अजमेर ब्लास्ट : RSS के भावेश पटेल, देवेंद्र गुप्ता को उम्र क़ैद

अजमेर ब्लास्ट : RSS के भावेश पटेल, देवेंद्र गुप्ता को उम्र क़ैद

March 22, 2017

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जयपुर – अजमेर दरगाह ब्लास्ट केस में जयपुर की एनआईए कोर्ट ने दोनों दोषियों को उम्र कैद की सजा सुनाई है। भावेश पर 10 हजार और देवेंद्र पर 5 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। इस मामले में कोर्ट ने आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार और स्वामी असीमानंद समेत पांच लोगों को क्लीन चिट देते हुए बरी कर दिया था। दरगाह धमाके के आरोपी देवेंद्र गुप्ता, भावेश पटेल और सुनील जोशी को दोषी करार दिया था। इनमें सुनील जोशी की मौत हो चुकी है।
इसी बीच दोनों पक्षों को दरखास्त सुनने के बाद न्यायालय ने दोनों पक्षों से नजीरें पेश करने के लिए कहा। वकीलों को 18 मार्च तक का समय दिया गया है कि वे अपनी अपनी अपीलों को लेकर नजीरें पेश करे। 18 मार्च को दोनों पक्ष ने नजीरें पेश की थी।
एक आरोपी सुनील जोशी की हो चुकी है मौत 
जयपुर में एनआईए की स्पेशल कोर्ट ने अजमेर ब्लास्ट मामले में फैसला सुनाते हुए तीन लोगों को दोषी करार दिया था। दोषी पाये गये आरोपियों में से सुनील जोशी की मौत हो चुकी है। कोर्ट ने देवेन्द्र गुप्ता, भावेश पटेल और सुनील जोशी को आईपीसी की धारा 120 बी, 195 और धारा 295 के अलावा विस्फोटक सामग्री कानून की धारा 34 और गैर कानूनी गतिविधियों का दोषी पाया है। जिन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है।
अदालत में सजा पर हुई बहस
इससे पहले कोर्ट में सुनवाई के दौरान सजा तय किए जाने के बिन्दुओं पर चर्चा हुई। सीआरपीसी और यूएपीए के सेक्शन को लेकर दोनों पक्षों में बहस हुई। इस दौरान कोर्ट परिसर में दोनों आरोपी देवेन्द्र गुप्ता और भावेश पटेल मौजूद रहे।
NIA और बचाव पक्ष आमने-सामने 
एनआईए के एडवोकेट अश्विनी शर्मा ने कहा कि बम ब्लास्ट मामले में मुख्य षड़यंत्रकारी में शामिल होने के कारण इन दोनों आरोपियों को अन लॉ फुल एक्टिविटीज प्रिविन्सन एक्ट की धारा 18 के तहत सजा सुनाई जाए, लेकिन बचाव पक्ष के एडवोकेट जे एस राणा का कहना था कि सीआरपीसी के सेक्शन के तहत सजा तय की जाए।
दरगाह मामले में 13 आरोपी
बताते चलें कि इस मामले में RSS से जुड़े हिंदूवादी संगठनों के 13 लोग आरोपी थे। जिनमें स्वामी असीमानंद, देवेंद्र गुप्ता, चंद्रशेखर लेवे, मुकेश वासनानी, लोकेश शर्मा, हर्षद भारत, मोहन रातिश्वर, संदीप डांगे, रामचंद कलसारा, भवेश पटेल, सुरेश नायर और मेहुल शामिल थे।
11 अक्टूबर 2007 को हुए थे ब्लास्ट 
बता दें कि अजमेर दरगाह में 11 अक्टूबर 2007 को हुए धमाके में तीन लोगों की मौत हुई थी और 15 लोग घायल हुए थे। इस मामले में कुल 184 लोगों के बयान दर्ज किए गए थे। जिसमें से 26 महत्वपूर्ण गवाह अपने बयान से मुकर गए थे। जिनमें एक मंत्री भी शामिल हैं।

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