नोटबंदी का फुगना अब फूटने लगा है

नोटबंदी का फुगना अब  अब फूटने लगा है
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नोटबंदी का फुगना अब  अब फूटने लगा है ,
न समर्थन में नारे लग रहे है और न अब कोई यह कह रहा है कि  थोडी परेशानी है लेकिन निर्णय अच्छा है .

न लाईनें कम हो रही है और न लोगों को अपनी मेहनत का पैसा मिल पा रहा है .

किसान, छोटे दुकानदार ,मजदूर और रोजमर्रा के काम लगभग बंद से हो रहे है.अब लोगों को मोदी की नीयत पर भी शक होने लगा है .

छोटे ,मझले  और मध्यम उधोगपति भी समझ रहे है कि यह निर्णय उनके खिलाफ जा रहा है , इन सबका असर बड़े उधोगधंदे पर भी पडने लगेगा धीरे धीरे उन्हें भी यह समझ आने लगा है .

नौजवानों पर बेरोजगारी का खतरा मंडरा  रहा है ,छोटे बड़े उधोग अपने कर्मीयों को वापस घर भेजने लगे है .

काला धन ,भ्रष्टाचार और आतंकवाद की बात करना तो मोदी जी ने भी बंद कर दिया है

अब यह सबके सामने  आ गया है कि जितनी करेंसी रिज़र्व बेंक ने अब तक छाप कर प्रचलन में उतारी थी   ,लगभग पूरी करेंसी वापस बेंक में जमा हो रही है,,अब यह जबाब देना मुश्किल हो रहा है कि फिर काला धन कहां चल गया .
न कैश पर्याप्त छप सका था और न राशी पहुचाने की समुचित व्यवस्था थी . चार  महीने छोड़िए ,एक महीने पहले भी तैयारी शुरू नही की गई .
सहकारी बेंको का ख्याल ही छूट गया जहाँ सबसे ज्यादा किसान लेनदेन करते है .
 इतना जल्दी कैशलैस इकानामी की बात करना तो मूढता की हद है ,नीतिनिर्धारक ब्यूरोक्रेसी मोदी और पूरी भाजपा को उल्लू बना रहे है .

जैसा वो कह रहे है वैसा होने में पूरे  पच्चीस साल भी कम पडेंगे .इनके और उनके आका अमेरिका में भी अभी भी साठ फीसदी कैश आधारित सिस्टम है .यानी वहाँ भी  चालीस फीसदी कैशलेस व्यवस्था बन पाई है .

यह सब देखकर भाजपा के हाथपांव फूल रहे है ,इसकी कल्पना भी नही की थी कि यह निर्णय पार्टी को  यहाँ खडा कर देगा .

बडी मुश्किल मोदी जी को होने वाली है,उन्होंने पार्टी और सरकार में किसी को भरोसे में  नही लिया ,कह दिया था कि सारी जिम्मेदारी मेरी है .

राहुल गांधी  से लेकर अरविन्द केजरीवाल तक मोदी पर आजतक के सबसे बड़े स्कैम की बात कर रहे है .
यदि नोटबंदी को विपक्ष स्कैम के इर्द गिर्द समेटने में सफल हो गया तो पूरी भाजपा को लेने के देने पड जायेंगे .

वैसे अरविन्दकेजरीवाल की इस बात में दम लग रहा है कि लगभग दिवालिया कर दिये गये बेंक का पेट भरने का गोरखधंधा है यह नोटबंदी ,ताकि  लोगो का सारा सफेद कैश बेंक में जमा हो जायें ताकि बड़े उधोगपतियो़ को पेट भरा जा सके .

नोटबंदी जैसा एकाधिकारवादी निर्णय दुनियाँ में अभी तक तानाशाहों ने लिया है ,हिटलर मुसोलिनी या पोलपोट की बात छोड भी दी जायें तो भी ऐसे अहंकारी निर्णय संघ का स्वयंसेवक ही ले सकता है ,

 क्योंकि उन्हें लगता है कि देश, सिर्फ और सिर्फ उनका ही है और वे ही ईमानदार है ,उनके अलावा सब भ्रष्टाचारी  और देशद्रोही है .
 मोदी अब जहाँ आ खड़े हो गये है वहाँ से वापस लौटना असंभव है, और वे इतने विनम्र भी नहीं है कि अपनी गलती मानकर अपने निर्णय को वापस ले सकें .

अब तो मोदी जी का निर्णय गले की घंटी बन गया है भाजपा के लिये और देश के लिये भी .
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लाखनसिंह 

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