महानतम वैज्ञानिक आइन्स्टाइन ने कहा था कि समाजवाद के सिवाय दुनिया को बचाने का कोई रास्ता नहीं है,

 

 

हिमांशु कुमार

जो लोग अर्थव्यवस्था और समाजशास्त्र के बारे में जानते हैं वे बताते हैं कि पूंजीवाद अपने अपने ही बोझ से मर जाएगा,

इसके लक्षण आप भारत में देख सकते हैं,

पूंजीवाद को लगा कि अब कांग्रेस से ज़्यादा भाजपा उसके लिए तेज़ घोड़ी बन सकती है,

इसलिए देश के बड़े पूंजीपतियों ने भाजपा पर पैसा लगाया और मोदी जैसे दो कौड़ी के इंसान की मीडिया की मार्फ़त राष्ट्र नायक की छवि बनाई गयी और चुनाव जीत कर भारत की सत्ता पर कब्ज़ा कर लिया,

पूंजीवाद का सबसे पहला लक्षण होता है कि इसमें हर खिलाड़ी खुद को बड़ा बनाता जाता है,

हर छोटा पूंजीपति खुद को बड़ा बनाने की कोशिश करता है,

जो पूंजीपति खुद को बड़ा नहीं बना पाता उसे उससे बड़ा पूंजीपति समाप्त कर देता है,

पूंजीवाद के लिए पुरानी कहावत है कि बड़ी मछली छोटी मछली को खा जाती है,

तो पूंजीपति जब खुद को बड़ा करना चाहता है तो उसका एक रास्ता होता है लाभ को बढाने का,

लाभ बढाने के लिए पूंजीपति अपने मजदूर घटाता है और मशीनें बढ़ाता है,

क्योंकि मशीनें कम खर्चे में साफ़ और ज़्यादा माल बना सकती हैं,

लेकिन इससे बेरोजगारी फैलती है,

जब लोग बेरोजगार हो जाते हैं तो वह माल नहीं खरीद पाते,

इससे बाज़ार में मन्दी छा जाती है और पूंजीपति का माल बिकना बंद हो जाता है,

इस समस्या से निपटने के लिए पूंजीपति नए नए इलाकों में अपना व्यापार फैलाते हैं ताकि नए ग्राहक उसका माल खरीदें,

पूंजीपति इसके लिए सरकारों को रिश्वत देते हैं और नए नए इलाकों में अपना माल बेचते हैं,

इसके अलावा पूंजीपति नए नए व्यापार शुरू करते हैं और नए इलाकों में खदानें, समुन्दर, पहाड़ों पर कब्ज़े करते हैं,

इस काम के लिए भी उन्हें सरकारों की मदद की ज़रूरत पड़ती है,

अफ्रीकी देशों में पूंजीपति अलग अलग कबीलों के बीच लडाइयां करवाते हैं और हीरा और सोने की खुदाई करके पैसा बनाते हैं,

लैटिन अमेरिकी देशों में अपनी बात ना मानने वाले राष्ट्राध्यक्षों की हत्याएं करवाई गईं,

अफगानिस्तान और ईराक पर हमले किये गए हथियार बेच कर मुनाफा कमाया गया,

अब भारत में सत्ता अपने हाथ में रखने के लिए भारत में हिन्दू और मुसलमानों के बीच नफरत फैलाने का खेल खेला जा रहा है,

दो साल बाद होने वाले चुनाव में जीतने के लिए अभी से नफरत की आग को और भी भडकाने का खेल शुरू कर दिया गया है,

गाय के नाम पर मुसलमानों की हत्या करवाई जा रही हैं ताकि मुसलमानों को गोह्त्यारा साबित करके हिन्दुओं के वोट के सहारे सत्ता फिर से मिल जाए,

भारत और पकिस्तान के बीच नफरत और तनाव बढ़ाया जा रहा है ताकि हथियार बेचे जा सकें,

अगर आप पूंजीवाद को स्वीकार करते हैं तो आपको युद्ध झगड़े और लूट को भी स्वीकार करना पड़ेगा,

लेकिन इसका विनाश भी इसके खुद के कामों से ही होता है,

जैसे भारत में भाजपा जब नफरत को बहुत भड़का देगी तो भारत टूट जाएगा,

देश टूटने के बाद पूंजीवादी ताकतें नए शासकों को खरीदने में लग जायेंगी,

लेकिन संसाधनों की एक सीमा है, दुनिया के देशों की भी एक सीमा है,

फिर पूंजीवाद किस पर कब्ज़ा करेगा ? अपना माल बेचने के लिए नए बाज़ार कहाँ से लाएगा ?

लाभ बढाने के लिए मशीनें लगाते जाने से जब बेरोजगारी बहुत बढ़ जायेगी तो कोई माल खरीदने वाला ही नहीं बचेगा,

तब लोगों के बीच अपराध लड़ाई झगड़े और अराजकता फैलेगी,

इस तरह पूंजीवाद खुद को और पूरे समाज को नष्ट कर देगा,

अभी हाल में ही इस दौर के सबसे बड़े वैज्ञानिक स्टीफन हकिंग्स ने कहा है कि पूंजीवाद दुनिया को नष्ट कर देगा,

इससे पहले दुनिया महानतम वैज्ञानिक आइन्स्टाइन ने कहा था कि समाजवाद के सिवाय दुनिया को बचाने का कोई रास्ता नहीं है,

पूंजीवाद आपको मूर्ख क्रूर और स्वार्थी बना देता है,

आपको ऐशो आराम और दौलत का लालच देकर आपके आस पास के करोड़ों लोगों के दुखों और तकलीफों की तरफ आपको आँखें मूँद लेने वाला बना दिया जाता है,

आप असल में ऐसे क्रूर हैं नहीं बल्कि पूंजीवाद आपको ऐसा बना देता है,

इसलिए भले ही आपका कुरआन या उपनिषद या बाइबिल या ग्रन्थ साहब कितना भी उपदेश दे दें,

आप अपने आस पास के समाज से खुद को जोड़ ही नहीं पाते हैं,

इस समाज में क्रूरता स्वार्थ लूट और झगड़े की जड़ को जब तक आप समझेंगे नहीं,

तब तक आप समाज में प्रेम और शांति ला ही नहीं सकते,

– हिमांशु कुमार

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