लोक सभा अध्यक्ष के जातिवादी बयान पर PUCL छत्तीसगढ़ ने जताई आपत्ति

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हमारे देश की संसद के एक सदन, लोकसभा के अध्यक्ष श्री ओम बिरला जो, कि एक संवैधानिक पद पर आसीन है ने कोटा में 8 सितंबर 2019 को ब्राह्मण महासभा की बैठक के बाद ट्वीट किया कि ” समाज में ब्राह्मणों का हमेशा से उच्च स्थान रहा है ये स्थान उनकी त्याग, तपस्या का परिणाम है। यही वजह है कि ब्राह्मण समाज हमेशा से मार्गदर्शक की भूमिका में रहा है”।

इस बयान की हम कड़ी निंदा करते हैं। एक तो, किसी भी समाज का वर्चस्व स्थापित करना या एक समाज को अन्य समाजों के ऊपर घोषित करना यह संविधान के अनुच्छेद 14 के विरुद्ध है। यह एक तरीके से अन्य जातियों को हीन दृष्टि की भावना देता है। जाति वाद का बढ़ावा देता है।

एक व्यक्ति संवैधानिक पद पर रहते हुए इस तरह का वक्तव्य सार्वजनिक रूप से कैसे कह सकता है। यह कृत्य भारतीय दंड विधान की धारा 153 के तहत अपराध की श्रेणी में आता है ।

पीयूसीएल इस बयान की कड़े शब्दों में निंदा करता है और माननीय लोकसभा अध्यक्ष से यह बयान वापस लेने की मांग करता है ।

साथ ही देश के महामहिम राष्ट्रपति सहित समस्त जबाबदेह संस्थानों का इस मामले में संज्ञान एवं ध्यानाकर्षण चाहता है ।

डिग्री प्रसाद चौहान
(अध्यक्ष)

शालिनी गेरा
(सचिव)

पीयूसीएल , छत्तीसगढ़.

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