ऑस्ट्रेलिया : तानाशाही के ख़िलाफ़ सभी अखबारों ने आज पहला पन्ना काला छपा है

सोमवार की सुबह ऑस्ट्रेलिया के अखबारों ने एक अभूतपूर्व घटना को अंजाम दिया. देश के सभी अखबारों ने एकजुटता दिखाते हुए पहले पन्ने के सभी अक्षरों को काली स्याही से पोत दिया और एक लाल मुहर चस्पा कर दी जिस पर लिखा है “सीक्रेट”

ऑस्ट्रेलिया की सरकार द्वारा मीडिया की आज़ादी पर लगाम लगाने की कोशिशों का विरोध करते हुए ये कदम उठाया गया है.

ऑस्ट्रेलिया का एक बड़ा मीडिया समूह है ऑस्ट्रेलियन ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन (एबीसी). व्हिसलब्लोअर्स से मिली जानकारियों के आधार पर इस मीडिया समूह ने कुछ रिपोर्ट्स प्रखाषित कीं जिसके बाद इसी साल जून में मीडिया समूह के मुख्यालय पर और यहां के एक पत्रकार के घर पर सरकार ने छापेमारी की कार्रवाई की थी.

इनमें एक रिपोर्ट में युद्ध अपराध के आरोप लगाए गए थे जबकि एक अन्य रिपोर्ट में एक सरकारी एजेंसी पर ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों की जासूसी का आरोप लगाया गया था.

द सिडनी मॉर्निंग हेराल्ड ने इस बारे में लिखा है “On June 4, police conducted a six-hour raid on the home of News Corp political journalist Annika Smethurst over an April 2018 story. The story had revealed a proposal for electronic intelligence agency the Australian Signals Directorate to take on an expanded domestic role and that figures inside government were concerned about the idea”.

On June 5, as part of a separate leak investigation, police raided the Sydney headquarters of the ABC over a 2017 series on accusations of war crimes committed by Australia’s special forces in Afghanistan. The warrant named multiple ABC journalists responsible for the reporting. A week earlier, a former military lawyer was committed to stand trial over the leak of documents to the ABC.

अख़बारों का कहना है कि ऑस्ट्रेलिया सरकार का सख़्त क़ानून उन्हें लोगों तक जानकारियाँ पहुंचने से रोक रहा है. इसी का विरोध करते हुए ऑस्ट्रेलिया के अखबारों ने कमाल की एकजुटता दिखाई और सरकार की तानाशाही के ख़िलाफ़ अभियान छेड़ दिया है. कई टीवी मीडिया समूह, रेडियो और ऑनलाइन मीडिया समूह भी इस अभियान में उनके साथ आ गए हैं.

पिछले दो दशकों में ऑस्ट्रेलियन सरकार ने कई ऐसे सख्त कानून लागू किए हैं जिससे खोजी पत्रकारिता पर अंकुश लग गया है.

ये अभियान चलाने वालों का कहना है कि पिछले दो दशकों में ऑस्ट्रेलिया में ऐसे सख़्त सुरक्षा क़ानून लाए गए हैं जिससे खोजी पत्रकारिता को ख़तरा पहुँच रहा है. मीडिया समूहों पत्रकारों और व्हिसलब्लोअर्स को संवेदनशील मामलों की रिपोर्टिंग करने से रोका जा रहा है.

बीबीसी में प्रकाशित ख़बर के अनुसार ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने कहा कि प्रेस की आज़ादी महत्वपूर्ण है मगर क़ानून का राज क़ायम रहना चाहिए. तीन पत्रकारों के ख़िलाफ़ा अभियोग चलाए जाने की बात भी सरकार की तरफ़ से कही गई है.

न्यूज़ कॉर्प ऑस्ट्रेलिया के एग्ज़ेक्यूटिव चेयरमैन माईकल मिलर ने ट्विट किया है कि जब भी सरकार पत्रकारों पर रिपोर्टिंग करने के लिए कोई नया प्रतिबंध तो ऑस्ट्रेलिया के लोगों को सरकार से पूछना चाहिए: ‘वे हमसे क्या छिपाने की कोशिश कर रहे हैं?’

तानाशाही के ख़िलाफ़ अखबारों की एकजुटता

बीबीसी में प्रकाशित ख़बर के अनुसार न्यूज़ कॉर्प के मुख्य प्रतिद्वंद्वी- नाइन – ने भी अपने अख़बारों ‘सिडनी मॉर्निंग हेरल्ड’ और ‘द एज’ के मुख पृष्ठ काले छापे.

एबीसी के एमडी डेविड एंडरसन ने कहा, “ऑस्ट्रेलिया में दुनिया का सबसे गोपनीय लोकतंत्र बनने का ख़तरा बन रहा है”.

Anuj Shrivastava

Leave a Reply

Next Post

राज्यपाल बोलीं- भोलेपन की वजह से आदिवासी हुए शोषण के शिकार

Mon Oct 21 , 2019
पत्रिका न्यूज़ रायपुर / बिलासपुर . आदिवासी समाज की प्रकृति सरलता , स्वाभिमान और भोलापन है । इसी प्रकृति के […]

You May Like