बाल संप्रेक्षण गृह मामले में बयान के बाद खुल रही जुल्म की दास्तान

बाल संप्रेक्षण गृह में किशोर की फांसी पर लाश मिलने के बाद जांच में हुआ खुलासा

बिलासपुर . बाल संप्रेक्षण गृह में किशोरों पर किस प्रकार से जुल्म होता था इसका खुलासा जांच के दौरान सामने आ रहे बयान से हो रहा है । जो सामने निकल कर आ रहा है उसके अनुसार संप्रेक्षण गृह में पहले उनपर खूब जुल्म ढाया जाता था इसके बाद भी मन नहीं भरता था तो निजी तौर पर नियुक्त किए गए बाउंसरों से किशोरों को पिटवाया जाता था । इस बात का खुलासा दंडाधिकारी जांच के बाद लिए जा रहे बयान से हो रहा है । हलांकि मामले में जांच अभी पूरी नहीं हुई है जबकि जांच को प्रभावित करने के लिए रायपुर में बैठे कुछ आईएएस भी सक्रिय हो गए हैं ।

          समाज की मुख्य धारा से भटने वाले नाबालिग और किशोरों के सुधार के लिए बनाए गए बाल संप्रेक्षण में बच्चों को और आपराधिक प्रवृत्ति का बनाने में सरकारी अधिकारी और कर्मचारी ही अमादा दिखते हैं । बच्चों की छोटी - छोटी गलतियों पर उन्हें बाल संप्रेक्षण गृह की तात्कालीन अधिकारी पीटती थी । इतना ही नहीं निजी रूप में 4 बाउंसर भी नियुक्त कर रखे गए थे । बाउंसर बाल संप्रेक्षण गृह के किशोरों और नाबालिगों की पिटाई करते थे।26 जुलाई को चोरी के मामले में केन्द्रीय जेल से बाल संप्रेक्षण गृह भेजे गए 17 वर्षीय किशोर ने रात में ही चेंजिंग रूम में फांसी लगा ली थी । घटना के बाद कलेक्टर डॉ . संजय अलंग ने कार्यपालक दंडाधिकारी एआर टंडन को दंडाधिकारी जांच का आदेश दिया जांच में बाल संप्रेक्षण गृह के 14 कर्मचारियों के बयान दर्ज किए गए थे , जिसमें तत्कालीन अधीक्षिका अनुराधा सिंह और उसके बाउंसरों के करतूतों का खलासा हुआ है ।

यहां से हुआ खुलासा

जांच में कार्यपालक दंडाधिकारी ने बाल संप्रेक्षण गृह से मार्च 2019 में चोरी के मामले में छूटे एक किशोर का बयान दर्ज किया था । किशोर ने जांच अधिकारी के समक्ष तत्कालीन प्रभारीद्वारापीटने और रात में बाउंसरो द्वारा किशोरों और नाबालिगों को पीटने का खुलासा किया था । बयान में किशोर ने बाउंसरों के नाम भी बताए हैं । किशोर ने यह भी खुलासा किया था कि पहली बार संप्रक्षण गृह पहुंचने वाले किशोरों को बाथरूम से लगे चेंजिंग रूम में बिना पंखे के सोने के लिए भेजा जाता है । साथ ही गलती करने पर किशोरों को एक समय का भोजन नहीं दिया जाता और 4 दिनों तक सजा के रूप में नमक व चावल खाने के लिए दिया जाता है ।

सकते में आए कर्मचारियों ने खोला राज

अधीक्षिका व बाउंसरों का राज खुलने के बाद जांच अधिकारी के सामने संप्रेक्षण गृह के कर्मचारियों और बाउंसरों को इस जुल्मका राज खोलना पड़ा बाउंसरों ने तात्कालीन प्रभारी के कहने पर बच्चों को पीटने की बात स्वीकार की वहीं संप्रेक्षण गृह के अन्य कर्मचारियों ने भी अधीक्षिका की दूसरी करतूतों का भी खुलासा किया ।

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