आग तो पूरे देश के किसानों के सीने में सुलग रही है, कहां कहां गोली चलाओगे? कितने किसान की जान लोगे? 6 किसानो की गोली मार कर हत्या मंदसौर में

 

शहीद किसानों को क्रांतिकारी सलाम
* मंदसौर में पुलिस की गोली से शहीद हुये 6 किसानो को श्रध्दांजलि .
* किसानों पर गोली चलाने वाले शासन और पुलिस प्रशासन को धिक्कार .
* यही वो लोग है जो छत्तीसगढ़ में आदिवासियों से युद्ध कर रहे है और अब किसानो से .
* आग तो पूरे देश के किसानों के सीने में सुलग रही है, कहां कहां गोली चलाओगे? कितने किसान की जान लोगे?
**किसान भारी संकट में है फिर भी किसान हिंसा पर विश्वास नहीं करते हैं फिर मध्यप्रदेश के किसानों का आंदोलन हिंसा पर उतारू क्यों हो गया?

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ऐसा नहीं है कि किसानों की हालत कुछ सालों में अचानक ही खराब हो गई हो, कांग्रेस सरकार के समय भी किसानों को फसल का लाभकारी समर्थन मूल्य नहीं मिलता था, और यह कांग्रेस की ही सरकार थी जिसने स्वामीनाथन आयोग की अनुशंसा को लागू करने के बजाय 2005 से 2014 तक दबाये बैठी थी फिर भी किसान सरकार के खिलाफ आंदोलित नहीं हुए थे, फिर ऐसा क्या हो गया कि किसानों का गुस्सा भाजपा सरकार के खिलाफ फूट पड़ा है? वह है भाजपा की किसानों से वायदा खिलाफी और विश्वासघात । ।
छत्तीसगढ विधानसभा चुनाव में भाजपा ने घोषणापत्र में धान का समर्थन मूल्य 21 सौ रुपए दिलाने, पांच साल तक 350 रूपए बोनस देने और 5 एच पी तक के सिंचाई पंप को निशुल्क बिजली देने का वायदा किया था, लोकसभा चुनाव के समय भी भाजपा ने स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू करने का वायदा किया था, केंद्र में सरकार बनने के तीन साल बाद तक भी सरकार ने वायदे को पूरा नहीं किया, भाजपाई सरकारों के वायदाखिलाफी के खिलाफ किसानों का गुस्सा स्वाभाविक है,
यूपी विधानसभा चुनाव में स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों के कर्ज माफ करने की बात कही थी, आधा अधूरा ही सही यूपी सरकार ने किसानों के कर्ज माफ करने का ऐलान कर दिया, इससे अन्य राज्य में विशेष रूप से भाजपा शासित राज्य के किसानों में कर्ज माफी की उम्मीद जगना अस्वाभाविक नहीं है लिहाजा यही मांग मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र सहित अन्य राज्य के किसान भी उठा कर आंदोलन कर रहे हैं ।
शनिवार तक दोनों ही राज्य के किसान संयमित रहते हुए ही हड़ताल कर रहे थे कि योजनाबद्ध ढंग से आरएसएस के पुत्र और भाजपा के सहोदर भारतीय किसान संघ ने मध्यप्रदेश में पहले किसानों की हड़ताल का समर्थन कर दिया और दूसरे दिन रविवार को उन मांगो पर सरकार के साथ समझौता कर के जो किसान हड़ताल की मांग थी ही नहीं, अपनी ओर से ही हड़ताल समाप्त हो जाने की घोषणा कर दिया, भारतीय किसान संघ और भाजपा सरकार के इस हरकत ने किसानों के जख्मों पर नमक छिड़कने और आग में घी डालने का काम किया ।
किसानों का गुस्सा भड़कना स्वाभाविक है, किसान आंदोलन से भयभीत होकर और मानसिक संतुलन खोकर आखिरकार शिवराज सरकार ने दमन का सहारा लेकर पुलिस की गोलियों से भून कर आज 6 किसान को मौत के घाट उतार दिया,
शिवराज सरकार और भाजपा के हाथ किसानों के खून से रंगे हुए हैं, उन्हे समझ लेना चाहिए कि मामला सिर्फ मध्यप्रदेश तक सीमित नहीं है आग तो पूरे देश के किसानों में सुलग रही है, दावानल के रूप में पूरे देश में फैलने में समय नहीं लगेगा,

 

प्रगतिशील किसान संघ छत्तीसगढ़ 

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