गुजरात दंगों की रेप पीड़िता को 50 लाख मुआवजा देने से इनकार, शीर्ष कोर्ट सख्त

न्याय : दो हफ्ते में घर, नौकरी देने का आदेश

नई दिल्ली . गुजरात दंगों के दौरान चर्चित सामूहिक दुष्कर्म कांड की पीड़िता की अवमानना याचिका पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में गुजरात सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि रेप पीड़ितों को मुआवजा देने की योजनाओं में 50 लाख रुपए देने का प्रावधान नहीं है ।

इस पर सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई , जस्टिस एस . ए , बोबडे और जस्टिस एस . अब्दुल नजीर की पीठ ने कहा कि एक बार फिर दोहराया जा रहा है कि इस केस के ‘ अनूठे तथ्यों को देखते हुए इतना मुआवजा देने के आदेश दिए गए हैं ।

सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार की वकील हेमतिका वाही से कहा , ‘ आप खुद को भाग्यशाली समझिए कि हम अपने आदेश में सरकार के खिलाफ कुछ नहीं कह रहे हैं । दरअसल 3 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार को पीडिता को 50 लाख रुपए मुआवजा देने के निर्देश दिए थे।

पूछा , अप्रैल के आदेश पर अमल क्यों नहीं

कोर्ट ने गुजरात सरकार से पूछा कि अप्रैल के आदेश पर अब तक अमल क्यों नहीं हुआ है । कोर्ट ने दोहराया है कि पीड़िता को 2 हफ्ते में ₹50 लाख मुआवजा , सरकारी नौकरी और आवास मुहैया कराया जाए सरकार मामले में पुनर्विचार याचिका दाखिल करेगी ।

क्या था मामला

दरअसल गोधरा कांड के बाद भड़की हिंसा में अहमदाबाद में पीड़िता के परिवार के सात लोगों की हत्या कर दी गई थी , गर्भवती पीड़िता से गैंगरेप किया गया था ।

पत्रिका से…

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