1000 एकड़ जमीन अधिग्रहित कर ली, लेकिन नहीं लगाए उद्योग; रायगढ़

[समाचार दूत से साभार ]

रायगढ़ । जिले में वर्ष 2007-08 से लेकर 08-09 के बीच व्यापक पैमाने में उद्योग स्थापना के लिए जमीनों की खरीदी बिक्री हुई थी, जिसमें कई औद्योगिक घरानों द्वारा उद्योगों की स्थापना कर ली, लेकिन 10 औद्योगिक घरानों ने उद्योग स्थापना की नींव तक नहीं रखी है।

नियम के मुताबिक अधिग्रहित की गई भूमि पर यदि 5 वर्ष के अंदर उद्योग स्थापना नहीं की जाती तो अधिग्रहित भूमि स्वमेव किसानों को वापस होने का प्रावधान है। बावजूद 10 उद्योगों द्वारा किसानों की एक हजार एकड़ से अधिक की कृषि भूमि पर कब्जा जमाए हैं। जिस पर न तो उद्योग की स्थापना की गई और न ही किसानों को उद्योग स्थापना के नाम पर मिलने वाला लाभ प्राप्त हो सका है।

बीते दस सालों में करीब दस औद्योगिक घरानों द्वारा अधिग्रहित कृषि भूमि पर कल कारखाना स्थापना की नींव तक नहीं रखी गई है। बीते कई सालों से प्रभावित किसानों द्वारा लगातार अधिग्रहित की गई भूमि वापसी की मांग कर रहे हैं। लेकिन मामले में प्रशासन की ओर से कोई पहल नहीं की जा रही है।

दरअसल 90 के दशक में जिले में औद्योगिक घरानों की बाढ़ सी आ गई थी। जिले में व्याप्त प्राकृतिक संसाधनों की बहुलता ने औद्योगिक घरानों को अपनी ओर आकर्षित किया था, लेकिन समय के साथ कुछ औद्योगिक घरानों द्वारा उद्योग की स्थापना की गई तो कईयों ने नींव तक नहीं रखी।

ऐसे में किसान अपने को छला हुआ महसूस कर रहा है। उद्योग स्थापना को लेकर किसानों को तरह-तरह सपने दिखाए गए थे, जिसमें रोजगार, पुनर्वास व विकास के नाम पर किसानों की जमीन खरीदी थी।

लेकिन न तो किसान को रोजगार मिला न ही पुनर्वास प्राप्त हुआ और न ही क्षेत्र का विकास हो सका है। बल्कि किसानों के साथ उनकी उपजाऊ कृषि भूमि चली गई और मौजूदा समय में उन्हें जमीन के बदले मिला मुआवजा भी नहीं रहा। इससे किसान अपने को कोसने को मजबूर हैं।

निर्धारित समय में नहीं लगे उद्योग

औद्योगिक घरानों द्वारा जिले के सैक़ड़ों गांव के किसानों की जमीन विकास और रोजगार के नाम पर जमीन ली, पर निर्धारित समय पर कल कारखाना की स्थापना की प्रक्रिया पूरी नहीं की। पूर्व में नियम था कि भूमि अधिग्रहण के 7 साल के अंदर संयंत्र की स्थापना होनी थी, यदि निर्धारित समय सीमा में ऐसा नहीं होता है तो अधिग्रहित भूमि मूल स्वामी को वापस हो जानी थी।

हालांकि मौजूदा नियम के मुताबिक अब जमीन अधिग्रहण के पांच वर्ष में कारखाना की स्थापना करनी चाहिए। लेकिन जिले के करीब 10 ऐसे औद्योगिक घराने हैं जो निर्धारित समय पर न तो कारखाना की स्थापना किए और न ही उद्योग स्थापना की कोई प्रक्रिया की है। कई उद्योगों का तो जमीन अधिग्रहण के पश्चात कोई अता पता भी नहीं है।

कभी भी खड़ा हो सकता है बड़ा आंदोलन

समय-समय पर प्रभावित किसान जमीन वापसी की मांग करते रहे हैं। लेकिन प्रशासन इस दिशा में अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठा सका है। दरअसल ऐसे उद्योगों द्वारा जमीन अधिग्रहण के पश्चात न तो उद्योग स्थापित किया और न ही निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के पहले तक स्थापना की कोई कार्रवाई शुरू की है।

ऐसे में प्रभावित किसानों के समक्ष रोजी मजदूरी करने के सिवाय दूसरा कोई चारा नहीं रह गया है। गाहे बगाहे यह आग सुलगती रही है। लेकिन यदि मामले में प्रशासन द्वारा जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाता है तो कभी भी इसे लेकर बड़ा आंदोलन खड़ा हो तो अतिश्योक्ति नहीं होगी।

वापस होनी चाहिए अधिग्रहित जमीन

मामले में सामाजिक कार्यकर्ताओं की मानें तो भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 के मुताबिक तय समय में कारखानों की स्थापना नहीं हो सकी है। इसलिए नियम के अनुसार इन जमीनों को मूल किसानों को वापस किए जाने की कार्रवाई शुरू की जानी चाहिए। भूमि अधिग्रहण किए 5 साल से अधिक हो चुकी है। ऐसे में नियमानुसार भूमि वापसी की प्रक्रिया शुरू करने का अधिकार कलेक्टर को है और मामले में कलेक्टर को संज्ञान लेना चाहिए।

कंपनी का नाम वर्ष जमीन

जेएलडी यवतमाल 2008 —-

जायसवाल निको 2008 —–

जेएसडब्ल्यू 2008 285 हेक्टेयर

वीसा स्टील 2008 196.875 हेक्टेयर

एई स्टील 2005 299 हेक्टेयर

टापवर्थ 2007 14.278 हेक्टेयर

गोदावरी 2008

महावीर कोल बेनिफिकेशन 2007 24 हेक्टेयर

सालासार विस्तार के लिए 2008

बीएस स्पंज आयरन 2007 116.851 हेक्टेयर

उचित कदम उठाएंगे

मामले की जानकारी ली जा रही है, इस संबंध में जो भी उचित होगा वह कदम उठाया जाएगा। – शम्मी आबिदी, कलेक्टर

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