सीआरपीएफ का राजनैतिक उपयोग बहुत खतरनाक संकेत है :संदर्भ बंगाल

सीआरपीएफ का राजनैतिक उपयोग बहुत खतरनाक संकेत है :संदर्भ बंगाल .
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बंगाल में केन्द्र सरकार का एसा हस्तक्षेप बहुत खतरनाक संकेत देता है . तृणमूल कांग्रेस के कूछ कार्यकर्ताओं (गुण्डों ) ने सुमीता बंधोपाध्याय की गिरफ्तारी के बाद कोलकता में भाजपा कार्यालय पर हमला कर दिया ,जैसा कि वहाँ माकपा कार्यालयों पर भी होता रहा है.
भाजपा कार्यालय की रक्षा के लिये केन्द्रीय रिज़र्व फोर्स (CRPF) पहुंच गया ,जब कि आमतौर पर राज्य पुलिस का काम होता है ,या राज्यसरकार  या राज्यपाल की मांग पर केन्द्र रिज़र्व फोर्स भेजता है .

बंगाल सरकार  और तृणमूल के लोग राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी से मिलने गये और पूछा कि क्या उन्होंने सीआरपीएफ को बुलाया  था ,तो उन्होंने कहा कि नही हमने नही बुलाया .
तो बाद में मालुम हुआ का बंगाल भाजपा ने ग्रहमंत्री राजनाथ सिंह को बोलकर अपने कार्यालय में सीआरपीएफ  की तैनाती  कर दी .
इसका मतलब यही हुआ कि भाजपा के कहने पर सुरक्षा बल मूव्ह करने लगे है ,राज्य सरकार की कोई भूमिका नही रह गई. ठीक ऐसा ही कुछ समय पहले बंगाल में सैना ने बिना राज्य सरकार को सूचित किये टोल टेक्स पर पहुँच गई थी .

* ममता को डराने की कोशिश
चिटफंड के सबूत सीबीआई के पास ढाई साल से थे लेकिन अभी तक किसी महत्वपूर्ण नेताओं की गिरफ्तारी नही हुई ,नोटबंदी पर ममता के विरोधी स्वर के बाद अचानक ये गिरफ्तारी शुरू होना भी राजनैतिक कार्यवाही ही है.
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