लॉक डाउन के दौरान सरकार की राशन वितरण प्रणाली में हैं कई खामियां

बिलासपुर। लॉकडाउन के कारण प्रदेश के लाखों परिवारों के सामने भोजन की समस्या खड़ी हो गई है। ये गरीब परिवार दाने-दाने को मोहताज हो गए हैं।

छत्तीसगढ़ में राशन कार्ड से तीन महीने का मुफ्त राशन देने की योजना एक तो बहुत देर से शुरू हुई उस पर भी ये सविधा हर गरीब को नहीं मिल रही है।

राशन मुहैय्या कराने वाली सरकारी योजना में कई खामियां हैं, जैसे
1 – राशन दुकानें बहुत देर से खुलीं

2 – बहुत से परिवार ऐसे हैं जिनके पास राशन कार्ड नहीं है

3 – बहुत से लोगों के पास राशन कार्ड उनके गांव का है, पर कमाने खाने के लिए वो रहते किसी दूसरी जगह पर हैं। यहां उनका गांव वाला राशन कार्ड नहीं चलता है।

4 – एक परिवार के लिए एक ही राशन कार्ड होता है। ऐसे कुछ युवा कामगार भी हैं जो अपने परिवार से अलग रहते हैं। उन्हें राशन कैसे मिलेगा।

5 – बहुत से परिवारों का राशन कार्ड रिन्यू नहीं हुआ है।

6 – जिनके पास राशन कार्ड नहीं है उन्हें आधार कार्ड से राशन देने की बात नगर निगम ने कही है। इन्हें राशन दुकान से नहीं, नगर निगम द्वारा बनाए जोन सेंटर से राशन देने की बात कही गई है। लेकिन इस प्रक्रिया के लिए कोई व्यवस्थित प्रारूप या ढांचा नहीं बनाया गया है।

आधार कार्ड से मिलने वाला राशन किस जगह पर मिलेगा, इसके लिए लोग किस्से संपर्क करें, कितना राशन मिलेगा आदि किसी भी प्रकार की जानकारी आम जानता को नहीं दी गई है।

Cgbasket की टीम को ऐसे ढेरों लोग मिले जो आधार कार्ड लेकर भटक रहे हैं पर उन्हें लॉक डाउन के 14 दिन बीत जाने के बाद अब तक कोई सरकारी सहायता नहीं मिली है।

अपने अपने इलाकों में काम रही सामाजिक संस्थाएं, समूहों आदि द्वारा राशन और खाने की जो सेवा लोगों तक पहुंचाई जा रही है लोग उसी के सहारे है अपना पेट भर रहे हैं।

राशन मुहैय्या कराने की सरकारी योजना में बड़ी बड़ी घोषणाएं मात्र सुनाई देती हैं। ज़मीन पर प्रशासन और अधिकारी इस काम के लिए इतने गंभीर नजर नहीं आ रहे जितना उन्हें ऐसी परिस्थितियों में होना चाहिए।

मानव अधिकार कार्यकर्ता अधिवक्ता प्रियंका शुक्ला ने आज अपनी फ़ेसबुक वॉल पर ऐसी ही एक गरीब जरूरतमंद महिला का वीडियो शेयर किया है।

https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=1383870685149149&id=100005786912489

उन्होंने लिखा है कि “ये वीडियो लगभग 5 दिन पहले का है, इनका इंतजाम हो गया है, जरूरत लगेगी तो और बताएंगे बोली है। ऐसे ही इनके पास के दो और परिवार की दिक्कत भी है, उनका भी राशन पहुँचा दिया है हमने, पर सवाल है….
जवाब कौन देगा, मोदी ने तो बंटा धार कर ही दिया पर राज्य की सरकार और उनके अधिकारियों पर बहुत से प्रश्न है।”

प्रियंका शुक्ला ने लिखा है कि ये महिला बिलासपुर की हैं, इनका नाम राजकुमारी यादव है, तालपारा के पास रहती हैं। ये घर घर जाकर काम करती हैं, तब इनका घर चल पाता है। पति है नही और साथ मे बूढ़ी माँ है, जिनकी जिम्मेदारी भी इन्ही पर है, सरकारी कोई मदद इनको नही मिली थी, इन्होंने एक वीडियो बनाकर साथी रिजवाना के माध्यम से अपनी बात हम तक पहुचाई, राशन पहुँच गया है।

सामाजिक संगठनों के लोगों का आरोप है कि “ऐसी स्थिति को उजागर करने वालों पर प्रशासन उल्टे आरोप लगा देता है, उनकी सहायता बिल्कुल नहीं करता। वस्तुस्थिति उजागर करने वालों प्रशासन झूठा प्रचार करने का आरोप लगा देता है”

प्रियंका शुक्ला कहती हैं “जो बोलना है बोलिये, पर बदले में जो सवाल है उसका जवाब भी दीजिए कि बड़ी तादात में जिनके पास राशनकार्ड नही होगा, उनको आप राशन क्यों नही दे पा रहे हैं?”

“यदि दे रहे हैं, तो ये बताने का और इन तक पहुँचने का काम किसका है? जब जब हम हल्ला करेंगे, क्या तभी तभी काम होगा?”

CG Basket

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

बिलासपुर : लॉकडाउन में ड्यूटी कर रहे सफ़ाई कर्मियों का पुलिस ने किया उत्साहवर्धन, तालियां बजाईं, फूल बरसाए

Sun Apr 5 , 2020
Share on Facebook Tweet it Share on Google Pin it Share it Email समूचा वैश्विक समुदाय आज कोरोना वाइरस संक्रमण […]

You May Like