सरकार धीरे धीरे एक एक कर गाँव के लोगो को उठाती है ,मारती है, और पलायन को मजबूर कर देती है ,यही क्रम चलता है बस्तर में .

0 तामेश्वर सिन्हा
सरकार ने कथित 34 लोगो को नक्सली बताया वो एक गांव के लोग है। मतलब सरकार ने पूरा एक गांव के पुरुषो को उठा लिया ऐसे ही अगले गांव के पुरुषो को उठा लेगी। फिर दूसरे गांव के महिलाओ को । तीसरे गांव में कुछ लोग को मार देगी। चौथे गांव वालो को मार- मार के पलायन करवा देगी ।
एक जानकरी के अनुसार नक्सली जब किसी गांव में वारदात को अंजाम देते है आस पास के गांव के महिलाओं-बच्चों के ऊपर मामला दर्ज कर लिया जाता है। जब भी नक्सल उन्मूलन के नाम पर फर्जी गिरफ्तारी और सरेंडर करवाना होता है उस गांव से 10 /20 लोगो को पकड़ लिया जाता है।
बस्तर के किसी भी एस पी ऑफिस में जा कर देखिए एक नक्शा होगा बस्तर के सारे गांव का नक्शा होगा जिसमे कई गांव लाल घेरे में चिन्हांकित होंगे, सरकार इन्ही गांव मेसे आदिवासियों को पकड़-पकड़ कर ले आती है। एक गांव में जब पुरे पकड़ लिए जाते है फिर दुसरा गांव टारगेट रहता है। में तो एक ऐसा गांव भी जानता हूँ जहा सारे पुरुषों को नक्सली बता दिया गया अब वहा सिर्फ महिलाये रहती है।
कुल मिलाकर इनका लक्ष्य आदिवासियों को नक्सल उन्मूलन के नाम पर खत्म करना है। यही नही ये बच्चों को भी नही छोड़ते हाल ही में वर्षा डोंगरे जी की पोस्ट ने इसे पुख्ता कर दिया है । आदिवासियों पर शोषण,अत्याचार सो अलग जो वो रोज झेलते है। पूरा फंडा आदिवासी मिटाओ के तहत सरकार काम कर रही है जिसमे नक्सल उन्मूलन का संघी शहरी बटालियन अर्थात बुद्दिजीवी टाईप के लोग भी भिड़े हुए है। ये शहर में हो रहे विरोध को कुचलते है।
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