आत्महत्या करने वाला किसान कुलेश्वर देवांगन मानसिक रोगी नहीं था*

 

*आत्महत्या करने वाला किसान कुलेश्वर देवांगन मानसिक रोगी नहीं था*

*छत्तीसगढ प्रगतिशील किसान संगठन के जांच दल का खुलासा, आर्थिक तंगी के साथ कर्ज के कारण किसान ने किया आत्महत्या*

मड़ियापार और पुरदा दो गांव के किसान कुलेश्वर देवांगन ने गत 12 जून को कुंए में कूदकर आत्महत्या कर लिया था, हड़बड़ाये स्थानीय प्रशासन ने जांच की खानापूर्ती करते हुए कर्ज के कारण आत्महत्या किये जाने को खारिज कर दिया और मृतक किसान को मानसिक रोगी घोषित कर दिया,
किसान कुलेश्वर देवांगन के आत्महत्या करने की सही परिस्थितियों का पता लगाने के लिए छत्तीसगढ प्रगतिशील किसान संगठन का प्रतिनिधिमंडल आज मृतक किसान के पंचशील नगर दुर्ग स्थित उनके मकान में जाकर परिजनों से भेंट किया और संगठन की ओर से संवेदना व्यक्त किया, किसान संगठन के प्रतिनिधिमंडल में संयोजक राजकुमार गुप्त और सचिव कल्याण सिंह ठाकुर शामिल थे ।
कुलेश्वर देवांगन का छोटा बेटा जयराज मृतक पिता के क्रिया-कर्म के लिए इलाहाबाद गया है, बड़े पुत्र दीपराज ने संगठन के जांच दल को अत्यंत पीड़ा के साथ बताया कि उनके पिता मानसिक रोगी नहीं थे जैसा कि प्रशासन आरोप मढ़ रही है, घर की आर्थिक तंगी को लेकर चिंतित जरूर रहा करते थे, उनके बताए अनुसार उनके परिवार की नगपुरा में साईकिल की दुकान थी जो लगातार घाटा के कारण एक साल से बंद कर दिए थे, उनके परिवार के पास दो गांव में कृषि भूमि है, मड़ियापार में 3 एकड़ धनहा है, बोर भी है किंतु बोर में न तो पंप लगा पाये हैं और न ही बिजली कनेक्शन है, खेती स्वयं नहीं करके रेग में दिये थे, पुरदा में साढ़े सात एकड़ जमीन है उसमें साढ़े पांच एकड़ भर्री और दो एकड़ भाठा है यहां की जमीन से परिवार को कोई आमदनी नहीं है क्योंकि जमीन बंजर पड़ी है,
बड़ा पुत्र दीपराज सुमित माल में सेल्समैन का काम करके परिवार को आर्थिक सहयोग करता है जो खर्च के लिए नाकाफी होता है, छोटा पुत्र जयराज शंकराचार्य इंजीनियरिंग कॉलेज में पांचवे सेमेस्टर में पढ़ाई करता है, प्रति सेमेस्टर 36 हजार फीस के अलावा पढ़ाई में कुल 50 हजार का खर्च है,
खेती करने के लिए कुलेश्वर देवांगन ने लगभग 20 हजार रुपए का केसीसी ऋण लिया है, सायकिल दुकान बंद होने के बाद वह कुछ और धंधा करने के लिए धनराशि की व्यवस्था करने के प्रयास में था कृषि भूमि बेचने की कोशिश में लगा था किंतु नोटबंदी के बाद बदली हुई परिस्थिति में कोई खरीदार नहीं मिला,
आर्थिक तंगी और केसीसी ऋण की चिंता उन्हे परेशान करती थी, आमदनी का कोई रास्ता नजर नहीं आने की स्थिति में ही उन्होंने आत्महत्या करने का निर्णय लिया होगा, बाजार से उधार लेने की जानकारी परिजनों को नहीं है,
कुलेश्वर देवांगन के परिवार को प्रशासन द्वारा मृतक किसान को मानसिक रोगी बताए जाने से गंभीर आघात पहुंचा है, बड़े दुखी होकर दीपराज का कहना है कि भले ही सरकार आर्थिक सहयोग न दे लेकिन कम से कम अनर्गल आरोप लगाकर हमें अपमानित तो न करे ।


राजकुमार गुप्त, संयोजक, छत्तीसगढ प्रगतिशील किसान संगठन

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