बिलासपुर: निजी अस्पताल पर था बंधक बनाकर वसूली करने का आरोप, कल रात मरीज़ की मौत

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बीते सोमवार की दोपहर छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर में एक निजी अस्पताल में भरती घायल पति की खोपड़ी का टुकड़ा लेकर जब एक महिला सिटी कोतवाली थाने पहुंची तो हड़कंप मच गया. मरीज़ के पिता ने आरोप लगाया कि “एक निजी अस्पताल में उन्होंने अपने बेटे संजय को एक माह पूर्व इलाज इलाज के लिए भारती कराया था, डॉक्टर ने 72 घंटे में ठीक करने का भरोसा दिलाया था, अस्पताल अब तक 6 लाख रुपए ले चुका है पर संजय की हालत में अभी भी कोई सुधार नहीं हुआ है. अस्पताल लगातार पैसे मांग रहा है. हम दूसरी जगह इलाज कराना चाहते हैं पर अस्पताल ने मरीज़ को बंधक बना रखा है”.

पति की खोपड़ी का टुकड़ा लिए थाने पहुंची शिवकुमारी
फ़ोटो सौजन्य – Cg news Today


cgnewwstoday पर प्रकाशित ताज़ा खबरों के अनुसार कल रात मरीज़ की मौत हो चुकी है.

ज़मीन बेचकर अस्पताल को दिए थे 6 लाख रूपये

जांजगीर-चांपा ज़िले में पामगढ़ थानाक्षेत्र के ग्राम मेउ निवासी संजय कुमार मेलों में मनियारी का सामान बेचता था और आम दिनों में फेरी लगाता था. जुलाई माह में कोरबा ज़िले के खण्डई में वो अपना सामान बेचने गया था. लौटते वक्त दुर्घटना में शरीर के दुसरे अंगों समेत सिर पर गहरी चोट आई. 28 जुलाई को उसे इलाज के लिए पामगढ़ के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया. बेहतर इलाज़ के लिए डॉक्टरों ने परिवार को सलाह दी कि मरीज़ को बिलासपुर ले जाएं. बिलासपुर के गांधी चौक स्थित श्री रामकृष्ण अस्पताल में परिवार ने उसे भारती कराया.

संजय की पत्नी शिवकुमारी ने बताया कि जब यहां भरती कराने लाए तो अस्पताल के डॉक्टर ने उसके पति को 72 घंटे में ठीक करने का दावा किया था. भर्ती के दौरान उससे 50 हजार रुपए जमा भी कराए गए थे. मरीज़ को अस्पताल में लगभग एक महीने भारती रखा गया. परिवार ने मीडिया को जानकारी दी कि वे अस्पताल से 4 लाख रुपयों की दवाएं ख़रीद चुके हैं और बतौर फ़ीस 1 लाख 88 हज़ार रूपये अस्पताल में जमा करा चुके हैं. मरीज़ के पिता सरजू राम ने बताया कि इलाज़ के लिए उन्होंने गाँव की अपनी ज़मीन बेच दी है. हालांकि अस्पताल प्रबंधन की तरफ़ से बिल भुगतान के विषय में 5 लाख 90 हज़ार रूपये का बिल बनने और परिवार द्वारा केवल 1 लाख 90 हज़ार का ही भुगतान करने की बात कही गई है.

सिविल लाइन ठाणे पंहुचा पीड़ित परिवार
फ़ोटो सौजन्य – पत्रिका न्यूज़

बिना बताए कर दिया ऑपरेशन और हाथ में थमा दिया खोपड़ी का टुकड़ा

मृतक संजय की पत्नी शिवकुमारी ने बताया कि लगभग एक महीने तक इलाज़ चलने के बाद भी जब मरीज़ की स्थिति ठीक नहीं हुई तब वो पूछताछ करने डॉक्टर के पास पहुची, डॉक्टर ने उसे खोपड़ी का एक हिस्सा थमा दिया और कहा कि संजय कोमा में है उसके सिर का ऑपरेशन कर दिया गया है. साथ ही परिवार से 3 लाख 79 हज़ार 50 रुपयों की और मांग की गई.

एक ग़रीब फेरीवाले के परिवार के लिए एक महीने तक प्राईवेट अस्पताल का ख़र्च उठाना कितनी बड़ी मुश्किल की बात है ये तो हम भी सीधे तौर पर समझ सकते हैं. संजय के परिवार ने अपनी ज़मीन बेचकर जैसे तैसे 6 लाख रूपु इकठ्ठा कर लिए पर हर किसी के पास तो बेचने को ज़मीन भी नहीं होती.

अस्पताल भवन
फ़ोटो सौजन्य – Google

पीड़ित परिवार ने ये भी शिकायत की के एक माह तक मरीज़ की हालात न सुधरती देख वे इलाज के लिए किसी अन्य स्थान पर जाना चाहते थे पर अस्पताल ने बकाया 3 लाख 79 हज़ार 50 रूपए लिए बगैर मरीज़ को छोड़ने से इनकार कर दिया. पीड़ित परिवार इससे परेशान होकर सोमवार को सिटी कोतवाली थाने पहुंचा. पुलिस ने पीड़ित परिवार की शिकायत दर्ज की और मामले में जांच करने का आश्वासन दिया. पूछताछ में अस्पताल प्रबंधन ने अपने ऊपर लगे आरोपों को ख़ारिज किया है.

मजबूरी में लोगों को प्राइवेट अस्पतालों का रुख़ करना पड़ता है

राजधानी रायपुर के कुछ-एक सरकारी अस्पतालों को छोड़ दें तो पूरे छत्तीसगढ़ में सरकारी स्वास्थय सुविधाओं की बद्तर स्थिति है. ज़्यादातर सरकारी डाक्टरों ने अपना प्राइवेट क्लीनिक खोल रखा है, ज़्यादातर वे अपने क्लीनिक में मिलते हैं और मरीज़ों को वहीँ आकर इलाज कराने की सलाह देते हैं. गन्दगी ऐसी के कई जगहों से तो नाक बंद के के गुज़ारना पड़ता है. किसी भी तरह की आपात स्थिति से निपटने का कोई इंतज़ाम नहीं है. बड़ी बीमारियों का इलाज तो दूर की बात है सामान्य बीमारियों की दवाएं भी कई बार उपलब्ध नहीं हो पातीं. इसलिए मजबूरी में लोगों को प्राइवेट अस्पतालों का रुख़ करना पड़ता है.

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Anuj Shrivastava

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