न कोर्ट,न कानून, न संविधान… बस्तर पुलिस है हैवान…

न कोर्ट,न कानून, न संविधान… बस्तर पुलिस है हैवान…
न्यायालय से बरी आदिवासी युवक बालसिंह को पुलिस ने नक्सली बता कर फर्जी मुठभेड़ में मार डाला
फर्जी मुठभेड़ में आदिवासियों की निर्मम हत्या का अंतहीन सिलसिला जारी है । ताजा घटना 25 नवम्बर को मर्दापाल थाना क्षेत्र अंतर्गत बावड़ी के जंगल का है । जहाँ बस्तर आईजी शिव राम प्रसाद कल्लूरी के नेतृत्व में चलाये जा रहे नक्सल विरोधी अभियान के तहत पुलिस ने जिस कथित मुठभेड़ में वर्दीधारी नक्सली को मार गिराने का दावा किया था; वह भी फर्जी निकला । ग्रामीणों और परिवार के लोगों ने आरोप लगाया कि मर्दापाल थाना अंतर्गत छोटे कोड़ेर निवासी बाल सिंह शोरी पिता रामधर को पुलिस छोटे कोड़ेर में उसके घर से निकालकर बांसगांव ले गई । जहाँ पुलिस ने कथित मुठभेड़ में नक्सली बताकर मार दिया। पुलिस ने बांसगांव में ही पंचनामा तैयार कर शव पुलिस मुख्यालय ले आई । पुलिस इस आदिवासी युवक को कथित मुठभेड़ में नक्सली बताकर मारने का दावा कर रही थी। लेकिन इसकी जो सच्चाई सामने आ रही है वह रौंगटे खड़े कर देने वाली है । इसे सुनकर आपका पुलिस पर भरोसा उठ जायेगा ।
यह बालसिंह शोरी की कहानी है जो जुलाई 2016 में न्यायालय से बरी हुआ था। परिवार के अनुसार बालसिंह शोरी अपने निवास छोटे कोड़ेर में पत्नी चाचाडी , एक ढाई साल का बच्चा, एक दूध मुंही आठ माह की बच्ची के साथ अपना जीवन अभाव में जैसे-तैसे गुजार रहा था। लेकिन इनके इस जीवन को भी इस हत्यारी सरकार की बुरी नजर लग गई।
जंगलों में कष्टप्रद जीवन जी रहे उसके परिवार पर पुलिस का आतंक अचानक बरस पड़ा, जब सर्चिंग पर निकली पुलिस की टीम बाल सिंह को 24 नवम्बर 2016 को रात 9 बजे घर से उठा कर ले गई और दुसरे दिन सुबह बांसगाँव में गोली मार दी। पुलिस बॉसगांव में ही शव का पंचनामा और बांसगाँव के सरपंच से शव का शिनाख्त करवाकर कोंडागाँव जिला मुख्यालय ले आई। परिजनों के खोजबिन करने पर छोटे कोड़ेर के कोटवार ने पुलिस मुख्यालय परिवार जनों को जाने के लिए कहा, जहाँ पुलिस ने स्वयं गाड़ी व्यवस्था कर बालसिंह का शव देकर परिवार के लोगों को वापस भेज दिया। ग्रामीणों और आदिवासी समाज के लोगो को इस बात की जानकारी मिलने पर पुलिस द्वारा कथित मुठभेड़ में मारने गिराने के दावे को फर्जी करार देते हुए विरोध होने लगा है ।
अप्रेल 2016 में ही पुलिस ने नक्सली बता कर किया था गिरफ्तार, जुलाई में हुआ बरी, नवम्बर में मुठभेड़ में मार दिया
जानकारी के अनुसार पुलिस ने अप्रेल 2016 में बालसिंह शोरी को नक्सली वारदातों में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। तीन महीने जेल में रहने के बाद जुलाई 2016 में बालसिंह शोरी तथ्य नही होने के चलते न्यायालय से बरी हुआ था। और इसी नवम्बर की 25 तारीख को पुलिस ने कथित मुठभेड़ में नक्सली बता कर मार दिया। इससे पहले भी पुलिस ने दरभा ब्लाक में अर्जुन नामक आदिवासी युवक को न्यायालय से बरी होने के बाद नक्सली बता कर फर्जी मुठभेड़ में मार दिया था।

फर्जी मुठभेड़ को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन
बालसिंह शोरी को नक्सली बताकर कथित मुठभेड़ में मारे जाने को लेकर ग्रामीणों ने पुलिस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है । मर्दापाल क्षेत्र के हजारों ग्रामीण चार दिन पुराने आदिवासी युवक की शव को बिना अंतिम संस्कार किए कोंडागांव मुख्यालय लेकर परिवार सहित विरोध प्रदर्शन करने आ रहे थे। जिन्हें मर्दापाल थाने में ही रोक लिया गया। 28 नवम्बर को ग्रामीण शव को साथ लेकर प्रदर्शन करने जा रहे थे। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि इसी बीच पुलिस ने बालसिंह शोरी का शव को छुपाने की कोशिश भी की और शव को मर्दापाल थाने अंदर ले गए। भारी विरोध प्रदर्शन को देखते हुए कोंडागांव विधायक मोहन मरकाम विरोध स्थल पहुँचे और पुलिस के चंगुल से शव को बाहर निकाल फर्जी मुठभेड़ का विरोध करते हुए दोषी पुलिस अधिकारियों पर एफआईआर के लिए डटे रहे।
आदिवासी छात्र भी फर्जी मुठभेड़ को लेकर विरोध में आए सामने
जानकारी के अनुसार बालसिंह का भतीजा पढाई कर रह है। जब पुरे घटनाक्रम की छात्रों को जानकारी मिली तो छात्रों ने पुलिस के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। छात्रों ने कहा कि दोषी पुलिस वालों का नाम उजागर कर हत्या का मुकदमा चलाया जाए। सरकार आदिवासियों के नाम पर निर्दोष आदिवासियों की हत्या बंद करे।
कोंडागांव विधायक मोहन मरकाम ने बताया कि मैं मर्दापाल विरोध स्थल पर मौजूद था, ग्रामीण अर्थी को लेकर जब फर्जी मुठभेड़ में नक्सली बता के मारने का विरोध कर रहे थे उस वक्त पुलिस ने शव को छुपा दिया था। पुलिस के आला अफसरों के बातचित के बाद शव को ग्रामीणों को सुपुर्द किया गया। मोहन मरकाम ने यह भी कहा कि पुलिस बेगुनाहों को मार रही है। कौन नहीं चाहता बस्तर में नक्सलवाद समाप्त हो, लेकीन यहाँ तो पुलिस आदिवासी समाप्त करने में लगी है। अपने पद में वृद्धि के लालच में पुलिसवाले बेगुनाह आदिवासियों की हत्या नक्सलियों के नाम पर करवा रहे है। पुरे मामले को लेकर मरकाम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
न्ययालय द्वारा साक्ष्य नही होने के चलते बरी हुआ बालसिंह शोरी, पुलिस द्वारा नक्सली वारदातों में शामिल होने का आरोप लगाते जेल भेज दिया था. फिर फर्जी मुठभेड़ में मार दिया गया. 

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