दिल्ली हिंसा पर सामाजिक संगठनों की आंखो देखि रिपोर्ट

नागरिक में प्रकाशित रिपोर्ट

गांधीवादी कार्यकर्ता हिमांशु कुमार, वर्कर्स यूनिटी यू-ट्यूब चैनल के खालिद खान, विशाल और इंक़लाबी मजदूर केन्द्र के श्यामवीर, पछास के दीपक सहित कई अन्य संगठनों व स्वयं सेवी संस्थाओं के कार्यकर्ताओं ने दिनांक 27, 28 व 29 फरवरी को दिल्ली के हिंसाग्रस्त इलाकों में पहुंचकर प्रभावित लोगों का दर्द बांटने, ज़रूरी इमदाद बांटने और हिंसा का जायजा लेने का प्रयास किया। इनके अनुभव को हम यहां साझा कर रहे हैं।

दंगा ग्रस्त दिल्ली के जाफराबाद, चांदबाग, खजूरीखास व यमुनाविहार में घूमने तथा वहां के साथियों से बात करने के बाद हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि यहां दंगा नहीं हुआ। जो हुआ वह पुलिस के सहयोग से संगठित संघी गुंडा गिरोह का हमला था। हमलावर बाहर के थे। सभी मुस्लिम बहुल इलाके में रहने वाले हिन्दू परिवार निडरता और भरोसे से रह रहे हैं, इनका किसी तरह का कोई नुकसान न हो इसके लिये दिन-रात पहरा दिया गया। मुस्लिम महिलाओं ने मानव श्रृंखला बनाकर एक मंदिर को बचाया। हिन्दू इलाके में भी इसी तरह की घटना सुनने को मिली। मुस्लिम समुदाय की तरफ से केवल रक्षात्मक बचाव किया गया। पुलिस और संघी गुंडे एक हो चुके थे और निर्लज्जता की सारी हदें पार कर गए थे। यहां तक कि ड्रेसें भी एक-दूसरे की पहन रहे। शिव विहार मोहल्ले में मुस्लिम समुदाय के घर जला दिए गए लेकिन हिन्दू पड़ोसियों ने उन्हें जान पर खेलकर छिपाया और सुरक्षित निकालने में मदद दी। मुस्लिम मोहल्लों में एक भी हिन्दू और मंदिरों को आंच नहीं आई।

आज हम खजूरी करावल नगर और चांद आपके इलाके में घूमेआज एक दुर्गा मंदिर में भी गएइस मंदिर को नुकसान पहुंचाने जब दंगाइयों की भीड़ आईतो बराबर की गली में आसपास रहने वाले मुस्लिम समुदाय के लोग मंदिर को बचाने के लिए सामने आ गएखासतौर से मुस्लिम लड़कियों ने हाथ से हाथ पकड़ कर एक जंजीर बनाई और मंदिर के चारों तरफ खड़े हो गए और दंगाइयों से कहा कि मंदिर को नुकसान पहुंचाने से पहले हमारे ऊपर हमला करोदंगाई चले गएनीचे वीडियो देखिए

Posted by Himanshu Kumar on Friday, February 28, 2020

चंदुनगर में नावेद नाम के एक लड़के से बात हुई, उसकी शेरपुर चौक पर मेडिकल और कम्युनिकेशन की दुकान थी। उन्होंने बताया कि उनके कुछ जानने वालों ने उन्हें बता दिया था कि माहौल खराब है, समय से घर चले जाना। उसके मुताबिक 3-4 ट्रक से कुछ लोग आए, उन्होंने अपनी पीठ पर बैग लटका रखे थे, आते ही उन लोगो ने CAA के समर्थन में नारे लगाने शुरू कर दिए। उसके थोड़ी देर बाद पथराव शुरू हो गया। वो दुकान बन्द करके भाग गया। उसकी दुकान को आग लगा दी गई, वो बस सड़क की दूसरी तरफ से देखता रहा। 

शिव विहार जाने का प्रोग्राम बना लेकिन तभी पता चला कि अल-हिन्द अस्पताल में घायल हुए लोगों को सबसे पहले लाया गया था। वहां एक सज्जन से बात हुई। उन्होंने बताया कि शिव विहार हिन्दू बहुल इलाका है, मुस्लिमों की आबादी बस 3000 है। वहां के मुस्लिमों को स्थानीय हिन्दू लोगों ने अपनी जान पर खेल कर बाहर निकाला और सुरक्षित इलाकों में पहुंचाया है। कुछ हिन्दू परिवारों को शिव विहार में अपने मुस्लिम पड़ोसी या दोस्तों की मदद करने के कारण देशद्रोही घोषित कर दिया गया, उन पर भी हमला हुआ, वो लोग भी अभी बाहर चले गए हैं। 

सबसे बड़ी बात जो निकल कर सामने आई वो ये कि स्थानीय लोगों ने एक-दूसरे की मदद की है। हमला करने वाली भीड़ बाहर से आयी थी और पुलिस अगर चाहती तो ये सब पहले ही रुक जाता, सबसे बड़ी भूमिका इसमें पुलिस की रही है। 

29 फरवरी को हम लोगों ने चांदबाग से सफर की शुरुआत की। भजनपुरा की मजार से होते हुए हम लोग आगे बढ़ते रहे, रास्ते में जली हुई दुकानों और जले हुए घर थे, कुछ लोग घरों के बाहर थे और पुलिस जगह-जगह तैनात थी। ताहिर हुसैन जो कि आम आदमी के पार्षद हैं और जिन पर आरोप लगाया गया है कि दंगों में उनका हाथ है। उनके वहां पर कुछ लोगों से बात हुई। एक हिन्दू महिला का होटल था उसमें आग लगा दी गई थी। महिला ने बताया कि भीड़ बहुत ज्यादा थी और वो किसी के भी काबू में नहीं थी बस तांडव कर रही थी। उस महिला ने एक पेड़ दिखाया जो कि सड़क पर था और बताया कि इस पेड़ को आप देखो कितने पत्थर और गोलियों के निशान हैं इस पर, उसने बताया कि ताहिर हुसैन के घर की छत पर बहुत सारे लोग थे और गोलियां और पत्थर चल रहे थे।

Posted by Himanshu Kumar on Thursday, February 27, 2020

इसके बाद आगे बढ़कर हम लोग खजुरी एक्स्टेन्शन की गली नंबर 4 में पहुंचे। इस गली में हिन्दू और मुस्लिम दोनों ही रहते हैं, गली के बाहर जला हुआ सामना पड़ा था। इमरान नाम के एक व्यक्ति ने बताया कि वो इस गली में किराए पर रहता है और उसका घर भी जल गया है, इस गली में सिर्फ मुस्लिम घरों को निशाना बनाया गया, हिन्दुओं के घर को कुछ भी नुकसान नहीं पहुंचा। अधिकतर लोग मजदूर और रोज कमाने वाले हैं, और सभी बिहार से हैं। बताया गया कि सबसे पहले आग मस्जिद में लगाई गई, उसके बाद घरों को निशाना बनाया गया, लोग बहुत मुश्किल से जान बचा कर भागे और अब सब कुछ तबाह हो गया है। सामान सब जल गया है। सरकार की तरफ से घोषणा हुई कि जिसका मकान जल गया है उसको मुआवजा मिलेगा। लेकिन जो किराए पर रह रहा था उसका क्या?

एक लड़के ने बताया कि उसके सभी कागज जल गए हैं, कोई पहचान का कागज नहीं है। कैसे साबित करेगा कि वो यहां का नागरिक है। हमलावर भीड़ में अधिकतर लोग बाहर के थे, लेकिन जिस तरह से मुस्लिम घरों को निशाना बनाया गया उससे लगता है कि या तो पहले रेकी की गई थी या स्थानीय तत्व भी शामिल थे।

चंदू नगर में लोगों ने बताया कि भीड़ ने यहां पर हमला करना चाहा था तो गली में रहने वाले हिन्दू लोग आगे आए और उन्होंने भीड़ को भगाया, सभी लोगों ने मिल-जुल कर इस मुसीबत में साथ दिया। चन्दु नगर में भी मुस्लिम आबादी ज्यादा है। अधिकतर लोग यहां बेल्ट बनाने का काम करते हैं, उसकी वजह से उनके काम पर असर हुआ है। वो सप्लाई नहीं दे पा रहे हैं, आगे उसी गली में 3 हिन्दू परिवार रहते हैं, उनसे बात हुई वो लोग बिल्कुल सुरक्षित हैं, स्थानीय लोगों ने बताया कि इन्हें कोई दिक्कत नहीं आने दी जाएगी क्योंकि अगर इन पर कोई दिक्कत आती है तो लानत है हम पर। 

मेट्रो की रेड लाइन में वेलकम मेट्रो स्टेशन से जाफराबाद व मौजपुर की तरफ जाने वाली मेट्रो लाइन रोक दी गयी है। इसलिए हम सीलमपुर मेट्रो स्टेशन में पहुंचे और पैदल ही आगे बढ़ते गये। जाफराबाद की तरफ जाने वाले मार्ग में बैरीकेड लगा था और वहां कुछ पत्रकार खड़े थे। जो वहां से जाने वालों से बात कर रहे थे। 

कई लोग वहां से हाथों में बैग लिये जा रहे थे, उनसे बात की तो पता चला कि वह सभी अपने-अपने घर जा रहे थे। उन्होंने बताया कि यहां का माहौल ठीक नहीं है। इसलिए घर जा रहे हैं। ये लोग मुरादाबाद, अमरोहा के रहने वाले हैं। कुछ काम नहीं है। माहौल ठीक नहीं है। इसलिए कई कामगार इलाका छोड़कर मजबूरी में अपने गांव जा रहे हैं। 

हम आगे बढ़े तो सड़क के किनारे एक प्रदर्शनकारियों का पंडाल मिला। इस समय (लगभग 2 बजे) यहां 40-50 महिलायें व 40 के करीब पुरुष और कई बच्चे थे। हमने अपना परिचय दिया और बात की तो शबाब अली और कई लोगों से हमारी बातचीत हुई। 

पहले हमें पानी पिलाया गया। खाने के लिए पूछा। हमने खाने के लिए मना किया और बात जारी रखी। तब लोगों ने हमें बताया कि वे यहां    सी ए ए, एन आर सी व एन पी आर के विरोध में 15 जनवरी से धरने पर बैठे हैं। धरना दिन-रात चल रहा है। एक महीने से ऊपर हो गया अभी तक कोई भी घटना नहीं हुई। पर जब से भाजपा के विधायक प्रत्याशी कपिल मिश्रा ने मौजपुर चौक पर आकर बयानबाजी की है तब से तनाव बढ़ गया है। मौजपुर के आस-पास के इलाकों में चांदबाग व नुरेलाई में तनाव चरम पर है। 

हम बता दें कि भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने कहा कि हम दिल्ली पुलिस को जाफराबाद और चांदबाग की सड़कें खाली करने के लिए तीन दिन का समय देते हैं। ट्रम्प के जाने के बाद भी ये खाली नहीं हुईं तो हम खाली करायेंगे। उस समय पुलिस के डीएसपी अमित शर्मा मौजूद थे। 

महिलाओं ने बताया कि कपिल मिश्रा के साथ एक महिला भी थी। उसने भी इसी तरह की बातें कही थीं। अब कई घरों में आग लगा दी गयी है। कई मौतें हो चुकी हैं। करदपुर की मस्जिद में आग लगा दी गयी है। और साथ ही पेट्रोल पम्प पर आग लगा दी गयी है। लोगों के नाम पूछकर कपड़े उतार कर देखकर पीटा जा रहा है। गोलियां चल रही हैं। इन्होंने हमें बताया अब तक एक पुलिसकर्मी सहित सात लोगों की मौत हो चुकी है। 

हम आगे बढ़ ही रहे थे कि लोगों ने हमसे कहा ये आर एस एस के लोग उपद्रव फैला रहे हैं। इन्होंने बाहर से लोगों को बुलाकर ये कराया है। सी ए ए के विरोध को हिन्दू-मुस्लिम का झगड़ा बनाया जा रहा है। यह बात स्थानीय हिन्दू समुदाय के लोगों ने भी बताई। कहा हम सब अमन-चैन चाहते हैं। हमारा प्रदर्शन तो शांतिपूवर्क चल रहा है। 

आगे चलते-चलते हम जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के नीचे चल रहे प्रदर्शन में पहुंचे। वहां दरी में लगभग 250-300 महिलायें बैठी थीं। सामने तख्त डाल कर मंच बना रखा था जिसमें एक कुर्सी में भगत सिंह की तस्वीर रखी हुई थी और शाहीन बाग से कम, पर कुछ बैनर लगा रखे थे। मंच व महिलाओं के बैठने की जगह को रस्सी से घेरा हुआ था। ये सब सड़क के एक तरफ ही चल रहा था। दूसरी तरफ सड़क पूरी तरह खाली थी। मंच में महिलायें ही गीत गा रही थीं और बात रख रही थीं। 

हमने कुछ लोगों से बात की जैसे मोहम्मद शादाब व एम.डी.चौधरी, देवंगना और नूरी से। उन्होंने बताया कि कपिल मिश्रा के बयान के बाद उपद्रवी भीड़ ने मौजपुर, चांदबाग व नुरेलई पर चल रहे प्रदर्शनों को और प्रदर्शनकारियों को उठा दिया। पूरी खुली गुण्डागर्दी करके। महिलाओं पर पत्थर फेंके गये। पेट्रोल बम फेंके गये। रात में काम से लौट रहे मजदूरों व कामगारों पर गोलियां चलाई गयीं जिसमें हिन्दू-मुस्लिम समुदाय दोनों के कई लोगों को गोली लगी। गोली जाति-धर्म पूछकर नहीं लगती है। घायल लोगों को स्थानीय लोगों ने अस्पताल पहुंचाया। 

लोगों ने यह भी बताया कि ये दंगाई लोग स्थानीय लोग नहीं हैं। ये आर एस एस द्वारा बाहर से बुलाये गये हैं जिनके साथ पुलिस भी खड़ी है। पुलिस इन दंगाईयों के साथ है और पुलिस भी दंगा कर रही है। पुलिस को पत्थर चलाते हुए देखा जा सकता है। 

जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के नीचे चल रहे प्रदर्शन में हम कई लोगों से मिले जो दो रातों से सोए नहीं हैं क्योंकि तनाव बहुत ज्यादा है। जब हम और आगे जाने को हुए तो प्रदर्शनकारियों ने रोका आप लोग आगे मत जाइये। माहौल ठीक नहीं है। 

जब हम आगे बढ़े तो 200-250 मीटर ही गये होंगे तो देखा लगभग 400-450 नौजवानों की भीड़ थी। अलग-अलग टोलियों में या आपस में बात करते हुए। उनसे बात की तो बताया कि उधर बेरीकेड के दूसरी तरफ आर एस एस के कुछ लोग हल्ला कर रहे हैं। जब हम और पास गये और सड़क के बीच में लगी ग्रिल में चढ़े तो देखा कि बेरीकेड है। इस तरफ ये नौजवान हैं और दूसरी तरफ पुलिस के जवान अपनी तैयारी के साथ खड़े हैं। और ज्यादा से ज्यादा भी होंगे तो 80-85 नौजवान खड़े हैं। जो बेरीकेड पर आना चाहते हैं और खूब हो-हल्ला और तनाव का माहौल है। 

हमने देखा कि सी ए ए के विरोध के प्रदर्शनकारी अपने नौजवानों और बच्चों को शांति बनाये रखने के लिए लगातार समझा रहे हैं। पास में ही मस्जिद के माइक से समझाया जा रहा है कि हमें पुलिस से या किसी से नहीं उलझना है। शांति बनाये रखें और तरह-तरह से समझाया जा रहा है। हमने बेरीकेड के पास के नौजवान से बात की तो उसने कहा कि हम अपनी और अपनी मां, बहन-बेटी की सुरक्षा के लिए यहां खड़े हैं। किसी से उलझने के लिए नहीं। 

जब हमने और आगे जाना चाहा तो लोगां ने हमें रोका और अब तो हमें भी आगे जाने में अजीब सा लग रहा था। हमें ही नहीं हमने और भी पत्रकारों और चैनलों वालों को भी इसी स्थिति में पाया। तभी एक महिला पत्रकार शिकायत करते हुए कहने लगी कि जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के नीचे प्रदर्शन कर रहे लोग रिकार्डिंग नहीं करने दे रहे हैं, यह ठीक नहीं है। हमने कहा कि आप दूसरी तरफ गये हो क्या। पत्रकार बोली कि वहां तो बवाल हो रहा है। परेशान किया जा रहा है। सारा सामान चैक किया जा रहा है। हमने कहा कि क्या आप के साथ यहां कुछ ऐसा हुआ तो वह बोली, ‘‘नहीं’’। 

समझने की बात है कि ये 80-85 लोग इतनी भीड़ के सामने कैसे हमला कर सकते हैं? साफ-साफ समझा जा सकता है कि पुलिस के साथ के बगैर ऐसा नहीं हो सकता है। पुलिस को चाहिए था कि वह तनाव कम करने के लिए इन नौजवानों को यहां से हटाये पर पुलिस ऐसा नहीं कर रही है। बल्कि ऐसे ही कितने लोगों को खुला छोड़ रखा है उन्होंने उपद्रव मचाने के लिए। 

दो दिन से ये उपद्रवी उपद्रव मचाते हुए नुरेलाई, चांदबाग व मौजपुर का विरोध प्रदर्शन हटवा चुके हैं। अब जाफराबाद की बारी है। भाजपा ये ही चाहती है। 

पहले भाजपा व आर एस एस से जुड़े कई संगठनों ने शाहीन बाग में ऐसा ही करने की कोशिशें कीं पर उनकी कोशिशें परवान नहीं चढ़ीं। और पुलिस दमन व सुप्रीम कोर्ट की तरफ से भी जब वह शाहीनबाग को नहीं हटा पाये तो अब इन्होंने ये घृणित चाल चली। जनता के एक हिस्से को जनता के दूसरे हिस्से से भिड़ाने का षड्यंत्र चला। क्योंकि ये एक हिस्सा इन्हीं का तैयार किया हुआ है। प्रशिक्षित है। ये स्थानीय या आम जनता नहीं है। और इस हिस्से या भीड़ को गृहमंत्री की तरफ से पुलिस का पूरा साथ है। इसलिए ये नंगा नाच कर रहे हैं। ये संदेश देना चाहते हैं कि प्रदर्शन खत्म कर दो, वरना मार दिये जाओगे। जब सुप्रीम कोर्ट की तरफ से भी प्रदर्शनों को नहीं हटा पाये तो खुली गुण्डागर्दी कर पुलिस से भी उपद्रव मचा कर सरकार प्रदर्शनकारियों के दिल-दिमागों में डर भरना चाहती है। 

पर सरकारें यह भूल जाती हैं कि दमन से मामला हल नहीं होता, समय आने पर बढ़ता ही है। ये चिंगारी अब बढ़ेगी न कि घटेगी। बल्कि जैसे-जैसे ये चिंगारी बढ़ती जा रही है। वैसे-वैसे मोदी सरकार का फासीवादी चेहरा सामने आता जा रहा है। जो लोग अभी तक नहीं समझ रहे हैं वो भी अब समझेंगे। सोचिए कि अगर स्थानीय हिन्दू आबादी इनके साथ होती या ये उपद्रवी स्थानीय लोग होते तो क्या इतना ही बवाल मचता, नहीं उलटा है। स्थानीय लोग इनके साथ नहीं हैं। ये बस में भरकर बाहर से लाये गये आर एस एस के प्रशिक्षित कार्यकर्ता व कुछ भाड़े के लोग हैं। 

हालांकि अब ये कार्यकर्ता और भीड़ स्थानीय लोगों के दिल-दिमाग में जहर घोल रहे हैं। या डर बैठा रहे हैं कि आप हमारे साथ आयें, आप की सुरक्षा हमारे साथ ही है। और ये काम पुलिस को साथ लेकर किया जा रहा है ताकि अपने साथ करने के लिए पुलिस का डर भी दिखाया जा सके। 

बाद में जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के नीचे चल रहे प्रदर्शन को पुलिस ने लाठी चार्ज कर उठा दिया है। उपद्रवी भी साथ में थे। और जो पहले सड़क के किनारे प्रदर्शन चल रहा है उसको भी उठाने के लिए पुलिस दबाव बना रही है। जाफराबाद, मौजपुर, चांदबाग में कर्फ्यू लगा दिया गया है।

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