ज़िंदादिल कॉमरेड लाखन सिंह को प्रदेशभर के सामाजिक संगठनों ने दी श्रद्धांजलि

छत्तीसगढ़ के सामाजिक आंदोलनों में लगातार सक्रीय भूमिका निभाने वाले कॉमरेड लाखन सिंह का पिछले दिनों लंबी बीमारी के बाद बिलासपुर के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया।

आज रायपुर के बैरन बाज़ार स्थित पस्टोरियाल सेंटर में देश के कई सामाजिक संगठनों के लोग एकत्र हुए और कॉमरेड लाखन सिंह को श्रद्धांजलि दी। मूलतः ग्वालियर के रहने वाले लाखन सिंह 80 के दशक में नौकरी के संबंध में छत्तीसगढ़ आए और अंत समय तक इसे ही अपनी कर्मभूमि बनाए रखा। 2008 से PUCL छत्तीसगढ़ इकाई के अध्यक्ष के पद पर रहते हुए उन्होंने आदिवासियों, अल्पसंख्यकों, महिलाओं आदि पर हो रहे अत्याचार और दमन के ख़िलाफ़ हमेशा आवाज़ उठाई।

श्रद्धांजलि कार्यक्रम में सभी ने उनसे जुड़े अपने अनुभवों और बेशकीमती यादों को साझा कियाl मानव अधिकारों की रक्षा के साथ पत्रकारों की सुरक्षा के लिए कानून बनवाने और निर्दोष आदिवासियों की रिहाई की मांग हेतु शुरू किए गए अभियानों को भी आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया और समाज मे सकारात्मक परिवर्तन लाने के कॉमरेड लाखन सिंह के प्रयासों को पूरी सक्रीयता से आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

67 उम्र में भी लाखन सिंह का उत्साह और उनकी आंदोलनों में उनकी सक्रियता किसी युवा से भी अधिक थी। कार्यस्थल, सामाजिक आंदोलन, और घर परिवार की जिम्मेदारियां, ये सबकुछ एक साथ किसी माहिर फ़नकार की तरह सम्भाल लेने वाले लाखन सिंह शायद एक अकेले व्यक्ति हुए।

छत्तीसगढ़ के सामाजिक आंदोलनों से जुड़े हर व्यक्ति ने एक बात जरूर कही के लाखन सिंह ने अलग अलग संगठनों के द्वारा पूरे प्रदेशभर में चल रहे आंदोलनों को जोड़कर सभी आंदोलनकारियों को एक मंच में ले आने का बहुत महत्वपूर्ण कार्य किया।
माओवाद प्रभावित बस्तर इलाके में आदिवासियों पर हो रहे सरकारी दमन पर और मानवाधिकार के तमाम मुद्दों पर उन्होंने कार्य किया। प्रदेश में पत्रकारों पर बढ़ते हमलों को गंभीरता से लेते हुए PUCL ने पत्रकार सुरक्षा कानून का जो मसौदा तैयार किया उसमें लाखन सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
बस्तर की जेलों में नक्सली होने के संदेह में वर्षों से बन्द आदिवासियों के मामलों पर पुनः विचार करने और निर्दोषों को रिहा करने के संबंध में चल रहे आंदोलनों में भी वे शामिल रहे।

कार्यक्रम में शामिल संगठन
Pucl, cpi, cpm, cpilm libration, छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा, मजदूर कार्यकर्ता समिति, जनवादी लेखक संघ, प्रगतिशील लेखक संघ, छत्तीसगढ़ क्रिश्चन फोरम, छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा, बौद्ध महासभा, डी एम ए, छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन, ज़िला किसान संघ राजनांदगांव, नदी घाटी मोर्चा, अपना मोर्चा, जनचौक, आम आदमी पार्टी, दलित अधिकार अभियान, घासीदास सेवादार संघ, भिलाई स्टील ठेका मजदूर यूनियन, कृषक बिरादरी, सम्यक विचार मंच, रेला , कानूूनी मार्गदर्शन केंद्र ( न्यायिका ) छत्तीसगढ़

वक्तागण
आनंद मिश्रा, नन्द कश्यप, राजेंद्र सायल, कलादास डहरिया, कॉमरेड सी आर बक्शी, गौतम बंदोपाध्याय, जनकलाल ठाकुर, संजय पराते, राजकुमार सोनी, सोरा यादव, आलोक शुक्ला, पुष्पा, प्रियंका शुक्ला, नीलोत्पल शुक्ला, लखन सुबोध, डिग्री प्रसाद चौहान, संजीव खुदशाह, शरद कोकास, अरुण पन्नालाल, रमाकांत बंजारे, सुरेश टेकाम, इंदु नेताम, शालिनी गेरा, जूली, धर्मेंद्र आदि

Anuj Shrivastava

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