चक्ररधर समारोह रामलीला मैदान में क्यों ? ऑडिटोरियम में नहीं होगा तो करोड़ों खर्च कर ऑडिटोरियम क्यों बनाया गया?क्या यह जनता के धन की बर्बादी नहीं है?

चक्रधर समारोह रामलीला मैदान में होगा इस अचानक समाचार से सांस्कृतिकर्मियों,बुद्धिजीवियों, एवं प्रबुद्ध नागरिकों को अत्यंत ही आश्चर्य हुआ।पान ठेलो,चाय की टपरियों,होटलों,चौक चौराहों,दफ्तरों , घर आंगन एवं दोस्त- यारों और सोशल मीडिया में यह चर्चा और सवाल आम हो गया है कि “यदि चक्रधर समारोह ऑडिटोरियम में नहीं होगा तो करोड़ों खर्च कर ऑडिटोरियम क्यों बनाया गया?क्या यह जनता के धन की बर्बादी नहीं है?आखिर ऑडिटोरियम का क्या करेंगे?”मुख्यमंत्री माननीय भुपेश बघेल को जवाब देना होगा। जब सरकार बदली है तब बदलाव भी दिखनी चाहिए।प्रशासन को दलालों के चंगुल से मुक्त होना होगा। यदि सबकुछ पहले की तरह चलता रहा तो सरकार को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।

सांस्कृतिक कर्मियों, बुद्धिजीवियों, खेलप्रेमियों एवं प्रबुद्ध नागरिकों की लंबे समय से की जा रही मांग पर सांस्कृतिक भवन बनाया गया। यह अलग बात है कि सरकार ने संस्कृति कर्मियों से बिना सलाह मशविरा किये अपनी मनमर्जी से निर्धारित लक्ष्य बजट से कई गुणा ज्यादा लागत में निर्धारित समयसीमा से काफी विलम्ब में बनाया। पिछली सरकार का जनसरोकार से दूर रहना, मंत्रियों, अधिकारियों,पूंजीपतियों , ठेकेदारों , एवं दलालों के साथ गठबंधन का नतीजा राज्य व जनता को भुगतना पड़ा। यही जन आक्रोश सरकार को मंहगी पड़ी।नतीजतन सरकार गंवानी पड़ी।यदि भुपेश बघेल सरकार इन दुश्चक्रों से बाहर नहीं निकली तो वही हश्र होगा।

माननीय विधायक और कलेक्टर महोदय की उपस्थिति में संस्कृति कर्मियों, साहित्यकारों,बुद्धिजीवियों, प्रबुद्ध नागरिकों विभिन्न विभागों के अधिकारियों की भागीदारी के साथ आयोजित वृहद बैठक में सभी मुद्दों एवं तथ्यों पर ध्यान देते हुए सर्वसम्मति से 35 वां चक्रधर समारोह सांस्कृतिक भवन (ऑडिटोरियम) में आयोजित करने का निर्णय लिया गया।ऑडिटोरियम की जितनी बैठक क्षमता है उससे ज्यादा उपस्थिति होने पर आयोजकों को खुश होना चाहिए।तथा अतिरेक उपस्थिति के लिए समय काल व परिस्थितियों के अनुसार वैकल्पिक व्यवस्था किये जाने का भी निर्णय लिया गया था। इस निर्णय को बिना बैठक के बदलने का किसी भी अधिकारी या व्यक्ति को क्या अधिकार है?फिर उस बैठक का क्या औचित्य रहा? यदि सरकार ही संविधान नियम कानून व अनुशासन का पालन नहीं करेगी तो राज्य का क्या होगा?सवाल यह उठता है कि राज्य में लोकतंत्र है या तानाशाही ? क्या प्रशासन को जनभावनाओं के खिलाफ मनमानी या तानाशाही पूर्ण निर्णय लेने का अधिकार है?

उल्लेखनीय है कि कुछ ही खेल मैदान बचे हैं। उन्हें संरक्षित करने की जरूरत है न कि बर्बाद करने की। खिलाड़ियों ने समय समय पर खेल मैदानों को संरक्षित एवं समृद्ध करने की जरुरत पर जोर देती रही है। उन्हें संरक्षित करने की जरूरत है न कि बर्बाद करने की। समारोह ऑडिटोरियम में होने से खेल मैदान खराब होने से बचेंगे ,टेण्ट से लाखों रुपए की बचत होगी।जिसका अन्य विकास कार्यों में उपयोग हो सकता है।तथा समारोह की गरिमा भी बढ़ेगी।

गणेश कछवाहा
संस्थापक सदस्य
गणेश मेला चक्रधर समारोह
जिला बचाओ संघर्ष मोर्चा
एवं संयोजक
ट्रेड यूनियन कॉउंसिल रायगढ़ छत्तीसगढ़।

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