग दबाव महसूस कर रहे थे और डर के कारण अपनी पूरी बात स्वतंत्र रूप से बयान में नहीं लिखवा सके । पूरे समय पुलिसिया जांच स्थल के सामने  कंपनी समर्थक और दलाल मौजूद रहे । ग्रामीणों के बीच यह भी चर्चा है कि पुलिस टीम के साथ जो टाइपिस्ट के रूप में था, वह टी आर एन कंपनी का एक कर्मचारी है ।पिछले  तीन दिनों से डी एस पी, एस डी ओ पी,  टी आई स्तर के अनेकों अधिकारियों और भारी संख्या में जवान  सहित  पुलिस ने  घरघोड़ा क्षेत्र में कैम्प लगाया है। खबर है कि आज पुलिस ने भू माफिया, दलालों और कथित गवाहों को घरघोड़ा थाना में बुलाया है ।

 

अभी तुरंत गांव से खबर आ रहा है कि विक्रय विलेख में जिनको गवाह बनाया गया है, उनमे से कई लोग दलाल महेश पटेल को पूछ रहे हैं ,कि उनके जानकारी के बिना उनका नाम गवाह में क्यों लिखवाया, तो महेश पटेल कथित गवाहों से विवाद कर रहा है, बस अगर कथित कुछ निर्दोष गवाहों के उनके इतनी सी बात को भी  अगर पुलिस बयानों में लिख ले तो ठीक होगा ।

 

सरपंच पवित्री मांझी ने जब अपने बयान में बताया कि उसके घर में घुसकर कंपनी के लोगों ने धमकी दिया है और उसकी विधिवत रिपोर्ट थाना घरघोड़ा में की है, और उसकी पावती प्रति दी गई तो पुलिस ने वह भी बयांन में नहीं लिखा और दस्तावेज भी लेने से इंकार कर दिया । कल  पवित्री मांझी भेंगारी से वीरेंद्र शर्मा डी एस पी, अजा ज जा थाना रायगढ़ को फोन से संपर्क करने पर घरघोड़ा बुलाया , मिलकर उपरोक्त सब बात मौखिक रूप से बताने पर वे मौन रहे, और जब हमने अब तक कंपनी द्वारा बलात निर्माण कर चुके प्रभावितों के जमीनों का विस्तृत विवरण लिखित में दिया तो उन्होंने लेने से मना  कर दिया ।

अभी 14 जून को एमनेस्टी इंटरनेशनल और आदिवासी दलित मजदुर किसान संघर्ष समिति ,छत्तीसगढ़ बचाओ आन्दोलन , पीयूसीएलकी पहल पर रायगढ़ के अनुसूचित जन जाती थाने में 8 गाँव के लोग भारी संख्या में पहुचे थे और 80 आदिवासियों ने फर्जी भूमि हस्तान्तण के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की थी .

उस समय एसडीएम और डीएसपी ने ग्रामवासियों के सामने आकर आश्वासन दिया था की 15 दिन या अधिकतम तीन सप्ताह में जाँच पूरी करके एफ आई आर की कार्यवाही की जाएगी .यह रायगढ़ के ग्रामो में बड़े उद्योगपति आदिवासियों को जमीन फर्जी आदिवासी बना कर या बेनामी लोगो के साथ मिलकर जमीं ख्ज्रिड लेते है ,जबन की सामान्य नियम है की आदिवासी की जमीन किसी गैर आदिवासी को बेचीं नहीं जा सकती .यह खेल रायगढ़ में कई सालो से चल रहा हैं ,लेकिन उसके खिलाफ पहली बार पुरे कागजात के साथ रिपोर्ट करने की कार्यवाही हुई हैं .

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