संजीव भट्ट का खुला खत-लोकतंत्र के लिए कठिन वक्त, चुप रहना ठीक नहीं : क्विंट हिंदी

30 साल पुराने केस में उम्रकैद की सजा पा चुके IPS ऑफिसर संजीव भट्ट ने अपने परिवार को एक इमोशनल लेटर लिखा है. लेटर में संजीव ने पत्नी श्वेता और बच्चों समेत समर्थकों को संबोधित किया है.

बता दें संजीव भट्ट को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ मोर्चा खोलने के लिए जाना जाता है. गुजरात दंगों के वक्त वे प्रदेश पुलिस में सीनियर पोस्ट पर थे.

उन्होंने लेटर में अपने परिवार का शुक्रिया अदा करते हुए लिखा,’ मैं जो भी कुछ हूं वो आपकी वजह से हूं. आप मेरी ताकत और प्रेरणा हैं. आप वो ईंधन हैं जिससे तमाम विरोधाभासों के बावजूद मेरी आदर्शवाद की भट्टी जलती रही.’ अपनी पत्नी श्वेता को संबोधित करते हुए उन्होंने लिखा,पिछले कुछ साल तुमपर और बच्चों के लिए आसान नहीं रहे हैं. तुम सबने खुद से मेरे फैसलों के लिए अपना सबकुछ न्यौछावर कर दिया. मैंने सबकुछ उस चीज के लिए दांव पर लगाया जो हम सबसे बड़ी थी.श्वेता जैन

लेटर में भट्ट ने पत्नी से उनके टूटते मकान को लाचार होकर देखने के लिए भी अफसोस जताया. बता दें भट्ट के घर के कुछ हिस्से को पिछले साल अहमदाबाद म्यूनिसिपल कारपोरेशन ने गैरकानूनी करार देते हुए गिरा दिया था.

भट्ट ने आगे लिखा, ‘आपने (श्वेता) अकेले ही तमाम दिक्कतों का बड़ी बहादुरी से सामना किया. पूरे देश ने अन्याय के खिलाफ खड़े होने की आपकी ताकत और साहस को देखा.’

संजीव भट्ट ने अपने बेटे शांतनु का अपनी मां के साथ खड़े रहने के लिए भी शुक्रिया अदा किया है. बेटी आकाशी को संजीव भट्ट ने लिखा, ‘मैं नहीं चाहता कि मेरे फैसलों की वजह से तुम्हारी जिंदगी की दिशा भ्रमित हो जाए. मैं केवल अंदाजा लगा सकता हूं कि यह सब कितना कठिन रहा होगा.’

‘सच, असहमति और तर्क को दबाया जा रहा है’

आज सच, असहमति और तर्क को दबाने के लिए सत्ता सभी हथकंडे अपना रही है. यह लोकतंत्र के लिए बुरा वक्त है. जिस तरह शाम एकदम से नहीं होती, उसी तरह सत्ता की निंरकुशता भी एक साथ नहीं आती.अंधकार हमेशा अज्ञानता और उदासीनता पर पलता है. हम भारत के लोग खड़े होकर देखते रहे कि किस तरह नफरत और झूठ पर पलने वाली सत्ता के स्वार्थों के लिए संस्थानों को दबाया जाता रहा.संजीव भट्ट

संजीव भट्ट ने आगे लिखा,‘आपमें से हर एक से न केवल मुझे प्रेरणा मिली है, बल्कि श्वेता को जरूरी ताकत भी दी है. यह भारतीय लोकतंत्र के लिए मुश्किल वक्त है. हम आज जो विकल्प चुनेंगे वो अगले कुछ दशकों के लिए हमारा भाग्य तय करेंगे.कोई भी आज चुप रहने की सहूलियत नहीं ले सकता. हमें लड़ना होगा. राजनीति देखने वालों का खेल नहीं है. हम राजनीति को नजरंदाज कर सकते हैं, राजनीति हमें नहीं.संजीव भट्

लेटर के आखिरी पेज में उन्होंने अपने उन दोस्तों और समर्थकों का शुक्रिया अदा किया है जो उनके और परिवार के साथ मुश्किल वक्त में खड़े रहे.

बता दें IPS अधिकारी रहे संजीव भट्ट को कुछ साल पहले नौकरी से सस्पेंड कर दिया गया था. हाल ही में उन्हें एक 30 साल पुराने कस्टोडियल डेथ के केस में सजा सुनाई गई है.

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