शर्मिष्ठा चौधरी और भांगड़ आंदोलन के कार्यकर्ताओं को तुरंत रिहा करो

** शर्मिष्ठा चौधरी और भांगड़ आंदोलन के कार्यकर्ताओं को तुरंत रिहा करो
* आंदोलनकारियों के खिलाफ दर्ज किये सभी झूठे इल्जाम वापस लो
* भांगड़वासियों के जमीन पर अधिकार सुनिश्चित करने में उनका साथ दो
* किसानों की जमीन की सुरक्षा करो! मतभेद रखने के अधिकार की सुरक्षा करो!
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साथियो,
तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व की सरकार और पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया द्वारा भांगड़, दक्षिण 24 परगना के लोगों पर जारी निष्ठुर दमन के खिलाफ एकजुट हों। 2013 के भूमि अधिग्रहण अधिनियम के पारित होने के मात्र एक दिन पहले पश्चिम बंगाल की सरकार ने 1894 का कानून इस्तेमाल करके जबरदस्ती से साढ़े तेरह एकड़ जमीन हथियाकर पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया को सौंप दी जिसने आन्दोलन और कोर्ट केसों के बावजूद वहां अपना काम शुरू कर दिया।

पिछले साल के मध्य में कम्पनी ने लोगों से सहमति लिए बगैर खेतों के बीच टावर खड़े करने शुरू किये जिससे लोगों का गुस्सा और भी तेज हो गया। गरीब किसानों के हजारों परिवार, जिनमें अधिकांश औरतें थीं, अपनी जमीन और आजीविका को बचाने के लिए एकजुट हुए। नूरजहां, निलोफर, छपिया के साथ-साथ तीन युवकों को भी तीन महीनों के लिए जेल में डाल दिया गया। ऊपर से राज्य शासन ने यूएपीए, एमपीए और पीडीपीए जैसे निष्ठुर कानून भी इन संघर्षरत लोगों पर थोप दिए। लोगों ने अपना शांतिपूर्ण विरोध जारी रखा और हर स्तर पर ज्ञापन दिए और विरोध प्रकट करने के लोकतांत्रिक तरीकों पर टिके रहे। पर राज्य सरकार और कंपनी ने अपना दमन जारी रखा। लोगों ने साथ आकर जोमी, जीबिका बस्तुतंत्र ओ परिवेश रक्षा कमेटी (जमीन, आजीविका, जैव विविधता और पर्यावरण सुरक्षा समिति) का गठन किया।

आपको तो अच्छे से मालूम है ही कि 3 नवम्बर 2016 से कमेटी और उसके नित नए कोलकाता और अन्य स्थानों से जुड़ने वाले समर्थक तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार और कंपनी के निशाने पर हैं। हर बार हमें यह याद दिलाना पड़ता है कि यह वही सरकार है जो नंदीग्राम और सिंगूर के संघर्षरत छोटे किसानों और भूमिहीन मजदूरों की हिमायती होने का दिखावा करके लोगों का वोट पाकर सत्ता में आयी है।

 एक अरसे से हम यह देखते आ रहे हैं कि जो भी दल लोगों के वोट लेकर सरकार बनाता है वह संघर्षरत लोगों से मुंह मोड़ लेता है। पर तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व की सरकार ने तो भांगड़ के आन्दोलन को दबाने की हैवानियत में सबको पछाड़कर लोकतंत्र नष्ट करने का नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया।

यौनिक हिंसा और राजकीय दमन के विरुद्ध औरतें (डब्ल्यूएसएस) उनके साथ खड़ी है जो जमीन और उसके जरिये अपने आजीविका के हक की मांग कर रहे हैं! जो लोग कंपनियों के विरुद्ध संघर्ष में उनका साथ निभा रहे हैं! जो जिला अधिकारियों और राज्य सरकार से वार्ता करना चाहते हैं! और जो बहुराष्ट्रीय और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के बारे में सवाल उठा रहे हैं। भांगड़ के लोगों जैसे डब्ल्यूएसएस का भी यही मानना है कि विकास के किसी भी मॉडल के केंद्र में आम जनता होना चाहिए! हमें एक क्षण के लिए भी यह नहीं भूलना चाहिए कि इस अत्यंत गरीब और मुख्यतया खेतिहर इलाके में जमीन ही अधिकांश लोगों के लिए उत्पादन का साधन है।

छोटे किसान एक आत्मनिर्भर तबका हैं जो आज कड़ी मुश्किलें झेल कर उत्पादन कर रहे हैं जहाँ नीतिगत बदलाव कृषि क्षेत्र को कुचलकर करोड़ों किसान परिवारों का जीवन बर्बाद कर रहे हैं। जमीन की लूट के चलते इन छोटे किसानों की स्वतंत्रता खत्म हो रही है और जमीन पारिस्थितिकी विनाश के घोर अन्धकार में पहुँच रही है। जबरन जमीन लिए जाने का विरोध करके भांगड़ के लोग शीर्ष से लादी जाने वाली विकास व्यवस्था के विरोध को भी मूर्त रूप दे रहे हैं जिसके चलते लोगों का अलगाव और त्रासदी बढ़ रही है। जमीन की लूट का विरोध करके भांगड़ के लोग जैव विविधता और पर्यावरण की रक्षा इस धरती पर कर रहे हैं जहाँ हम सभी रहते हैं। उनका संघर्ष हम सब ऐसे लोगों का संघर्ष है जो एक निरामय समाज धरती चाहते हैं।

हमारी मांगे हैं:
शर्मिष्ठा चौधरी व उनके साथ गिरफ्तार किये गए पंद्रह लोगों को तुरंत रिहा किया जाये।
17 जनवरी को मारे गए मोफिजुल खान और अलमगीर मुल्ला के कत्ल की निष्‍पक्ष  सीबीआई जांच कराई जाये।
भांगड़ में लगायी गयी इमरजेंसी जैसी परिस्थिति को बदला जाये और वहां पर आर्थिक गतिविधि पर लगी अनकही रोक हटाई जाये। निवासियों को हरदम परेशान न किया जाये।
भांगड़ के लोगों के साथ जिलाधिकारी वार्ता करें।
यूएपीए, एमपीए और पीडीपीए जैसे निष्ठुर कानून रद्द हों।
भांगड़ और समीप के इलाकों में राजनैतिक कार्यकर्ताओं को धमकाना और परेशान करना रोका जाये।

धमकियों, लाठी करफ्यू और गिरफ्तारियों से लोगों के इरादों को नहीं दबाया जा सकता
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