हम मना करते रहे, और वह चले गए

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लाखन सिंह जी, जिनको हम लाखन भाई के नाम से बुलाते है, हमेशा हमारे साथ रहेंगे। लेकिन ऑफिस में जब कंप्यूटर के सामने वाली कुर्सी खाली देखेंगे, या उनकी आराम कुर्सी देखेंगे तो उनकी कमी बहुत खलेगी। हम सब आपस में कहते थे कि लाखन भाई ही जगलग के सबसे जवान, सबसे ज़िंदादिल, सबसे रंगीन,और सबसे सक्रिय साथी हैं। भले ही वे वकील नहीं थे और जगलग में औपचारिक रूप से शामिल भी नहीं थे, फिर भी ऑफिस रोज़ाना आते थे और प्रत्येक केस में अत्यंत रुचि लेकर हमें प्रोत्साहित करते थे। ताज़ा ताज़ा खबरें ढूंढकर उनपर अपनी टीप-टिप्पणियां देते रहते थे। हम जगलग के वकील बेहद ही सौभाग्यशाली है कि हमें उनसे इतना प्यार मिला, इतना सीखने को मिला, उनके साथ हाथ पकड़कर हमने कुछ बहुत ही कठिन समय भी हसते हुए बिताया। आज हम सभी के पास सामूहिक और व्यक्तिगत रूप से लाखन भाई की यादों का पिटारा जमा है, ये यादें हमेशा साथ रहेंगी। लाखन भाई आप को जीतने सलाम दें, उतने कम हैं।

  • शालिनी, शिखा, निकिता, ईशा, प्रियंका, लता
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