मैं रमन सिंह से अनुरोध करता हूँ कि वो कबीरदास के धर्म की सरहदों को लांघकर मेलजो ल-प्रेम करने वाले सन्देश को छत्तीसगढ़ सरकार का मुख्य मिशन बनाएं।-मोहित कुमार पांडेय, अध्यक्ष, जेएनयू छात्रसंघ।

मैं रमन सिंह से अनुरोध करता हूँ कि वो कबीरदास के धर्म की सरहदों को लांघकर मेलजो ल-प्रेम करने वाले सन्देश को छत्तीसगढ़ सरकार का मुख्य मिशन बनाएं।-मोहित कुमार पांडेय, अध्यक्ष, जेएनयू छात्रसंघ।

 

 

मैं रमन सिंह से अनुरोध करता हूँ कि वो कबीरदास के धर्म की सरहदों को लांघकर मेलजोल-प्रेम करने वाले सन्देश को छत्तीसगढ़ सरकार का मुख्य मिशन बनाएं।

12.06.2017

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कुशाभाऊ ठाकरे विवि के एक आयोजन में कहा कि जेएनयू में आज़ादी के नारे लगाने वालों को कबीर पढ़ाया जाना चाहिए। हम यह जानकर बहुत खुश है कि एक ऐसा व्यक्ति जिसकी पार्टी साम्प्रदायिक नफरतगर्दी और जातिवादी दम्भ के आधार पर बढ़ती है, वो जीवन भर साम्प्रदायिक मेलजोल और जाति को तोड़ने का सन्देश देने वाले कबीरदास से परिचित हो रहे हैं. धर्म की हर सरहद को लांघकर मेलजोल और प्रेम कबीर के जीवन का सबसे बड़ा सन्देश था. इसलिए हम रमन सिंह जी को बताना चाहते हैं, कि केवल कबीर को पढ़ना ही काफी नहीं है, बल्कि एक अच्छे जीवन और सभ्य समाज के लिए कबीर के सन्देश को जीवन में उतारना बहुत जरुरी है.
मैं रमन सिंह से अनुरोध करता हूँ कि वो कबीरदास के धर्म की सरहदों को लांघकर मेलजोल-प्रेम करने वाले सन्देश को छत्तीसगढ़ सरकार का मुख्य मिशन बनाएं।
हालाँकि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री जेएनयू को बिना जाने-बूझे ही यहाँ लेकर आये हैं, फिर भी हम बता दें कि जेएनयू के लोग न केवल कबीरदास को पढ़ते हैं बल्कि उनके सन्देश को व्यवहार में भी लाते हैं. समाज विज्ञानं और साहित्य के कई सारे छात्र-छात्राएं कबीर पर अपने शोध कर चुके हैं और कर भी रहे हैं. जेएनयू में शिक्षण का कार्य कर चुके डा. पुरुषोत्तम अग्रवाल ने कबीर पर सधे हुए अध्ययन से किताबें लिखी हैं. जब हम ‘जातिवाद से आज़ादी’ का नारा लगाते हैं, तब हम कबीरदास के सन्देश से प्रेरणा लेते हैं. आपने कबीर का वो दोहा सुना है, “साईं इतना दीजिये, जामे क़ुटुब समाय। मैं भी भूखा न रहूं, साधु न भूखा जाय.” ये दोहा हमें गरीबी से आज़ादी मांगने की प्रेरणा देता है.
अगर देखा जाए तो गरीबी हटाने में छत्तीसगढ़ का प्रदर्शन सबसे बुरा है. अगर रमन सिंह कबीर के अनुयायी हैं तो छतीसगढ़ को पूजीपतियों के हाथों देने की बजाय इस पर ध्यान लगाएं की वहां से गरीबी कैसे कम हो. रमन सिंह को तुरंत एक ‘अंधसृद्धा के खिलाफ’ एक बिल लाना चाहिए। क्यूंकि कबीर ने कहा था ‘जप माला छापा तिलक, सरै न एको काम”.
हम फिर से कहना चाहते हैं, कबीर के सन्देश को जीवन में उतारिये, केवल पढ़िए-पढ़ाइये मत और जेएनयू कबीर के सन्देश को जीवन में उतारता है.

मोहित कुमार पांडेय, अध्यक्ष, जेएनयू छात्रसंघ।

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