संप्रेक्षण गृह में मासूम की मौत : जांच प्रभावित करने आईएएस अफसरों के फोन आ रहे

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बाल संप्रेक्षण गृह : जांच प्रभावित करने की कोशिश

बिलासपुर , बाल संप्रेक्षण गृह में 27 जुलाई को फांसी पर किशोर की लाश मिलने के मामले की जांच को बिलासपुर से लेकर रायपुर तक के आईएएस अफसर दखल दे रहे हैं ।

मामले में दोषियों को बचाने के लिए रायपुर मंत्रालय में पदस्थ आईएएस अधिकारियों ने कोई कसर नहीं छोड़ी है । बकायदा इस मामले की जांच कर रहे अधिकारी से तीन बार संपर्क कर अधीक्षिका के पक्ष में जांच करने का दबाव भी बनाया जा चुका है । अशोक नगर सरकंडा निवासी 17 वर्षीय किशोर की लाश 27 जुलाई को बाल संप्रेक्षण गृह के
चेजिंग रूम में मिली थी ।

किशोर को सरकंडा पुलिस ने 19 जुलाई को बालिक समझकर केन्द्रीय जेल भेज दिया था । किशोर के परिजनों द्वारा जानकारी देने के बाद पुलिस ने किशोर को बाल संप्रेक्षण गृह भेजने के लिए कोर्ट से गुहार लगाई थी । 26 जुलाई को रात 8 बजे किशोर को बाल संप्रेक्षण गृह भेजा गया था । मामले में कलेक्टर डॉ . संजय अलंग ने दंडाधिकारी जांच के आदेश देते हए जांच का जिम्मा कार्यपालक दंडाधिकारी एआर टडन का दिया था । 1 अगस्त से जांच अधिकारी टंडन मामले की जांच कर रहे हैं । एक महीने की जांच के दौरान जांच अधिकारी को बिलासपुर स्थित महिला एवं बाल विकास विभाग के एक अधिकारी और रायपुर मंत्रालय में बैठे 3 आईएएस अधिकारियों ने संप्रेक्षण गृह कांड में हुई मौत के दोषियों को बचाते हुए उनके पक्ष में जांच रिपोर्ट बनाने का दबाव बना चुके हैं ।

जांच अधिकारी ने मांगा है एक माह का समय

हालांकि अभी मामले की जांच पूरी नहीं हुई है । जांच अधिकारी टंडन ने मामले में पीएम रिपोर्ट नहीं मिलने और किशोर का पीएम करने वाले डाक्टरों के बयान दर्ज नहीं होने का हवाला देते हुए जांच के लिए एक महीने की और मोहलत मांगी है ।

पत्रिका

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Anuj Shrivastava

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