टोनही प्रताड़ना : आमरण अनशन पर बैठी महिला, तबियत बिगड़ी सिम्स में भर्ती

बिलासपुर :  तोरवा क्षेत्र में रहने वाली कशिश माखीजा को उसके ससुराल वाले टोनही और डायन कहकर पिछले एक साल से प्रताड़ित कर रहे हैं. परेशान महिला सोमवार 14 अक्टूबर को शहर के नेहरु चौक पर आमरण अनशन पर बैठ गई आज तबियत ज़्यादा बिगड़ जाने के कारण उसे सिम्स हॉस्पिटल में भर्ती किया गया है.

फ़ोटो : रमा ब्रेकिंग न्यूज़ पोर्टल से साभार

ठेठ ग्रामीण इलाके से नहीं, शहर से लगे हुए तोरवा इलाके के एक पढ़े-लिखे परिवार की बहू कशिश माखीजा पिछले लगभग 36 घंटो से भूखी प्यासी न्याय की आस में आमरण अनशन पर बैठी हुई हैं. उसका आरोप है कि पति आकाश माखीजा, मामाससुर दिलीप निभानी एवं ससुराल के अन्य सदस्यों के द्वारा टोनही एवं डायन कहकर उसे प्रताड़ित किया जा रहा है.

पीड़ित महिला, दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रही हैं लेकिन पुलिस और ज़िला प्रशासन अब तक उदासीन है. पति आकाश माखीजा ने दुर्ग कुटुम्बं न्यायालय में विवाह शून्य करने की अर्ज़ी लगा रखी है. अनशन के दौरान बेहोश हो जाने के कारण कशिश को इलाज के लिए सिम्स हॉस्पिटल में भारती किया गया है.

सिन्धी समाज भी नहीं दे रहा साथ

सिन्धी समाज को चाहिए था कि ऐसे समय में वे पीड़ित महिला की सहायता करते और उसके साथ खड़े रहते. लेकिन बिलासपुर का सिन्धी समाज उलटे महिला को ही दोष दे रहा है. समाज के लोगों का कहना है कि उसके अनशन में बैठने के कारण समाज की बदनामी हो रही है इसलिए वो अनशन तोड़ दे.

न्याय मिलने तक करुँगी अनशन

अस्पताल में भर्ती कशिश माखीजा ने कहा है कि वे न्याय मिलने तक अपना अनशन जारी रखेंगीं. भले ही ये अनशन अस्पताल में करना पड़े या घर पर. कशिश ने कहा कि वो अपने ससुराल वालों से भयभीत है. उसे डर है कि धनबल के माध्यम से उसके ससुराल वाले उसे और उसके बच्चे प्रिंस को नुक्सान पंहुचा सकते हैं. आज कशिश की तरफ़ से प्रेसकॉन्फ्रेंस कर ये जानकारी मीडिया में दी गई.

छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में टोनही प्रताड़ना एक समय बहुत गंभीर समस्या होती थी. पर समय के साथ वैज्ञानिक चेतना बढ़ी और इन घटनाओं में कमी आई. लेकिन पिछल कुछ वर्षों में लगातार ये देखने को मिल रहा है कि समाज में वैज्ञानिक चेतना कम होती जा रही है, तार्किक विषयों पर इंसानी समझ भी गिरती जा रही है. चुने हुए नेता श्राप देने की बात करते हैं, महाभारत काल में इंटरनेट होने की बात करते हैं, राफ़ेल पर नारियल निम्बू चढ़ाते हैं और मंगलयान को भेजने से पहले अगरबत्ती दिखाते हैं. समाचार चैनल इन घटनाओं को महिमामंडित करते हैं और फिर समाज भी अपने स्तर इस स्वभाव को अपनाने लग जाता है.

21 वीं सदी में भी महिलाएं टोनही प्रताड़ना का शिकार हो रही हैं. हैरानी इस बात की है कि कथित रूप से शिक्षित वर्ग बहू को प्रताड़ित करने के लिए इन अंधविश्वासों का सहारा ले रहा है.

Anuj Shrivastava

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