बैक डेट पर कर्मचारियों ने फाड़ा पीओआर , गवाहों का नाम भी दर्ज किया फर्जी

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पत्रिका न्यूज

काकर , गढ़िया पहाड सड़क निर्माण में मलबा से तबाह सैकड़ों पेड , चोरी के मुरुम खनन और अन्य मामले में वनपाल ने पीओआर फाड़ने में भी बड़ी गड़बड़ी की है । पीओआर राजस्टर खद प्रमाणित कर रहा कि बैंक डेट पर फाड़ा गया है , जो ठेकेदार से मिलीभगत कर हर कदम बचाने का प्रयास किया है । सूचना के अधिकार में खुलासा हुआ है । वन विभाग की ओर से मिले पीओआर में बड़ा झोल सामने आ रहा है । 2018 तक वनपालने गढ़िया सड़क निर्माण से निकले मलबा से 430 पेड़ नष्ट होने और मुरुम चोरी का पीओआर नहीं फाड़ा था । कोर्ट से फटाकर पड़ने पर जब नौकरी पर खतरा मंडराने लगा तो बैंक डेट में यानी दिसंबर माह 2017 में पीओआर रजिस्टर में कार्यपालन अभियंता के नाम पर वनपाल हीरा सिंह ने पीओआर का प्रकरण तैयार कर दिया । सूचना के अधिकार में मिले दस्तावेज में यह प्रमाणित हो रहा कि रजिस्टर में खाली जगह में वनपाल हीरासिंह ने 27 दिसंबर 2017 को प्रकरण तैयार किया है ।
पीओआर क्रमांक संख्या 129 में देखें तो 29 दिसंबर 2017 तक सभी प्रकरण दर्ज हो गया था । गढ़िया पहाड़ का पीओआर क्रमांक संख्या 130 और 131 रजिस्टर में बैक डेट पर चढ़ाया गया है । प्रकरण दर्ज करते हुए क्रम में 29 दिसंबर के बाद 28 दिसंबर लिखा है जो पीओआर कार्यपाल अभियंता के नाम पर दर्ज हैं । पीओआर रजिस्टर से साफ हो गया कि चुपके से बैक डेट में रजिस्टर में चढ़ाया गया है । ऐसे में सवाल खड़ा हो रहा कि क्या वनपाल हीरासिंह अपने आलाधिकारियों को सड़क निर्माण में पहाड़ पर मलबा डम्प करने की सूचना नहीं दी थी । कोर्ट में मामला पहुंचा तो रजिस्टर में खाली स्थान देखकर इस तरह का पीओआर किया गया । कहीं न कहीं वनपाल समय पर पीओआर नहीं फाडा है , जो एनजीटी में यह गलती पोल खोलने के लिए काफी हैं ।

राज्य सूचना आयोग की फटकार पर लोनिवि के अफसर को लिखकर देना पड़ा स्पस्टीकरण

सुचना के अधिकार की खिल्ली उड़ाने वाले लोनिवि के कार्यपालन अभियंता को राज्य सूचना आयोग की फटकार सुननी पड़ गई । आवेदक को जानकारी नहीं देने पर राज्य सूचना आयोग ने साफ शब्दों में कार्यपालन अभियान को कहा स्टॉन्ग पेपर से आवेदक को अवगत कराएं । फटाकर के बाद कार्यपालन अभियंता ने स्टॉम्प पेपर लिखकर दिया कि नगर पालिका से मलबा डमा करने के लिए अनुमति मांगा गया था पर नहीं दिया । न ही किसी प्रकार की आपत्ति किया । इसी तरह से ग्राम पचायत सिंगरभाट से अनापत्ति प्रमाणपत्र मलबा डा करने के लिए मांगा गया था । पर नहीं दिया और न ही आपत्ति किया लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन अभियंता स्टॉम्प पेपर पर लिखकर अपनी कलम फिर फंसा ली है ।

स्टाम्प पेपर पर लिखा नगर पालिका कांकेर और ग्राम सिंगारभट ने आपत्ति नही की

ग्राम पंचायत सिंगराभांट ने पहले ही लिखकर दे चुका है कि हमारे गांव में न तो मलबा डम्प किया गया है । न ही किसी को अनापत्ति प्रमाणपत्र दिया गया है । नगर पालिका । । अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी नहीं करने की जानकारी दे दी है । ऐसे में सवाल खड़ा हो रहा कि जब लोक निर्माण विभाग ने पहाड़ से मलबा को न तो सिंगारभाट में डम्प किया न ही नगर पालिका क्षेत्र इंडोर स्टेडियस में पीछे रखा तो आखिर कौन आपत्ति करेगा । जबकि लोक निर्माण विभाग ने सिर्फ मलाबा का ठेकेदार को 71 लाख रुपए का भुगतान कर दिया है , जो फर्जी बिल बाउचर को प्रमाणित कर रहा है । कार्यपालन अभियंता का स्टॉम्प पेपर पर लिखकर देना एनजीटी में शिकायतकर्ता एडी राय के लिए एक मजबूत दस्तावेज तैयार हो गया ।

वनपाल ने मलबा डम्प करने से नष्ट पेड़ों की गणना नहीं की और गवाहों कोखड़ाकरबोले – लोनिविदोषी , उधरराज्यसूचनाआयोग की फटकार पर कार्यपालन अभियंता को स्टॉप पेपर पर लिख कर दिया कि पालिका औरपंचायतने नहीं दीअनापत्तिप्रमाणपत्र

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