हाथी रिजर्व से कोयले पर संकट : आर कृष्णा दास .

रायपुर Aug 19, 2019 : बिजनेस स्टेंडर्ड का समाचार


छत्तीसगढ़ में प्रस्तावित लेमरू हाथी संरक्षित क्षेत्र (रिजर्व) से कोयला खनन पर व्यापक असर हो सकता है। इससे पहले तैयार 450 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले प्रस्तावित लेमरू संरक्षित क्षेत्र की चपेट में 7 कोयला खदान आ रही थीं। राज्य में पिछली भाजपा सरकार ने कोयला खदानों और खनन कार्यों के मद्देनजर यह योजना टाल दी थी। अब मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने हाल में ही यह योजना दोबारा शुरू करने की घोषणा की है। इस बारे में एक वरिष्ठ वन अधिकारी ने कहा, ‘यह योजना शुरुआती चरण में है और हम योजना का खाका तैयार कर रहे हैं।’ अधिकारी ने कहा कि पूरी योजना एक बार तैयार होने के बाद यह मालूम हो सकेगा कि इसके तहत और क्षेत्र आएंगे या पुरानी योजना के अनुरूप ही सारा काम होगा। अगर सरकार पुरानी योजना के अनुसार आगे बढ़ती है तो इससे राज्य में सालाना 4 करोड़ टन कोयला उत्पादन प्रभावित होगा। ये कोयला खदान राज्य के रायगढ़ से लेकर कोरबा और सरगुजा जिलों तक फैली है।

हालांकि पर्यावरण कार्यकताओं का दावा है कि प्रस्तावित योजना 2,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में होगी और इसमें हसदेव-अरंड कोयला क्षेत्र का एक बड़ा हिस्सा आ जाएगा। यह कोयला क्षेत्र सबसे बड़े वन क्षेत्रों में एक में स्थित है। वन अधिकारियों ने इस पर टिप्पणी नहीं की कि क्या हसदेव-अरंड क्षेत्र भी हाथी संरक्षित क्षेत्र का हिस्सा होगा। उन्होंने कहा कि योजना फिलहाल अंतिम मुकाम तक नहीं पहुंची है और इस पर अब भी काम चल रहा है। अगर इस योजना की जद में कोयला क्षेत्र आया तो इससे राज्य में कोयला उत्पादन पर बुरा असर होगा। इस कोयला क्षेत्र में 5.179 अरब टन कोयला भंडार होने का अनुमान है, जिनमें 1.36 अरब टन भंडार की पुष्टि हो चुकी है। करीब 30 कोयला खदानें चिह्नित की गई हैं, जिनमें 16 सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र की विभिन्न कंपनियों को आवंटित हो चुकी हैं।,

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