300 ग्रामीणों ने किया जनसुनवाई का विरोध, बोले नही चाहिए कोयला खदान

अंबिका माइंस : कहा कृषि आजीविका का साधन, खदान खुलने पर विकराल हो जाएगी समस्या

12 लोगों ने मौखिक तौर पर दर्ज कराई आपत्ति ,

सात ने लिखित में कहा खदान मंजूर नहीं

पेसा एक्ट के उल्लंघन का लगाया आरोप

पत्रिका न्यूज नेटवर्क

कोरबा . अबिका ओपेन कॉस्ट कोयला खदान के लिए शुक्रवार को आयोजित पर्यावरणीय जनसुनवाई का ग्रामीणों ने विरोध किया । इससेहोने वाले नुकसान की ओर जिला प्रशासन और पर्यावरण संरक्षण मंडलकाध्यान आकृष्ट कराया एसईसीएल पर पेसा एक्ट के उल्लंघनका आरोप लगाया । जनसुनवाई में क्षेत्रीय विधायक भी ग्रामीणों के साथ खड़े नजर आए उन्होंने भी खदान नहीं खोलने का समर्थन किया विकासखंड पाली के ग्रामपंचायत करतली में एसईसीएल प्रबंधन अबिका ओपेन कॉस्ट कोयला खदान खोलने की योजना पर कार्य कर रहा है । इसके लिए शुक्रवार को ग्राम करतली के पूर्व माध्यमिक शाला परिसर में पर्यावरणीय जनसुनवाई का आयोजन किया गया । खदान के लिए कंपनी को लगभग 134 हेक्टेयर जमीन की जरूरत है । कंपनी खदान से सालाना एक मिलियन टन से 1 . 35 मिलियन टन कोयला खनन करना चाहती हैं । खदान को लेकर आयोजित पर्यावरणीय सनवाई में ग्रामीणों की राय जानने के लिए शुक्रवार को गांव में खुली चौपाल आयोजित की गई इसमें ग्रामपंचायत करतली और इसके आसपास स्थित कोयला खदानों से प्रभावित होने वाले लोग शामिल हुए ग्रामीणों ने एक स्वर में अबिका कोयला खदान का विरोध किया कहा कि खदान से प्रभावित होने वाला क्षेत्र कृषि प्रधान है । इस पर आदिवासी समाज के लोग खेती – बाड़ी करके परिवार चलाते हैं । खेती लोगों के आजीविका की साधन है । ग्रामीणों ने कहा कि खदान खलने से खेती की जमीन को नुकसान होगा । लोगों के समक्ष परिवार के जीवन यापन की गंभीर समस्या आ जाएगी । ग्रामीणों ने जनसुनवाई के दौरान खदान का विरोध किया । एक आवेदन पर 300 लोगों ने हस्ताक्षर किया । आवेदन पर्यावरणीय जनसुनवाई कराने वाले अधिकारी को सौंप दिया । कहा कि गांव में खदान नहीं खुलनी चाहिए । इस पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई । पेसा एक्ट का पालन नहीं करने का आरोप एसईसीएल प्रबंधन पर लगाया । कहा कि जिले में पांचवी अनुमचि लागू है । इसके बाद भी गांव में खदान खोलने के लिए ग्राम सभा से मंजूरी नहीं ली गई । जनसुनवाई का विरोध करने से पहले ग्रामीणों ने स्कूल परिसर में ही अलग से बैठक कर रणनीति बनाई । इसमें विधायक भी शामिल हुए ।

जलस्त्रोत पर भी असर

ग्रामीणों का कहना है कि खदान से प्रभावित होने वाले क्षेत्रों में नदी नाले भी हैं । खदान खुलने पर नदी नालों के अस्तित्व पर संकट आएगी । प्रभावित क्षेत्र में जल संकंट भी गंभीर हो जाएगी । ग्रामीणों ने कहा कि खदान के लिए कीमती वृक्षों की कटाई होगी इससे जंगल उजड़ जाएगा ।

खदान खोलने या नहीं खोलने को लेकर पर्यावरणीय स्वीकृति के लिए जनसुनवाई का आयोजन किया गया था । ग्रामीणों ने खदान नहीं खोलने की मांग की पर्यावरण पर बहुत कम लोगों ने राय दी

एनएस नैरोजी , एडीएम कोरबा

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