पुरंगेल मुठभेड़ सवालों के घेरे में ,,गुमपूर के सैकडों ग्रामीण पहुचे पैदल ,,सोंपा ज्ञापन

पुरंगेल मुठभेड़ सवालों के घेरे में ,,गुमपूर के सैकडों ग्रामीण पहुचे पैदल ,,सोंपा ज्ञापन .

* पुलिस अधिकारियों ने मांगो को नकारा ,आगे की रणनीति के लिए बस्तर भवन में रूके है ग्रामीण .
*29 जनवरी को किरंदूल में हुईं थी कथित मुठभेड़ .
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15.2.17

दंतेवाड़ा /पत्रिका /बचेली / 29 जनवरी को किरंदूल थाना क्षेत्र में पुरंगेल के जंगल में कथित मुठभेड पर सवाल खड़े हो रहे है .सोनी सोरी के साथ ग्रामीण तीस किलोमीटर दुर्गम पहाडियों से पैदल चल कर सैकड़ों ग्रामीण किरंदूल थाना पहुचे .
इस बीच पुलिस को भी अंदरुनी क्षेत्रों से से लोगों के आने की भधक लग गई थी इसलिए संवेदनशीलता के कारण पुख्ता इंतजाम कर लिये थे .
ग्रामीणों ने तीन मांगो को लेकर ज्ञापन दिया ,जिसे पुलिस ने नकार दिया .एएसपी जीएन बघेल ने प्रदर्शन कारीयों से कहा कि न्यायालय के आदेश के बाद ही जानकारी दी जा सकती है .पुलिस का कहना है कि मारे गये दोनों माओवादी थे ,उनके खिलाफ किरंदूल और कुआकोण्डा थाने में अपराध दर्ज है .
किरंदूल थाना क्षेत्र के पुरंगेल जंगल में हुई मुडभेड को फर्जी बताते हुये बीजापुर के गमपुर से करीब तीन सो ग्रामीण तीस किलोमीटर दुर्गम क्षेत्र से पैदल चल कर थाना पहुचे थे .
इनमें महिलाओं की संख्या ज्यादा थी ,उनका कहना था कि  पुलिस ने भीमा और सुखमति को गोली से मार दिया जबकि दोनों माओवादी नही थे .उनके खिलाफ किस किस थाने में अपराध दर्ज है इसकी जानकारी दीजिए .
पोस्टमार्टम की वीडियो और फोटोग्राफ हमें दिया जायें इसपर पुलिस का कहना था कि बिना कोर्ट के आदेश के वह यह सामग्री उन्हें नहीं दे  सकते .
पुलिस का कहना है कि भीमा के खिलाफ किरंदूल में चार मामले ओर सुखमति पर कुआकोंडा थाने मे मामला दर्ज है .इसके अलावा और मामलों की जानकारी भी थानों से प्राप्त की जा रही है .
पुलिस ने ग्रमीणों की अपराध दर्ज करने की मांग को सिरे से नकार दिया और कहा कि मामले की एक बार एफआईआर हो चुकी है. अब दुबारा अपराध दर्ज नही किया जा सकता है .यदि ग्रामीणों को मुठभेड़ पर कोई आपत्ति है तो साक्ष्य प्रस्तुत करें और थाने में बयान दर्ज कराये.
दुधमुहे बच्चे के साथ पहुची मृतक भीमा की पत्नी .

किरंदूल के थाना परिसर मे सोनी सोरी के साथ सैकड़ों ग्रामीण  गमपुर और आसपास से तीन सूत्रीय मांगे लेकर पहुचे थे .
मांगपत्र सोंपने के बाद पुलिस के जबाब से सभी असंतुष्ट थे .अब न्याय के लिये परिजन और ग्रामीण जिले के अधिकारियों से मुलाकात करके गुहार  लगायेंगे.
सभी ग्रामीण किरंदूल के  बस्तर भवन मे ही रूके है .जहाँ से वे कल दंतेवाड़ा जायेंगे. प्रदर्शनकारीयों के साथ दुधमुंहे बच्चों को लेकर महिलायें भी साथ आई थी .
मारे गये भीमा कडती की पत्नी अर्जू  कडती भी अपने एक महीने के बच्चे के साथ आई थी.इसका नामकरण भी नही हुआ है .उन सबने भारी परेशानी के  साथ पूरी रात भवन में ही गुजारी हैं .
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नई दुनिया लिखता है
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मुठभेड़ को बताया फर्जी, दोषी पुलिस कर्मियों पर मामला दर्ज करने की मांग
Wed, 15 Feb 2017
नई दुनिया

ग्रामीणों को किरंदुल में ही रात गुजारनी पड़ेगी।

दंतेवाड़ा।पखवाड़े भर पहले किरंदुल थाना क्षेत्र के हिरोली-पुरंगेल जंगल में हुई मुठभेड़ को फर्जी बताते बीजापुर के गमपुर से करीब 300 ग्रामीण बुधवार को किरंदुल पहुंचे। ग्रामीणों का कहना था पुलिस फर्जी मुठभेड़ में सुक्की और भीमा को मारा है। वे दोनों बाजार से गांव लौट रहे थे तभी पुलिस पकड़कर रात भर अपने साथ रखी और सुबह गोली मार कर नक्सली बता रही है। ग्रामीणों का नेतृत्व आप नेत्री सोनी सोरी कर रही थी।

थाना पहुंचे ग्रामीणों का आवेदन पुलिस ने नहीं लिया है। ग्रामीणों मांगे है कि पहली मांग फर्जी मुठभेड़ के मामले में मामला दर्ज किया जाए, सुक्की और भीमा पर अपराध पंजीबद्ध है तो पीड़ित परिवार को एफआईआर की कापी दी जाए तथा पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी व फोटा उपलब्ध कराए जाएं।

इस पर पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी व फोटो न्यायालय के आदेश पर मिलेगी। भीमा के खिलाफ किरंदुल के थाने में चार मामले पंजीबद्ध हैं। वहीं सुक्की पर कुआकोंडा थाने में मामला दर्ज होने की बात कही गई है। लेकिन एफआईआर की प्रति कथित मुठभेड़ में मारे गए परिजनों को नहीं सौंपी गई। सबसे अहम मांग ग्रामीणों की फर्जी मुठभेड़ पर मामला दर्ज किया जाए। इसको पुलिस ने सिरे से नकार दिया।

इस पर पुलिस अधिकारियों का तर्क है कि मुठभेड़ की एक बार एफआईआर हो चुकी है। अब इस मामले में दूसरी बार एफआईआर नहीं होगी। ग्रामीण और परिजनों को मुठभेड़ से दिक्कत है तो साक्ष्य प्रस्तुत करें और थाने में अपने बयान दर्ज कराएं।

पुलिस के जवाब से ग्रामीण असंतुष्ट

किरंदुल थाना परिसर में गमपुर और आसपास के इलाके से सोनी सोरी के साथ सैकड़ों ग्रामीण अपनी तीन सूत्रीय मांगों को लेकर पहुंचे थे। मांग पत्र सौंपने के बाद पुलिस से मिले जवाब से ग्रामीण असंतुष्ट नजर आए। अब ग्रामीण न्याय के लिए जिला मुख्यालय के लिए गुरुवार को रूख करेंगे। सभी ग्रामीणों को किरंदुल में ही रात गुजारनी पड़ेगी। गमपुर से पहुंचे ग्रामीणों में दुधमुंहे बच्चों को लेकर महिलाएं भी पहुंची हैं। यदि ग्रामीणों ने किरंदुल में रात बिताई तो इन बच्चों को ज्यादा तकलीफ सहनी होगी।

इनका कहना है

”सोनी सोरी के अगुवाई में गमपुर से किरंदुल पहुंचे ग्रामीणों का आवेदन ले लिया गया। उन्हें बताया गया कि किसी भी मामले में एक बार एफआईआर होता है। मारे गए नक्सलियों के खिलाफ थानों में दर्ज एफआईआर और पोस्टमार्टम की वीडियो-फोटोग्राफ्स उपलब्ध कराई जाएगी। पर इसके लिए उन्हें न्यायालय से अनुमति लेनी होगी।

-गोरखनाथ बघेल, एएसपी, नक्सल आपरेशन

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पत्रिका और नई दुनिया की रिपोर्ट
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