बुर्कापाल के गाँव से 34 निरपराध ग्रामीणों को किया गिरफ्तार ,सोनी ने कहा की यह पुलिस की बदले की कार्यवाही है,इसके खिलाफ वे कोर्ट जाएँगी और आन्दोलन भी करेंगी

बुर्कापाल के गाँव से 34 निरपराध ग्रामीणों को किया गिरफ्तार ,सोनी ने कहा की यह पुलिस की बदले की कार्यवाही है,इसके खिलाफ वे कोर्ट जाएँगी और आन्दोलन भी करेंगी .

 

12.06.2017

*सोनी सोरी ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने जिन 34 लोगों को नक्सली बताकर गिरफ्तार किया है  नक्सली नहीं बल्कि वहां के स्थानीय ग्रामीण हैं. सोनी सोरी ने बताया कि ये वही ग्रामीण है जिन्हें सुरक्षाकर्मी मंगलवार को बहला-फुसलाकर बात करने के नाम पर ले गई थी और उसके बाद से बता नहीं रही थी कि कहां रखा है.

 

सोनी सोरी ने कहा कि जगदलपुर में जब उन्होंने शनिवार को इन गिरफ्तार लोगों के परिजनों के साथ प्रेस कांफ्रेंस करके बताया कि गांव के सभी पुरुषों को उठा लिया है. और उन्हें कहां रखा गया है ये नहीं बता रही है. सोनी सोरी का आरोप है कि जब ये खबर रविवार को अखबारों के जरिए सामने आई तो मजबूरन पुलिस को उन्हें इसी दिन गिरफ्तार दिखाना पड़ा. उन्होंने कहा कि पुलिस 40 ग्रामीणों को उठाकर ले गई थी लेकिन बाद में इसमें से 6 को रिहा कर दिया.

सोनी सोरी का कहना है कि सुरक्षाबलों ने बुरकापाल की घटना के बाद गांव के एक युवक को नक्सली बताकर मार दिया था. इसके बाद गांव के सभी पुरुष डर से वहां से भाग गए थे. सोरी का कहना है कि बाद में जवानों ने महिलाओं को कहकर उन्हें बुलवाया. और फिर जब वे आए तो उनसे बात करने की बात कहकर मंगलवार को अपने साथ कैंप में रख लिया. इसके बाद जब अगले दिन महिलाएँ उनके पास गई तो उन्होंने कहा कि गांव के सभी पुरुष जा चुके हैं. इसके बाद इन महिलाओं ने मीडिया के सामने अपना पक्ष रखा.

सोनी सोरी पहले ही कह चुकी हैं कि इस मामले को लेकर वो कोर्ट में जाएंगी. उन्होंने कहा कि इन महिलाओं को लेकर जगदलपुर या रायपुर में इस गिरफ्तारी के विरोध में धरना देंगी.

 

कल ही सोनी सोरी ने सुकमा में प्रेस कांफ्रेंस करके पुलिस पर आरोप लगाया था की ,

बुरकापाल से चालीस पुरुषों को पुलिस और सुरक्षा बल वाले छह जून को पकड के ले गए.

* आदिवासी महिलाओं और छोटी बच्चियों को भी सिपाही पीट रहे हैं, इन सिपाहियों का कहना है कि हम तुम्हारा गांव उजाड़ेंगे, सिपाही गांव की महिलाओं से कह रहे हैं कि तुम लोग गाँव खाली करके भाग जाओ.

बुराकपाल से करीब बीस महिलाएं और बच्चे दंतेवाड़ा आये हुए हैं,उनका कहना है की  हमारे परिवारों के चालीस पुरुषों को पुलिस और सुरक्षा बल वाले छह जून को पकड के ले गए, इन आदिवासियों से फ़ोर्स वालों ने दिन भर फ्री में सीआरपीएफ कैम्प में काम करवाया और फिर अगले दिन सुकमा शहर लेकर चले गए.

इन आदिवासियों से फ़ोर्स वालों ने दिन भर फ्री में सीआरपीएफ कैम्प में काम करवाया और फिर अगले दिन सुकमा शहर लेकर चले गए,

अब पुलिस वाले और सीआरपीएफ वाले गांव की महिलाओं को जंगल में से तेंदू पत्ता और महुआ का बीज, टोरा भी नहीं बीनने दे रहे हैं,

आदिवासी महिलाओं और छोटी बच्चियों को भी सिपाही पीट रहे हैं, इन सिपाहियों का कहना है कि हम तुम्हारा गांव उजाड़ेंगे, सिपाही गांव की महिलाओं से कह रहे हैं कि तुम लोग गाँव खाली करके भाग जाओ.

एक दिन बाद इनमे से 34 लोगो को गिरफ्तार बता दिया और 6 लोगो को छोड़ दिया था . 7 जून को जिन्हें पकड़ा गया उन्हें 11 जून को गिरफ्तार बताया गया ,इतने दिन उन्हें कोर्ट में पेश नहीं किया गया ,जब उनके परिजन सुकमा में एकत्रितं हुए और पत्रकारों के समक्ष पेश हुए तब इन सभी निर्दोष लोगो की गिरफ्तारी बता दी .

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