राक्षस आक्रमण कर रहे हैं तो तुम भी कुछ ‘करो-ना करो-ना, गो कोरोना”

लेखक मोहम्मद नोमान का व्यंग्य

आज से सौ साल बाद टीचर बच्चों को पढ़ा रही होगी।

कोरोना भारत का बहुत ही लोकप्रिय पर्व है। ये पूरे भारत वर्ष में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ से मनाया जाता है। इस दिन हम भारत वासी रात नाै बजे, नाै मिनट के लिए अपने घरों में ख़ुद से ही अँधेरा कर लेते हैं, फिर थालियां और अपने घरों के दूसरे बर्तन पीटते हैं, फिर दीप जला कर उजाला करते, पटाख़े फोड़ते और जगह-जगह आग लगाते हैं।

कोरोना सच पर हुई झूठ की जीत के लिए मनाया जाता है।
आज से लगभग सौ वर्ष पूर्व राक्षसो की बड़ी सेना ने राज्य पर हमला किया। भारत पर बड़ी विपदा आई। राक्षसो की एक बड़ी सेना लगातार राज्य की प्रजा पर हमला कर रही थी और मानव को दानव में बदल रही थी। तब उस समय के बड़े बड़े ऋषि मुनि (जो ज़्यादातर रेप के केस में अंदर थे)
और दवाइयों का कारोबार करने वाले बड़े धांसू संत अपनी कुटियों में दुबक गए थे। चारो तरफ़ असुरो का राज हो गया और मौत का तांडव था।

राज्य की प्रजा बेहाल थी, अन्न ख़त्म हो गया था, भुखमरी शुरू हो गई थी। किंतु कहीं कोई हल नहीं था। पूरब पश्चिम, उत्तर, दक्षिण, चन्द्रमा-सूर्य, पृथ्वी आकाश हर दिशा हर चीज़ राक्षसो के प्रकोप में थी। कहीं कोई उम्मीद की किरण नहीं थी…. राज्य के साथ साथ सारा संसार अपने अंत के निकट था।

और तब उस समय दीन हीन मजबूर असहाय प्रजा की पुकार को सुना हिमालय की गोद मे बैठे ‘फ़क़ीर संयासी राजा नरेंद्र दामोदर दास मोदी मगरमच्छ वालो ‘ ने जो वहाँ पर पिछले अनगिनत वर्षो से, हिमालय के भी बहुत पहले से ध्यान के एक फ़ोटोसेशन मे लीन थे (नज़र का चश्मा लगा कर)। बताया जाता है वो देवताओं के लिए अपने हाथ की चाय लेकर गए थे। घर के नौकर से बनवा कर…

प्रजा की पुकार पर माननीय ने आँख बंद करे-करे किंतु चश्मा पहने-पहने कहा कि पहले वो योगा करेंगें फिर पाँच किताबे एक साथ पढ़ेंगे फिर लैपटॉप पर कुछ डेटा बर्बाद कर के फिर बतख़ के साथ खेलेंगे और फिर वो कुछ बताएंगे।

किंतु जनता बेहाल थी। तब माननीय ने अपनी आँख खोली और तेज में आते हुए कहा….. राक्षस आक्रमण कर रहे हैं तो तुम भी कुछ ‘करो-ना करो-ना, गो कोरोना”

‘रात नौ बजे नौ मिनट’ अगर राक्षस आक्रमण कर रहे हैं, तो तुम भी ग़दर काट दो” और बता दो कि तुम मेरे लिए आपदा नहीं मौक़ा हो। मौत को उत्सव में बदल दो भक्तों, सॉलिडैरिटी के नाम पर, हम सॉलिडैरिटी कहेंगे पर तुम उत्सव ही समझना।

बस इस प्रकार हमेशा की तरह माननीय ने सच को झूठ की चादर से ढाँप दिया और उस पर जीत का परचम लहरा दिया।

और तब से हम इस कोरोना पर्व को बड़े ही धूमधाम से मना रहे हैं। और हाँ, हमारे सभी त्योहारों की तरह ये वाला भी त्योहार बहुत ही प्रेम और सद्भावना से जुडा़ त्योहार है।

गो कोरोना गो

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