कोयला उधोग में 100 फीसदी एफडीआई का विरोध

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कोयला जगत : संयुक्त बैठक कर आगे की रणनिति बनाएंगे श्रमिक संगठन

पत्रिका न्यूज

कोरबा . कोयला उद्योग में 100 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश ( एफडीआई ) का श्रमिक संगठनों ने कड़ा विरोध किया है । श्रमिक संगठनों का कहना है कि सरकार के फैसले से कोयला उद्योग बर्बाद हो जाएगा । कोयला मजदूर सड़क पर आ जाएंगे छंटनी का खतरा बढ़ जाएगा बुधवार को दिल्ली में कैबिनेट की एक बैठक हुई । इसमें लिए गए फैसले में कोल माइनिंग , कोयला की बिक्री और कोयला से जुड़े तमाम कामों के लिए शत – प्रतिशत एफडीआई की जानकारी श्रमिक नेताओं को हुई इस पर श्रमिक नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है उनका कहना है कि सरकार के फैसले से कोल इंडिया के निजीकरण का रास्ता साफ हो गया है । श्रमिक नेताओं को आशंका है कि विदेशी निवेशक अपनी पूंजी कोयला उद्योग में लगाएंगे श्रम सस्ता होने से उनका कोयला बाजार में कोल इंडिया के कोयले की तुलना में सस्ता होगा । उनके कोयले की मांग बढ़ेगी कोल इंडिया को कोयला बेचने के लिए संर्घष करना होगा । कंपनी से मंहगे दर पर कोई कोयला नहीं खरीदेगा । इसका सीधा असर कोल इंडिया पर पड़ेगा । कंपनी पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा मजदूरों की छंटनी होगी धीरे – धीरे कोयला उद्योग निजी हाथों में चला जाएगा ।

संयुक्त बैठक में बनाएंगे रणनिति

सरकार के फैसले के बाद श्रमिक संगठन संयुक्त बैठक करने जा रहे हैं । हालांकि बैठक कब और कहां होगी ? यह स्पष्ट नहीं है । वामपंथी ट्रेड यूनियन के नेता डीडी रामानंदन ने कहा कि कोयला में 100 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की मंजूदरी से भारत में ऊर्जा सुरक्षा का खतरा बढ़ जाएगा। मल्टी नेशलन कंपनियों को कोयले के लूट की छूट मिल जाएगी ।

सरकार के फैसले से ऊर्जा सुरक्षा का खतरा बढ़ जाएगा । सरकारी कोयला खदानें धीरे – धीरे बंद या निजी हाथों में चली जाएंगी । कोयला में 100 फीसदी एफडीआई का विरोध करते हैं । सभी ट्रेड यूनियन मिलकर रणनीति बनाएंगे ।

डीडी रामानंदन , श्रमिक नेता सीटू

विदेशी कंपनियों को खुश N करने के लिए केन्द्र सरकार ने यह कदम उठाया है । इससे उद्योग बर्बाद हो जाएगा । मजदूर सड़क पर आ जाएंगे । सरकार के फैसले का असर अफसर और मजदूर दोनों पर पड़ेगा । समय रहते एकजुट होने की जरुरत है ।

दीपेश मिश्रा , श्रमिक नेता सीट्र

विदेशी निवेशक सबसे पहले मजदूर और अधिकारी को उपकृत करते हैं । समय के साथ इन कंपनियों का लेबर लॉ इतना अधिक सख्त हो जाता है कि इससे मजदूरों को काम करना कठिन हो जाता है श्रमिक संगठनों की चिंता जायज है । इससे कोल इंडिया के निजीकरण का रास्ता साफ हो जाएगा ।

एस गोभिल , प्रोफेसर , अर्थशास्त्र

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